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गेहूं में तेजी के चांस नहीं, सरकारी बिक्री रुकने से बढ़ेंगे भाव

Ujjain News - उज्जैन | गेहूं व्यापार में स्टॉक वाले मंदी नहीं मानते। लेकिन बढ़े भाव पर बिक्री नहीं होने से गेहूं व्यापार बगैर...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 05:11 AM IST
Ujjain News - no increase in wheat prices prices will rise by government sales
उज्जैन | गेहूं व्यापार में स्टॉक वाले मंदी नहीं मानते। लेकिन बढ़े भाव पर बिक्री नहीं होने से गेहूं व्यापार बगैर तेजी-मंदी के स्थिर हो गया। प्रतिवर्ष गेहूं नया आने के पूर्व भाव में अच्छी तेजी आ जाती है, लेकिन इस साल एफसीआई की ई बिक्री से लाखों क्विंटल गेहूं खुले बाजारों में फैल गया। ग्राहकी अभाव से बिक्री घटे भाव पर भी नहीं हो रही है। वैसे मिल क्वालिटी गेहूं के भाव 2040 से 2050 हैं, लेकिन 2020 से 2025 के सौदे भी आपसी होने की चर्चा रही। 2-3 व्यापारी अपना अच्छा-खराब गेहूं बेचकर फारिग होना चाहते हैं। सरकारी बिक्री के कारण तेजी के चांस नहीं बन रहे हैं। सरकारी छाप गेहूं की बिक्री अभी भी डिमांड वाली चल रही है। मंडी में इस प्रकार का गेहूं मीडियम, बेस्ट बन जाता है। स्टॉक वाले जो ऊंचे भाव का जमा कर चुके हैं इन्हें वर्तमान भाव में भी नुकसान लगना माना जा रहा है।

नई आवक के पहले डाॅलर चने का व्यापार बढ़ा, भाव में मंदी: डाॅलर चना नया आने के पहले पुराने का व्यापार सेंपल से बढ़ गया है। घटे भाव का व्यापार आसपास की मंडियों में हो रहा है। डाॅलर का व्यापार बड़े फायदे वाला है, लेकिन मंडी के केंटीन के समीप डाॅलर चने का व्यापार इसी खुली सड़क पर बिनाट का काम बखूबी किया जाता है। रुटिन में ग्रेडिंग करवाकर चना बेचने से 100 से 200 रुपए क्विंटल कमाई जरूर हो जाती है। 15000 से 10000 के स्टेंडर्ड भाव वाला डाॅलर 4000, टॉप 5000 रुपए के भाव से बिक जाता है। इस प्रकार के चने में विदेशी मांग रहती है लेकिन बंपर आवक में मांग बढ़ने की अपेक्षा घट गई है। नया सीजन आने से पहले गोदाम खाली करने की नौबत आना भी बताया जा रहा है।

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