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स्वास्थ्य में हम देश के सबसे ज्यादा पिछड़े 5 जिलों में शामिल, शिक्षा मेंं भी हालत बदतर

नीति आयोग ने एक सूची जारी की है जिसमें विदिशा जिला स्वास्थ्य के मामले में देश के 101 सबसे पिछड़े जिलों की सूची में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 06:05 AM IST

नीति आयोग ने एक सूची जारी की है जिसमें विदिशा जिला स्वास्थ्य के मामले में देश के 101 सबसे पिछड़े जिलों की सूची में शामिल है। इस क्षेत्र में देश के सबसे बदतर 5 जिलों में विदिशा के शामिल होने के बाद अफसरों में हड़कंप है। नीति आयोग ने देश के 101 पिछड़े जिलों की सूची जारी की है जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों में पिछड़े जिलों के नाम शामिल किए हैं। इन्हें अलग-अलग रेंक दी गई है। इन 101 जिलों में विदिशा को 42वीं रेंक मिली है।

हेल्थ में ये हैं देश के सबसे पिछड़े 5 जिले : स्वास्थ्य के मामले में देश का सबसे पिछड़ा जिला 101 रेंक के साथ तेलंगाना का आसिफाबाद, 100 रेंक के साथ तेलंगाना का भूपालपल्ली, 99 रेंक के साथ राजस्थान का बांरा जिला, 98 रेंक के साथ मप्र का विदिशा जिला और 97 रेंक के साथ असम का डर्रांग जिला शामिल है।

अफसरों का दावा, पोर्टल पर जानकारी दर्ज नहीं की : जिला पंचायत सीईओ दीपक आर्य स्वास्थ्य में विदिशा सबसे बदतर जिलों में शामिल होने की वजह पोर्टल पर जानकारी दर्ज नहीं होना बताते हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य के 30 अंक थे। काम होने के बाद भी पोर्टल पर एंट्री नहीं हुई।

स्किल डेवलपमेंट में हालात ठीक, 20 अच्छे जिलों में मिली जगह

विदिशा ओवर आल रेंकिंग 42, रैंक को दर्शाता ग्राफ

06

14

आधारभूत ढांचा

कृषि

दो सबसे कमजोर सेक्टर : नीति आयोग की सूची में मप्र के 4 और जिले भी शामिल, इन जिलों को पिछड़ा न कहकर महत्वाकांक्षी कहा गया है

स्वास्थ्य व पोषण (98 रैंक )

जिले की 55.5 फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी है। जिले के 6 महीने से 5 साल के उम्र के बीच 69.8 फीसदी बच्चों में भी खून की कमी है। वहीं 12 से 23 महीने के 45.7 फीसदी बच्चों का ही पूर्ण टीकाकरण हो पा रहा है। इसके अलावा 73.7 फीसदी प्रसव ही संस्थागत हो रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब भी 26.3 फीसदी प्रसव घरों में हो रहे हैं। इसके अलावा 9 फीसदी परिवारों से स्वास्थ्यकर्मी परिवार नियोजन की चर्चा कर पा रहे हैं। जिले के 69.8 फीसदी बच्चों में खून की कमी है। 55.5 फीसदी गर्भवती महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं।

डॉक्टरों की कमी

जिले में डाॅक्टरों की काफी कमी है। 73 मेडिकल अाफीसर में से 54 पद भरे हैं और 19 पद रिक्त हैं। डॉ. बीएल आर्य, सीएमएचओ

28

67

फाइनेंशियल

98

शिक्षा

रेंक ने उजागर की जिले की हकीकत :नीति आयोग ने जो सूची जारी की है उसमें विकास के नजरिये से विदिशा को 42वीं रेंक दी है। स्वास्थ्य में हम सबसे ज्यादा पिछड़े हैं। इसका कारण सवालों के जवाब देने में लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता है।

स्वास्थ्य

अन्य जिलों की रेंकिंग

राजगढ़

छतरपुर

दमोह

19

15

विदिशा

26

42

इन सवालों के नहीं दिए जवाब

स्वास्थ्य विभाग ने 25 में से 15 सवालों के जवाब उपलब्ध नहीं कराए। ये ऐसे आसान सवाल थे जिनके जवाब आसानी से दिए जा सकते थे।

ये सवाल इस प्रकार हैं

विदिशा में कितने जिला अस्पताल हैं

खून की कमी वाले बच्चों की जानकारी

अति कुपोषितों की संख्या

कितनी फीसदी गर्भवती महिलाओं में खून की कमी

15 से 19 साल में मां बनने वाली महिलाओं की जानकारी

3 किमी के दायरे में उपस्वास्थ्य केंद्रों की संख्या

10 किमी के दायरे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या

24 घंटे सुविधाओं देने वाले स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या

इस तरह मिलेंगे नंबर

सबसे ज्यादा 30-30 फीसदी अंक शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए रखे गए हैं। यानि 60 फीसदी अंक इन दोनों क्षेत्रों में की जाने वाली तरक्की पर निर्भर हैं। इन दो सेक्टर में कुल 21 सूचकांक बनाए गए हैं, जिनके आधार पर तरक्की का मापन होगा। वहीं कृषि व सिंचाई के 20, बुनियादी ढांचे और वित्तीय समावेशन के 10-10 फीसदी अंक रहेंगे। इन पांच सेक्टर में कुल 49 सूचकांक बनाए गए हैं।

गुना

47

शिक्षा (67वीं रैंक)

विदिशा जिला शिक्षा के क्षेत्र में भी पीछे है। 101 जिलों में से हमें 67वीं रेंक मिली है। हमारी शिक्षा दर 70.53 फीसदी है। हमारे जिले के प्रायमरी स्कूलों में 5.40 फीसदी में बिजली उपलब्ध है और माध्यमिक में 9 फीसदी। जिले के 79 फीसदी स्कूलों में शौचालय की सुविधा है। शौचालय की 67.20 फीसदी प्रायमरी छात्राओं काे सुविधा है और माध्यमिक में 79.60 फीसदी छात्राओं को सुविधा उपलब्ध है। साल 2003 के बाद जिले में प्रायमरी स्कूलों में 6.90 फीसदी का इजाफा हुआ जबकि माध्यमिक में 48.60 का इजाफा हुआ है। महिला शिक्षक 33 फीसदी हैं।

स्कूल में शिक्षकों की कमी है

जिले में अंग्रेजी, गणित और विज्ञान के शिक्षकों की कमी है। इसके अलावा प्रायमरी स्कूल नहीं खुले हैं। इससे हमारा जिला शिक्षा में कमजाेर साबित हुआ। हम इसमें सुधार का प्रयास करेंगे। - एचएन नेमा, डीईओ

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