सुबह 9.30 के बाद आधी सड़क पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतार, अाधी बची से निकलने की होड़ लगी

Vidisha News - भास्कर संवाददाता| गंजबासौदा डेढ़ लाइन के बरेठ रोड पर तीन लाइन का ट्रैफिक चल रहा है। इस कारण आम नागरिकों को बेहद...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:16 AM IST
Ganjbasoda News - mp news after 930 in the morning there was a long queue of tractor trolleys half surviving rider on the road
भास्कर संवाददाता| गंजबासौदा

डेढ़ लाइन के बरेठ रोड पर तीन लाइन का ट्रैफिक चल रहा है। इस कारण आम नागरिकों को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कंजना पठार पर नई कृषि मंडी में नीलामी शुरू होने के बाद रोज 22 हजार बोरों की आवक हो रही है। सुबह 9.30 बजे के बाद आधी सड़क पर ट्रैक्टर-ट्रालियों की लंबी कतार शुरू हो जाती है। आधी सड़क पर आम लोगों के वाहन चलते हैं। दो लाइन के ट्रैफिक को आने जाने के लिए आधी सड़क ही उपलब्ध हो रही है। इससे पल पल में कदम कदम पर जाम के हालात बन रहे हैं। जाम लगते ही 10 से 15 मिनट फंस कर धूप में खड़े रहते हैं। इससे सड़क पर ऑटो, बाइक, चार पहिया वाहन की भिड़ंत आम होती जा रही है। पटरियों पर दुकानदारों को सामान पड़ा हुआ है। इससे वाहनों की पार्किंग पटरियों पर होने से ट्रैफिक के हालात दिन व दिन बिगड़ रहे हैं।

पटरियों पर दुकानदारों को सामान, वाहनों की पार्किंग पटरियों पर होने से लगता है जाम

बरेठ रोड पर हैं सरकारी कार्यालय व बड़े स्कूल

बरेठ रोड पर अधिकांश सरकारी कार्यालय बड़े स्कूल और अधिकारियों के बंगले हैं। अप्रैल में स्कूलों के अवकाश नहीं है पढ़ाई चल रही है। इस कारण सड़क पर पहले से ही सामान्य ट्रैफिक का दबाव बना रहता है लेकिन नई मंडी में नीलामी शुरू हो जाने के कारण ट्रालियों का दबाव और बढ़ गया है। इससे डेढ़ लाइन के इस मार्ग पर तीन लाइन का ट्रैफिक दबाव चल रहा है। इसके चलते अब पल-पल में जाम के हालात बन रहे हैं।

रेखा का नहीं है कोई असर

ट्रैफिक की हालत देखकर प्रशासन के निर्देश पर नपा द्वारा कई बार बरेठ रोड पर चूने से रेखा बनाई जा चुकी है लेकिन उस रेखा का असर नहीं हो रहा है। बरेठ रोड पर पटरी पहले से गायब है। व्यापारी पटरी का उपयोग व्यापारिक सामान रखने के लिए कर रहे हैं। इससे पैदल चलने वाले भी सड़क पर जोखिम के बीच चलने मजबूर हैं। इधर पटरी पर अतिक्रमण के कारण वाहन पार्किग हासिए पर आता जा रहा है।

सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों का खतरा

सबसे ज्यादा स्कूली बच्चों को खतरा बना रहता है। उनको भीड़ या जाम के बीच से निकलना पड़ता है। इससे हादसे की आशंका बनी रहती है। नीलामी के बाद ट्रैक्टर चालक तो लाइन में ही चलते हैं लेकिन कई किसान तोल के लिए पुराने प्रांगण पहुंचने के लिए लाइन तोड़कर भागने की कोशिश में लगे रहते हैं। इससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। दो साल पहले घर से साइकिल पर स्कूल जा रही एक छात्रा को एक वाहन का धक्का लगने से वाहन गिर गई थी। इससे वह रोड रोलर की चपेट में आ गई थी। इससे पहले भी चार स्कूली बच्चों की वाहनों की चपेट में आने के कारण मौत हो चुकी है। इसके बाद भी इन सड़क हादसों से सबक नहीं लिया गया।

सबसे ज्यादा हालत भावसार पुलिया पर खराब

ट्रैफिक की सबसे ज्यादा हालत भावसार पुलिया पर खराब है। मुख्य तिराहा होने के कारण सबसे ज्यादा क्रॉसिंग इसी स्थान पर रहती है। इससे वहां एक बार जाम लग जाए तो 10 से 15 मिनट रास्ता खुलने में लग जाते हैं। पुलिया भी बेहद सकरी है। इससे डर लगता है की थोड़ी सी चूक में वाहन रेलिंग तोड़कर नाले में गिर जाता है। अक्सर ऐसे हादसे आए दिन सामने आते हैं।

बुलाई जाएगी बैठक


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