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चलो करीला धाम... दीपनाखेड़ा रोड पर सनोटी, जगथर सहित बामोरी शाला और फरीदपुर के पास बनाए गए वैकल्पिक मार्ग
विदिशा की सीमा से लगे अशोकनगर के करीला गांव में शनिवार को रंगपंचमी पर तीन दिवसीय मेला लगेगा। मार्ग पर जाम की स्थिति न बने इसके लिए प्रशासन द्वारा तीन बायपास बनाए गए हैं।
सिरोंज से आने वाले श्रद्धालु दीपनाखेड़ा रोड से सनोटी और जगथर गांव से होते हुए करीला पहुंच सकेंगे। मेहलुआ चौराहा और बंगला चौराहे से आने वालों के लिए बामौरीशाला के पास फरीदपुर और गांव के दूसरी और स्थित खेतों से होते हुए बायपास का निर्माण किया गया है। समय के बदलाव के साथ पहले राई नृत्य में पारंपरिक ढोल, मंजीरे और ताशे पर होता था, लेकिन अब उनकी जगह डीजे ले रहे हैं। लगभग 100 डीजे मेला परिसर में पहुंचने की उम्मीद है।
ललितपुर के राजपूत समाज के लोग चढ़ाएंगे पहला झंडा
रंगपंचमी पर मां जानकी के दरबार में पहला झंडा सिरोंज के ही ललितपुर गांव के राजपूत समाज के लोग चढ़ाते हैं। गांव के बुजुर्ग रामसिंह राजपूत और कल्याणसिंह राजपूत ने बताया कि पहाड़ी पर स्थित मां जानकी के दरबार में आमतौर पर सन्नाटा ही पसरा रहता था। हमारा गांव के लोग ही सेवा कार्य करते थे। इस वजह से ललितपुर के रहवासियों को ही पहला झंडा चढ़ाने का सौभाग्य मिलता है। शनिवार को सुबह 6 बजे गांव के लोग सामूहिक रूप से करीला पहुंचकर झंडा चढ़ाएंगे।
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जारी की एडवायजरी
करीला मेले में लाखों की संख्या में लोगों के पहुंचने के मद्देनजर कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए एडवायजरी जारी की गई है। इसके अलावा मुख्य मार्गों पर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। अशोकनगर जिला प्रशासन द्वारा भी मेला स्थल पर इस संबंध में व्यवस्थाएं की गई हैं।
डॉ. केएस अहिरवार, सीएमएचओ विदिशा
शुक्रवार रात ऐसा सजा जानकी मंदिर
पहले नगाड़ों और ढोलक की थाप पर होता था राई नृत्य, अब डीजे बजने लगे, रंगपंचमी के लिए 100 से ज्यादा डीजे आने की उम्मीद
समय के साथ आया बदलाव
20 साल पहले ऐसा दिखता था मंदिर
मान्यता: सीताजी ने गुजारा था इस जगह पर समय लव-कुश का हुआ था जन्म
मान्यता है कि भगवान राम ने जब सीता का परित्याग कर दिया था, तब माता सीता करीला में ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में आकर रही थीं। कहा जाता है कि इस आश्रम में माता सीता ने लव-कुश को जन्म दिया था। लव-कुश के जन्म पर करीला में खुशियां मनाई गईं और अप्सराओं का नृत्य हुआ था। जिस दिन खुशियां मनाई गई वह रंगपंचमी का दिन था। राई नृत्य का यह सिलसिला तभी से चला आ रहा है।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, उप्र, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा से पहुंचते हैं लोग
रंगपंचमी पर बेड़िया जाति की नृत्यांगनाएं थिरकती नजर आएंगी। इस मेले में मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा और अन्य प्रदेशों से श्रद्धालु पहुंचेंगे। मेला स्थल पर पानी के 30 टैंकर पहुंचाने के साथ ही सभी मार्गो पर पड़ने वाले गांवों में भी पानी के टैंकर रखवाए हैं। एसडीएम अनिल सोनी ने बताया कि बामौरीशाला के अलावा पथरिया और दीपनाखेड़ा थाने में भी कंट्रोल रूम बनाया है।