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जब भी मुसीबतों से मेरा सामना हुआ अपना- पराया कौन है ये तजुर्बा हुआ: नफीस परवेज

स्थानीय जय काम्पलेक्स बजरिया में बज्मे अदब उर्दू की जानिब से ईद की खुशी में एक कामयाब कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 13, 2018, 05:55 AM IST

स्थानीय जय काम्पलेक्स बजरिया में बज्मे अदब उर्दू की जानिब से ईद की खुशी में एक कामयाब कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। इसमें हज यात्रा पर जा रहे चांद खां, चांद साहब का ऐजाज किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय कवि ,शायरों के अलावा बाहर से आए शोहरा इकराम ने अपनी गजलों एवं कविताओं से देर रात तक समा बांधे रखा। दिल को छू लेने वाली गजलों पर रह- रहकर हाल श्रोताओं की तालियों से गूंजता रहा। एक के बाद एक सभी कवियों एवं शायरों ने अपनी खूबसूरत रचनाओं से लोगों का दिल जीत लिया। इसमें उज्जैन से आये मशहूर शायर सिराज अहमद सिराज ने गजल कोई मुजरिम न बच पाये, न हो मजलूम को फांसी, हुकूमत हो तो ऐसी हो, अदालत हो तो ऐसी हो, सुनाकर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया एवं मौजूदा हालात पर करारी चोट की। भोपाल से आये नफीस परवेज ने जब भी मुसीबतों से मेरा सामना हुआ, अपना पराया कौन है, यह तजुर्बा हुआ। सुनाकर खूब दाद बटोरी। हाजी निसार, अहमद मालती, आनंद श्रीवास्तव असहाय, संतोष शर्मा सागर, शाहिद अली शाहिद, उदय ढोली, दिनेश श्रीवास्तव, संजय चतुर्वेदी, कृष्णकांत मूदड़ा, जगन्नाथ सिंह दांगी, एनके सैयद, रईस शेख, सौ भरन सिंह, धीरज सुचान, हरगोविंद मेथिल, वसीम राही, हबीबनादा ने भी कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।

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