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पद का त्याग करना ही बड़ा कठिन होता है: प्रशांत सागर

विदिशा| सागर रोड से शहर में तीन मुनिश्री ने मंगल प्रवेश किया। मंगलवार सुबह जैन समाज के लोग मुनिश्री के प्रवेश पर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 04, 2018, 07:05 AM IST

विदिशा| सागर रोड से शहर में तीन मुनिश्री ने मंगल प्रवेश किया। मंगलवार सुबह जैन समाज के लोग मुनिश्री के प्रवेश पर काफी संख्या में पहुंचे। सुबह जैन मुनिश्री प्रशांत सागर, निर्वेग सागर, मुनिश्री विषद सागर और छुल्लक देवानंद सागर ने नगर में प्रवेश किया। उनके स्वागत में जैन समाज के लोगों ने परंपरागत तरीके से स्वागत और सत्कार किया। मुनिश्री ने मिर्जापुर के रास्ते से शहर में प्रवेश किया।

सिविल लाइंस रोड स्थित वृद्ध आश्रम भी मुनिश्री पहुंचे। आखिर में संघ शीतलधाम पहुंचा। उनके आगमन पर शहर के लोग दर्शन करने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। मुनि संघ को देखते हुए समाज के लोग आशीर्वाद के लिए उमड़ पड़े।

शीतलधाम हरिपुरा में प्रवचन देते हुए मुनि प्रशांत सागर महाराज ने कहा कि पद का त्याग करना ही बड़ा कठिन होता है लेकिन आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज ने पद को कर्ज के रुप में स्वीकार किया था। वह पद उन्होंने आचार्य विद्यासागर महाराज को यह कहकर प्रदान किया कि मेरी गुरुदक्षिणा में यह पद तुमको स्वीकार करना ही होगा। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री के दीक्षा के 50 वर्ष पूर्ण हो गए। हिन्दी मिती से यह तिथि अाषाढ़ सुदी पंचमी 17 जुलाई को पूर्ण होने जा रही है। जैसे आप लोगों ने इसकी शुरुआत की उसी प्रकार इसका भव्यता के साथ समापन भी करें।

इस अवसर पर आर्यिकार| उपशांतमति माता ने भी संबोधन दिया। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि मुनिश्री संघ का विहार चल रहा है। उनके साथ मुनिश्री निर्वेग सागर, मुनिश्री विषद सागर, क्षुल्लकश्री देवानंद सागर जी हैं। शीतलधाम में उनके प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.30 बजे से होंगे।

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