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25 मार्च से शुरू होगा विक्रम संवत् 2077, अधिकमास होने से सर्वपितृ अमावस्या के एक महीने बाद शुरू होगी नवरात्रि
नव वर्ष विक्रम संवत 2077 की शुरुआत 25 मार्च गुड़ी पड़वा पर होगी। साल के पहले दिन का सूर्योदय 6.27 बजे होगा। शिप्रा तट रामघाट पर सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। शंख ध्वनि होगी। गुड़-नीम का वितरण होगा। गुड़ी पड़वा पर गुड़ी फहराई जाएगी। इस दिन बुधवार होने से ज्योतिषियों का मत है कि नया साल देश में सुख-समृद्धि और धन-धान्य से भरपूर रहेगा।
नए साल का नाम प्रमाथी है। पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार नए साल के पहले दिन वेद में दिए गए संवत्सर सुक्त का पाठ करना चाहिए। ध्वज और कलश पूजन करना चाहिए। पं. व्यास ने बताया नए साल की शुरुआत बुधवार से हो रही है, जो शुभता के प्रतीक हैं। बुध के राज में चंद्र मंत्री रहेंगे। बुध के राज में जल, धन, धान्य, समृद्धि आएगी। चंद्र
के मंत्री होने से बारिश और अन्न अच्छा होगा। लोगों की भौतिक सुख-सुविधा बढ़ेगी। चंद्र-बुध पिता-पुत्र ही हैं। दोनोें प्रमुख पद एक ही परिवार में हैं। सूर्य-शनि भी पिता-पुत्र हैं जो मंत्रिमंडल में हैं। इस साल में 21 जून को सूर्यग्रहण हैं जो सुबह 10.11 बजे शुरू होगा और दोपहर 1.41 बजे समाप्त होगा। 15 अगस्त को देश का 74 वां स्वतंत्रता दिवस होगा।
जन्माष्टमी का पर्व 11 व 12 अगस्त को मनाया जाएगा
साल-2020
गुड़ी पड़वा 25 मार्च
महावीर जयंती 6 अप्रैल
अक्षय तृतीया 26 अप्रैल
रथयात्रा 23 जून
देवशयनी एकादशी 1 जुलाई
नागपंचमी 25 जुलाई
राखी 3 अगस्त
जन्माष्टमी 11-12 अगस्त
गणेश चतुर्थी 22 अगस्त
श्राद्ध शुरू 1 सितंबर
सर्वपितृ अमावस्या 17 सितंबर
शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर
महाअष्टमी 24 अक्टूबर
दशहरा 25 अक्टूबर
दीपावली 14 नवंबर
देवउठनी एकादशी 26 अक्टूबर
दत्त जयंती 29 दिसंबर
साल-2021
मकर संक्रांति 14 जनवरी
मौनी अमावस्या 11 फरवरी
वसंत पंचमी 16 फरवरी
महाशिवरात्रि 11 मार्च
होली पूजन 28 मार्च
रंगपंचमी 2 अप्रैल
चैत्र अमावस्या 12 अप्रैल
अधिक मास में होगी सप्त सागर यात्रा, समापन 16 अक्टूबर को
इस साल अधिक मास है। अश्विन का अधिकमास 18 सितंबर से शुरू होगा। इसी दिन से सप्त सागर यात्रा होगी। श्रद्धालुजन सप्त सागरों की यात्रा करेंगे। इसका समापन 16 अक्टूबर को होगा। उज्जैन में अधिक मास का महत्व अधिक है। मालवांचल से कई यात्री सप्त सागर यात्रा करने आएंगे। पं. व्यास के अनुसार 19 साल बाद अश्विन का अधिक मास है। यात्री सप्त सागर के साथ नौ नारायण के भी दर्शन-पूजन करेंगे। इसके पहले विक्रम संवत 2058 में अश्विन का अधिकमास था। इसके बाद 2096 में अश्विन का अधिक मास आएगा।