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शिक्षा व स्वास्थ्य के मामले में केन्द्रीय सर्वेक्षण में पिछड़े आंकड़ों में सुधार लाने की अब हम सभी की जिम्मेदारी

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 04:10 AM IST

Vidisha News - कलेक्टर अनिल सुचारी गुरुवार को अचानक क्षेत्र के सुदूर गांवों में पहुंचे। चौपाल सभा में खुली चर्चा कर शासन की...

शिक्षा व स्वास्थ्य के मामले में केन्द्रीय सर्वेक्षण में पिछड़े आंकड़ों में सुधार लाने की अब हम सभी
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कलेक्टर अनिल सुचारी गुरुवार को अचानक क्षेत्र के सुदूर गांवों में पहुंचे। चौपाल सभा में खुली चर्चा कर शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी जनता से सीधे सवाल पूछ कर ली। उन्होंने चर्चा में जिले के शिक्षा व स्वास्थ्य के मामले में केन्द्रीय सर्वेक्षण में पिछड़ने की पीड़ा उजागर की। उनका कहना था कि आंकड़ों में सुधार लाने की अब हम सबकी बड़ी जिम्मेदारी है।

कलेक्टर ने गांव माडल, करमोदिया, बासौदा में चौपाल सभाओं को संबोधित किया। दुनातर मंदिर परिसर में हुए विकास कार्यों का अवलोकन किया। इस मौके पर डिप्टी कलेक्टर लोकेन्द्र कुमार सरल, एसडीएम संदीप अष्ठाना, सीईओ जनपद विजय कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार एसएन सोनी, बीआरसी रश्मिकांत श्रीवास्तव, सहित प्रशासनिक अमले ने जनता के बीच पहुंच कर सीधे आम लोगों से चर्चा कर उनकी समस्याओं को सुना। मौके पर ही मैदानी अमले को उनके निराकरण के निर्देश दिए। कलेक्टर ने गांव बासौदा में कहा कि केन्द्रीय सर्वेक्षण की रैंकिंग में जिले को शिक्षा और स्वास्थ्य में पिछड़े जिलों में शामिल किया गया है। बच्चे 5 वीं- 8 वीं में पहुंच जाते हैं लेकिन उन्हें गणित नहीं आती है। स्कूलों में पालक शिक्षक संघ बने हुए हैं। स्कूल ठीक से चल रहे हैं कि नहीं चल रहे हैं। शिक्षक पढ़ा रहे हैं कि नहीं पढ़ा रहे हैं। मध्यान्ह भोजन ठीक तरह से चल रहा है कि नहीं चल रहा है अब इस बात की चिंता सबको करना पड़ेगी। स्कूलों में 100 बच्चों के नाम लिखे रहते हैं, किंतु वहां 20 से 25 बच्चे ही पहुंचते हैं। हमारा विदिशा जिला शिक्षा और स्वास्थ्य में पीछे नहीं रहना चाहिए।

बहनों के नाम हटवाने, प्रक्रिया सरल करने की मांग उठी

कलेक्टर के सामने गांव बासौदा में अनेक ग्रामीण काश्तकारों ने अपने पिता के गुजर जाने पर हुए फोती नामांत्रण में बहनों व बुआओं के नाम शामिल हिस्से में अंकित होने से होने वाली बड़ी परेशानी उजागर की। इसके निराकरण के लिए बहनों के शपथ पत्र से उनका हिस्सा भाइयों के हक में नामांतरित किये जाने की मांग की गई। ग्रामीणों के पास फटे हुए राशन कार्ड होने, राशन कार्ड ही नहीं होने, उनके वोटर आईडी तक नहीं होने जैसी समस्याएं कलेक्टर को सुनने को मिलीं। गांव करमोदिया में ग्रामीणों ने खेतों पर जाने के रास्ते बंद होने, गांव की मध्यान्ह भोजन योजना में भोजन सही ढंग से वितरित नहीं करने, आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को पोषण आहार नहींं मिलने, पेंशन राशि मंजूर करवाने, ग्रामीणों के राशन कार्ड नही बनने, जैसी समस्याओं से अवगत कराया।

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