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विज्ञान का मुख्य उद्देश्य समाधान निकालना है

एसएटीआई में विज्ञान भारती विदिशा इकाई की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें विज्ञान भारती की कार्यप्रणाली एवं...

Danik Bhaskar | Jul 06, 2018, 05:55 AM IST
एसएटीआई में विज्ञान भारती विदिशा इकाई की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें विज्ञान भारती की कार्यप्रणाली एवं उद्देश्य को विज्ञान भारती के सदस्यों के साथ साझा किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विज्ञान का मुख्य उद्देश्य समाज की जरूरतों को समझ कर उनका समाधान निकालना है। कार्यक्रम में विज्ञान भारती के वाइस प्रेसीडेंट डा.एसएस भदौरिया, आरजीपीवी भोपाल के ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट आफिसर डा. अनिल कोठारी विशेष रूप से मौजूद थे। सर्वप्रथम संस्था के संचालक डा. जेएस चौहान ने पुष्प गुच्छ भेंट कर श्री भदौरिया एवं श्री अनिल कोठारी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि विज्ञान भारती का उद्गम स्वदेशी साइंस मूवमेंट के तहत इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस बैंगलोर के कुछ वैज्ञानिक द्वारा प्रोफेसर केआई वासु के मार्गदर्शन में किया गया है।

उन्होंने बताया कि विज्ञान का मुख्य उद्देश्य समाज की जरूरतों को समझ कर उनका समाधान निकालना है जिससे एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके। श्री भदौरिया ने कहा कि कि विज्ञान भारती का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी साइंस को बढ़ावा देना, पारंपरिक और आधुनिक विज्ञान में परस्पर सामंजस्य बढ़ाना एवं आधुनिक विज्ञान को राष्ट्रीय जरुरतों के अनुरूप एक स्वदेशी आंदोलन का स्वरूप देना है। उन्होंने बताया कि विज्ञान भारती देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थान एवं देश की प्रमुख रिसर्च लैब के साथ मिलकर विज्ञान के क्षेत्र में काम कर रही है। विज्ञान भारती आयुर्वेद, सिद्धा, मेडिटेशन, आर्गेनिक कृषि, वास्तु विद्या, फारेस्ट्री, एस्ट्रोनॉमी, एन्वायरनमेंट, इंजीनियरिंग जैसी स्वदेशी साइंस एवं टेक्नालॉजी का प्रचार-प्रसार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। विज्ञान भारती उन तकनीकों को बढ़ावा दे रही है जो देश के लिए उपयुक्त है व जिसमें कम ऊर्जा, कम खर्चा हो और अधिकतम रोजगार उत्पन्न हो। इसी श्रृंखला में विज्ञान भारती हर वर्ष भारतीय विज्ञान सम्मेलन आयोजित करता है जिसका उद्देश्य विभिन्न भाषा, विभिन्न समुदाय एवं विभिन्न प्रांत के युवा वैज्ञानिकों को अपने विचार साझा करने का मंच प्रदान करना है।

कार्यक्रम

भास्कर संवाददाता | विदिशा

एसएटीआई में विज्ञान भारती विदिशा इकाई की बैठक का आयोजन किया गया। इसमें विज्ञान भारती की कार्यप्रणाली एवं उद्देश्य को विज्ञान भारती के सदस्यों के साथ साझा किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि विज्ञान का मुख्य उद्देश्य समाज की जरूरतों को समझ कर उनका समाधान निकालना है। कार्यक्रम में विज्ञान भारती के वाइस प्रेसीडेंट डा.एसएस भदौरिया, आरजीपीवी भोपाल के ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट आफिसर डा. अनिल कोठारी विशेष रूप से मौजूद थे। सर्वप्रथम संस्था के संचालक डा. जेएस चौहान ने पुष्प गुच्छ भेंट कर श्री भदौरिया एवं श्री अनिल कोठारी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि विज्ञान भारती का उद्गम स्वदेशी साइंस मूवमेंट के तहत इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस बैंगलोर के कुछ वैज्ञानिक द्वारा प्रोफेसर केआई वासु के मार्गदर्शन में किया गया है।

उन्होंने बताया कि विज्ञान का मुख्य उद्देश्य समाज की जरूरतों को समझ कर उनका समाधान निकालना है जिससे एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके। श्री भदौरिया ने कहा कि कि विज्ञान भारती का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी साइंस को बढ़ावा देना, पारंपरिक और आधुनिक विज्ञान में परस्पर सामंजस्य बढ़ाना एवं आधुनिक विज्ञान को राष्ट्रीय जरुरतों के अनुरूप एक स्वदेशी आंदोलन का स्वरूप देना है। उन्होंने बताया कि विज्ञान भारती देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थान एवं देश की प्रमुख रिसर्च लैब के साथ मिलकर विज्ञान के क्षेत्र में काम कर रही है। विज्ञान भारती आयुर्वेद, सिद्धा, मेडिटेशन, आर्गेनिक कृषि, वास्तु विद्या, फारेस्ट्री, एस्ट्रोनॉमी, एन्वायरनमेंट, इंजीनियरिंग जैसी स्वदेशी साइंस एवं टेक्नालॉजी का प्रचार-प्रसार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। विज्ञान भारती उन तकनीकों को बढ़ावा दे रही है जो देश के लिए उपयुक्त है व जिसमें कम ऊर्जा, कम खर्चा हो और अधिकतम रोजगार उत्पन्न हो। इसी श्रृंखला में विज्ञान भारती हर वर्ष भारतीय विज्ञान सम्मेलन आयोजित करता है जिसका उद्देश्य विभिन्न भाषा, विभिन्न समुदाय एवं विभिन्न प्रांत के युवा वैज्ञानिकों को अपने विचार साझा करने का मंच प्रदान करना है।

एसएटीआई में विज्ञान भारती विदिशा इकाई की बैठक का आयोजन, वक्ताओं ने कहा-