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बुरे कर्मों का पाप जरुर भोगेगा इंसान : पं.अंकित

हमें हमेशा भगवान की भक्ति करना चाहिए। कई बार समाज में हमें उपेक्षा का शिकार भी होना पड़ता है लेकिन इससे घबराना...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 05:40 AM IST

हमें हमेशा भगवान की भक्ति करना चाहिए। कई बार समाज में हमें उपेक्षा का शिकार भी होना पड़ता है लेकिन इससे घबराना नहीं चाहिए। सब की चिंता छोड़ प्रभु की भक्ति में रमे रहना चाहिए। हमेशा परोपकार की भावना मन में रखना चाहिए। अटारीखेजड़ा में चल रही सात दिवसीय संगीतमय कथा के दूसरे दिन कथावाचक गौ वत्स पं.अंकित कृष्ण महाराज (बटुकजी) ने श्रद्धालुओं को सं‍बोधित करते हुए यह बात कही।

महाराज श्री ने श्रीमद् भागवत कथा का सार बताते हुए कहा कि भागवत का वाचन करना और सुनना अति लाभ दायक है। ये किस्मत वालों के लिए ही नसीब होता है। भागवत कथा सुनने से हमारे जीवन में अवरोध मिटते है। भागवत का आश्रय करने वाला कोई भी दुखी नहीं होता है। भगवान शिव ने सुखदेव बनकर सारे संसार को भागवत सुनाई है। जिससे बड़े बड़े पापियों के कष्ट का निदान हो गया।

महाराज बटुकजी ने श्रोताओं को कर्मों का सार बताते हुए कहा कि अच्छे और बुरे कर्मो का फल भुगतना ही पड़ता है। इससे हम बच नहीं सकते हैं। उन्होंने भीष्म पितामह का उदाहरण देते हुए कहा कि भीष्म पितामह 6 महीने तक बाणों की शैय्या पर लेटे थे। तब स्वयं श्री कृष्ण ने आकर उन्हें बोध कराया था कि आपने अपने पुराने जन्म में जब आप राजकुमार थे और घोड़े पर सवार होकर कहीं जा रहे थे। उसी दौरान आपने एक नाग को जमीन से उठाकर फेंक दिया तो कांटों पर लेट गया था पर 6 माह तक उसके प्राण नहीं निकले थे। उसी कर्म का फल है जो आप 6 महीने तक बाणों की शैय्या पर लेटे हैं। इसका मतलब है कि कर्म का फल सभी को भुगतना होता है। उन्होंने कहा कि जब भीष्म पितामह स्वयं इससे नहीं बच सके तो हम और आप तो बहुत दूर की बात है। इसलिए कर्म करने से पहले कई बार सोचना चाहिए। भागवत भगवान का अति प्रिय है जिसके सुनने से हमारे पापों का नाश होता है। कथा आयोजन समिति ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि वह अधिक से अधिक संख्या में कथा स्थल पर आए। कथा 6 मई तक प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक संकट मोचन हनुमान मंदिर अटारीखेजड़ा में चल रही है।

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