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इस बार नागपंचमी पर श्रावण सोमवार भी, महाकाल में दो स्तर पर तैयारियां

2 वर्ष पहले
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महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में नागपंचमी पर दर्शन के लिए लोहे की सीढ़ियां लगाने का काम रविवार से शुरू हो गया है। एक हफ्ते में सीढ़ियां लगा दी जाएंगी। इन सीढिय़ों से होकर श्रद्धालु नागचंद्रेश्वर मंदिर में जाएंगे। नागपंचमी 5 अगस्त को है। इस दिन श्रावण सोमवार, सवारी और नागपंचमी एक साथ होने से दोनों मंदिर में दर्शन और सवारी की व्यवस्था की तिहरी जिम्मेदारी होगी।

मंदिर प्रशासन ने श्रावण की तैयारी के क्रम में अब नागपंचमी की तैयारी भी शुरू कर दी है। रविवार को नागचंद्रेश्वर मंदिर में जाने के लिए लोहे की सीढ़ियां लगाने का काम शुरू कर दिया। पीडब्ल्यूडी के माध्यम से यह सीढ़ियां लगाई जाती है। विभाग के उपयंत्री राजेंद्र शिंदे के अनुसार सीढ़ियां लगाने के अनुभवी कारीगर हैं जो हर साल यह काम करते हैं। एक हफ्ते में सीढ़ियां कस जाएंगी। इसके बाद अधिकारी अवलोकन भी करेंगे। इन सीढिय़ों से श्रद्धालु मंदिर में जाएंगे तथा दूसरी तरफ सीढिय़ों से वापस आएंगे। निर्गम वाली सीढ़ियां स्थायी है जबकि प्रवेश वाली सीढ़ियों को पर्व के बाद हटा लिया जाता है।

नागपंचमी पर्व

महाकाल मंदिर में लोहे की सीढ़ियां तैयार करते कारीगर।

2018 में लोहे के नए पिलर लगाकर किया था मजबूत

महाकाल मंदिर के पुरातत्व महत्व को देखते सुप्रीम कोर्ट ने नागचंद्रेश्वर मंदिर पर सीमित संख्या में श्रद्धालु भेजने और मंदिर पर किसी तरह का भार नहीं डालने के लिए कहा था। इसके चलते मंदिर समिति ने 2018 में नागपंचमी के पहले मंदिर के भोग द्वार के पास लोहे को दो नए पिलर लगा कर लोहे की सीढिय़ों का भार उन पर डाला था। सीढिय़ों की मजबूती की सुरक्षा जांच भी कराई थी। सीढिय़ों का भार मंदिर के स्ट्रक्चर की जगह अब लोहे के पिलर्स पर रहता है। लोहे की सीढ़ियां सिंहस्थ 2004 के पहले तत्कालीन संभागायुक्त सीपी अरोरा की देखरेख में लगाई गई थी। इसके पहले नागपंचमी पर मंदिर में जाने का रास्ता मंदिर के भीतर से पत्थर की सकरी सीढिय़ों से था। मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य पं. आशीष शर्मा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने नागचंद्रेश्वर मंदिर पर ज्यादा श्रद्धालु नहीं ले जाने का सुझाव भी दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की सुरक्षा के लिए किए जाने वाले उपायों की जानकारी भी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट के सुझाव को देखते 2018 में नागपंचमी पर 10-10 की संख्या में श्रद्धालुओं को मंदिर में भेजने की व्यवस्था की थी। नागपंचमी के पहले नागचंद्रेश्वर मंदिर की धुलाई और रंगाई-पुताई होगी। नागचंद्रेश्वर मंंदिर में साल में केवल नागपंचमी पर 24 घंटे के लिए मंदिर के पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।

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