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प्रेरणा मंच की काव्य गोष्ठी में कवियों ने सुनाई अपनी रचनाएं

प्रेरणा मंच की काव्य गोष्ठी में कवियों ने सुनाई अपनी रचनाएं विदिशा| प्रेरणा मंच की पावस संगोष्ठी का आयोजन किया...

Danik Bhaskar | Jul 11, 2018, 06:30 AM IST
प्रेरणा मंच की काव्य गोष्ठी में कवियों ने सुनाई अपनी रचनाएं

विदिशा| प्रेरणा मंच की पावस संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें प्रेरणा मंच के वीरेन्द्र शर्मा, सुमन मंडोरिया और रेखा वर्मा का स्वागत किया गया। रेखा वर्मा ने इस संगोष्ठी का आयोजन मंच के सदस्य के रूप में किया।

प्रेरणा मंच की जल्द प्रकाशित होने वाली पत्रिका के संदर्भ में गहन विचार-विमर्श करते हुए सभी ने सहयोग की इच्छा व्यक्त की। संगोष्ठी का शुभारंभ अविनाश तिवारी की यथार्थ मूलक कविता “पत्थर के कलेजे में एक दरिया छुपा है” से हुआ। सृजनधर्मी श्री तिवारी की गंभीर और सामयिक रचना सौगात सभी द्वारा सराही गई। नारी टूट कर भी नहीं टूटती, दृढ़ता से खड़ी ही रहती है। इस सत्य को कुसुम तोमर ने अपनी रचना मैं कसी गई के माध्यम से अभिव्यक्त किया। डॉ. रीता शर्मा ने अपने ही गमों में डूबे रहने की स्थिति को नकारने की बात कही।

वर्तमान संदर्भों में परिस्थितियां भले ही बदल गई हों परन्तु यातना के शिविर नारी के लिये आज भी वैसे ही हैं। वर्तमान द्रोपदी कविता के द्वारा डॉ. राज सक्सेना ने इस सत्य को साकार किया। ज्योति जाधव ने शब्दों की सार्थकता को तलाशती कविता, शब्दों की चिंगारी सुनाकर प्रशंसा बटोरी। डॉ. रेखा श्रीवास्तव ने अपने जीवन के यथार्थ को मैं डाक्टर बन गई, संस्मरण के माध्यम से अभिव्यक्त किया। वीरेन्द्र शर्मा ने हरिऔध जी की कविता से मिली प्रेरणा से अवगत कराया।

डॉ. कमल चतुर्वेदी ने अपनी नई रचना जीवन में सब गद्य गीत कहां से लाऊं सुनाकर श्रोताओं को दूसरे ही भावलोक में पहुंचा दिया। उनकी कविता माँ सुनकर परिवेश भावुक हो उठा। राज सक्सेना ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए आगामी संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ. रीता शर्मा ने किया।