कल से जेष्ठ यानी बड़े दिनों का महीना, हल्की बारिश के योग

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 09:45 AM IST

Ujjain News - हिंदू कैलेंडर का जेष्ठ महीना 19 मई से शुरू होकर 17 जून को समाप्त होगा। इस महीने में दिन बड़े होने के कारण इसे जेष्ठ...

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हिंदू कैलेंडर का जेष्ठ महीना 19 मई से शुरू होकर 17 जून को समाप्त होगा। इस महीने में दिन बड़े होने के कारण इसे जेष्ठ यानी बड़ा कहा जाता है। हालांकि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सबसे बड़ा दिन 21 जून को होगा जो असाढ़ में आएगा। जेष्ठ में हल्की बारिश के योग भी बनेंगे। मंगल गुरु का खड़ाष्टक योग महंगाई और आर्थिक मंदी की आशंका बना रहा है। हालाकि चतुर्दशी पर बुध का उदय होने से व्यापारिक मजबूती की संभावना बनेगी। 19 मई से 3 जून तक कृष्णपक्ष और 4 से 17 जून तक शुक्ल पक्ष रहेगा।

ज्योतिषियों के अनुसार जेष्ठ की शुरुआत अनुराधा नक्षत्र, परिग्रह योग तथा मालव करण की साक्षी में रविवार से होगी। वृश्चिक का चंद्रमा भी रहेगा। पं. अमर डिब्बावाला के अनुसार महीने में 5 रविवार और 5 सोमवार होने से यह महीना मिश्रित फलदायी है। सुख-शांति के साथ राजनीतिक उथल-पुथल, मौसमी रोग जैसे हालात भी पैदा हो सकते हैं। बुध का वृषभ राशि में प्रवेश व शुक्र का मेष राशि में भ्रमण होने से कलह, संघर्ष की स्थिति बन सकती है। एकादशी पर रेवती नक्षत्र होने व ग्रह गोचर की स्थिति खंड वर्षा करा सकती है। मंगल-गुरु का खड़ाष्टक योग चल रहा है जिससे आर्थिक मंदी और महंगाई के आसार हैं। लेकिन चतुर्दशी पर बुध का उदय होना लाभदायी है जिससे व्यापार में मजबूती आने की संभावना है। महीने में सोमवती अमावस्या व शनि जयंती 3 जून को रहेगी। सोमवती पर धर्म-कर्म कर सकते हैं और जिनकी राशि में शनि है, वे शनि का पूजन अर्चन अनुष्ठान करा कर अनुकूलता पा सकते हैं।

महेश नवमी और महाराणा प्रताप जयंती भी

मई - 22 संकष्टी चतुर्थी, 23- रोहिणी में बुध का प्रवेश, 24 सर्वार्थ सिद्धि योग, 26 काला अष्टमी, 25 सूर्य का रोहिणी में प्रवेश (रात 8.23 से), 28 सर्वार्थ सिद्धि योग (शाम 6.59 से दूसरे दिन सुबह 9.30), 30 अपरा एकादशी, सर्वार्थ सिद्धि योग, 31 प्रदोष, वक्री गुरु का जेष्ठ में प्रवेश,

जून - 1 बुध का मिथुन में प्रवेश, 2, बुध का पश्चिम में उदय, 3 सोमवती अमावस्या, शनि जयंती, 4 चंद्रदर्शन, 5 रंभा तृतीया, 6 महाराणा प्रताप जयंती, 7 मंगल का पुनर्वसु में प्रवेश, 8 अरण्य छट, सूर्य का मृगशिरा में प्रवेश के साथ रोहिणी समाप्त, 11 महेश नवमी, 12 गंगा दशहरा, 13 निर्जला एकादशी, 14 प्रदोष, 15 सूर्य का मिथुन में प्रवेश, 16 वट सावित्री व्रत, 17 कबीर जयंती।

पंचसार और सत्तू खाएं

जेष्ठ गर्मी के मौसम का पूर्वार्द्ध है। इसमें शरीर में बल, स्नेह और जलीयांश की कमी होती है। इसलिए कम, ठंडा और रस प्रधान भोजन व तरल पदार्थों का अधिक सेवन करना चाहिए। शहद, खजूर, मुनक्का, मिश्री से बना पंचसार और सत्तु लाभदायी है। अधिक नमकीन, मसालेदार भोजन नहीं करना चाहिए। सूर्य की तेज किरणों, अधिक व्यायाम और नशे से बचना चाहिए। डॉ. योगेश वाणे, एसोसिएट प्रोफेसर आयुर्वेदिक कॉलेज

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