8 जुलाई को शुरू हुई बेतवा की धार, बोवनी के लिए पानी खींचने से टूटी

Vidisha News - बेतवा के हालात: किसान बोवनी के लिए खींच रहे पानी पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं होने का असर अब दिखने लगा है। बेतवा...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 09:45 AM IST
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बेतवा के हालात: किसान बोवनी के लिए खींच रहे पानी

पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं होने का असर अब दिखने लगा है। बेतवा की धार 8 जुलाई को शुरू हुई थी। सितंबर 2018 के बाद करीब 9 महीने बाद धार चालू हुई थी जो अब टूट गई है। पानी नहीं गिरने की वजह से किसान नदी का पानी खेतों में पंप के माध्यम से ले जा रहे हैं। इस वजह से अब धार टूट गई है।

बोवनी के लिए 40 सेमी बारिश की जरूरत थी, लेकिन 21 सेमी ही हुई, 6 दिन से बारिश भी रुकी, जल स्तर कम होने से ट्यूबवेल भी सूखे, अब 25 हजार हेक्टेयर में लगे धान के पौधांे पर संकट

थमी बारिश तो सूखने लगे धान के पौधे

भास्कर संवाददाता|विदिशा

पिछले एक हफ्ते से बारिश नहीं होने से धान की फसल पर संकट खड़ा हो गया है। धान के खेत सूख रहे हैं। यदि यही हालात कुछ दिन और रहे तो धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। कई जगह फसल को नुकसान भी होने लगा है। कम बारिश होने की वजह से हालात ये हैं कि ट्यूबवेल भी पानी कम दे रहे हैं। इसके चलते धान के खेत बगैर पानी के हैं और जगह-जगह दरारें पड़ने लगी हैं।

जिले में में धान की फसल करीब 25 हजार हेक्टेयर में है। इस साल अब तक 21 सेमी बारिश दर्ज की है। बारिश नहीं होने से किसान की चिंताएं बढ़ गई हैं। किसानों के मुताबिक 8 से 10 हजार रुपए प्रति एकड़ खर्च धान लगाने में होता है। धान के अलावा किसानों ने सोयाबीन, मक्का, उड़द आदि भी लगाई है। हालांकि सोयाबीन और उड़द की तुलना में धान का रकबा कम है। अब तक जिले में औसत 40 सेमी बारिश होनी थी, लेकिन अब तक 21 सेमी हुई है। जहां सोयाबीन की बोवनी पहले हो गई थी वहां अब आवारा मवेशी नुकसान पहुंचा रहे हैं। नटेरन क्षेत्र के सेऊ, पमारिया, रिनिया, सिरसी, मूड़रा, नगतरा आदि गांव में मवेशी खेतों में घुसकर फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

चिंता कम नहीं.... मौसम विभाग के अनुसार 16 तक बारिश की संभावना नहीं

किसान बोले- बर्बादी की कगार पर धान

खेरुआ हाट के किसान नरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि धान की रोप लगा दी है, लेकिन खेतों में पानी नहीं है। बारिश में ट्यूबवेल चला रहे हैं। हाल ये है कि अब ट्यूबवेल में पानी नहीं आ रहा है। । इसके चलते धान के खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। जहां धान के खेत अभी पानी से लबालब होना चाहिए वहां पानी नहीं है।

खेतों में पानी भरने के लिए किसान परेशान

ढोलखेड़ी के आसपास काफी जगह धान की लगाई गई है। नगरपालिका अध्यक्ष मुकेश टंडन का कहना है पिछले कई साल से धान की बोवनी कर रहे हैं। इस साल पानी कम गिरने से नुकसान की आशंका है। किसान खेतों में पानी भरने के लिए परेशान हो रहे हैं। यदि एक सप्ताह बारिश नहीं हुई तो धान की फसल को बहुत नुकसान होगा।

बारिश नहीं होने से खेतों में पड़ीं दरारें, सूख रहे पौधे।

दिन का पारा 34.5 डिग्री तो रात का 26 डिग्री पर रहा

इस बार विदिशा जिले में 1 जून से अब तक 21 सेमी बारिश दर्ज हुई है। सीहोर कृषि कॉलेज के मौसम वैज्ञानिक एसएस तोमर ने बताया कि मंगलवार 16 जून तक बारिश की कोई संभावना नहीं है। शनिवार को दिन का पारा 34.5 डिग्री और रात का पारा 26 डिग्री दर्ज किया गया है। जबकि एक सप्ताह पहले बारिश होने से दिन का पारा 26 डिग्री तक आ गया था।

बोवनी भी पिछड़ी

देरी की वजह से खरीफ की बोवनी भी काफी पिछड़ी है। जिले में 5 लाख 20 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की बोवनी होती है लेकिन इस बार अब तक 75 फीसदी हिस्से में हुई है। जिले में सोयाबीन ही करीब 3 लाख 30 हजार हे. क्षेत्र में बोया जाता है। जिले में सोयाबीन के बाद सबसे ज्यादा उड़द की बोवनी होती है। करीब 1 लाख 40 हे. क्षेत्र में उड़द की बोवनी होना है। वहीं 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान लगाई गई है। धान के लिए अब तक औसत 40 सेमी बारिश होनी थी लेकिन अब तक 21 सेमी हुई है। यदि बारिश ज्यादा होती तो धान के लिए बहुत अनुकूल होता।

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