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सनातन धर्म की मूल है गो माता: पं.विनोद शास्त्री

समुद्र मंथन से प्रकट हुई कामधेनु के दूध से क्षीरसागर बना है। कामधेनु को ऋषि मंडल ने ग्रहण किया। ऋषि यज्ञ अनुष्ठान...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 05:00 AM IST

समुद्र मंथन से प्रकट हुई कामधेनु के दूध से क्षीरसागर बना है। कामधेनु को ऋषि मंडल ने ग्रहण किया। ऋषि यज्ञ अनुष्ठान करते हैं। गाय के दूध से घी बनता है। गोबर के बिना यज्ञ अनुष्ठान पूर्ण नहीं होते। गाय के दूध की खीर, यज्ञ के द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्म हुआ। उक्ताशय के उद्गार पं. विनोद कृष्ण शास्त्री महाराज ने व्यक्त किए।

शास्त्रीजी ने कहा कि गाय के दूध का व्रत देव माता अदिति ने किया तो भगवान वामन अवतार लिया। गाय का दूध पीकर, गाय की सेवा और रक्षा कर श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भागवत, गीता का गीत गाया।

गाय के गोबर से गोबर गणेश का जन्म हुआ। गाय के गोबर से गुरु गोरखनाथ का जन्म हुआ। गाय के दूध से श्रीजी नाथजी प्रकटे। गाय से मां वेदमाता गायत्री है।

उन्होंने कहा कि जब भूमि पर अत्याचार, पापाचार अधिक होता है तो धरती माता ही गाय बन जाती है। धरती माता ही गोमाता है। धरती से ही सीता माता का जन्म है। जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह संस्कार बिना गाय माता के संपन्न नहीं होते। गृह प्रवेश में गाय ही वास्तु दोष का निवारण करती है।

देवता गाय में वास करते हैं। गाय देवताओं में नहीं करती। गाय के गोबर में ही लक्ष्मी का वास है। गोमूत्र में गंगा का वास है। गो माता की महिमा अपार है। गो कथा के मुख्य यजमान आरपी गोयल है।

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