आवासीय मकानों में किराएदार रखने पर कमर्शियल टैक्स लगेगा, दुकानों का किराया भी चार गुना बढ़ेगा

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 09:40 AM IST

Vidisha News - नगरपालिका के सभागार में गुरुवार को नपाध्यक्ष मुकेश टंडन, सीएमओ सुधीर कुमार सिंह ने राजस्व अधिकारियों की बैठक में...

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नगरपालिका के सभागार में गुरुवार को नपाध्यक्ष मुकेश टंडन, सीएमओ सुधीर कुमार सिंह ने राजस्व अधिकारियों की बैठक में नगरपालिका की आय बढ़ाने पर जोर दिया। इसके लिए आवासीय मकानों में किराएदार रखने पर कमर्शियल टैक्स लगाने और नगरपालिका की दुकानों का किराया चार गुना ज्यादा बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

इसके अलावा करीब 4 साल पहले कराए गए जीआईएस सर्वे को त्रुटिपूर्ण बताते हुए दोबारा जीआईएस सर्वे करवाने का निर्णय लिया गया। इस नए सर्वे में अब शहर के सभी मकानों को टैक्स के दायरे में लाया जाएगा। पहले शहर में मकानों की संख्या करीब 32000 थी लेकिन जीआईएस सर्वे के बाद मकानों की संख्या 4000 बढ़कर करीब 36000 हो जाएगी। इससे अलावा नपा के वित्तीय वर्ष 2018-19 में आय-व्यय का लेखाजोखा भी पेश किया गया। इसमें राजस्व अधिकारी अनिल बिदुआ ने बताया कि 1 करोड़ 52 लाख की राजस्व वसूली का टारगेट रखा गया था। इसके विरुद्ध नपा के राजस्व अमले ने 1 करोड़ 36 लाख रुपए का टैक्स शहर के लोगों से वसूल किया है। यह टैक्स कुल टारगेट का करीब 81 फीसदी है। अब आने वाले वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए शत प्रतिशत टैक्स वसूली का टारगेट तय किया गया है।

फिर से जीआईएस सर्वे होगा, टैक्स के दायरे में मकानों की संख्या 32000 से 36000 हो जाएगी

नपा ने आवासीय मकानों में किराएदारों की मंगाई

है जानकारी

नगरपालिका ने सर्वे के माध्यम से पूरे शहर में आवासीय मकानों में किराएदार रखने वाले लोगों की जानकारी का डाटा एकत्र कर लिया है। अब ऐसे आवासीय मकान जिनमें किराएदार रह रहे हैं, उनमें अब कमर्शियल टैक्स लगाया जाएगा। इसके अलावा कमर्शियल कांप्लेक्स, मैरिज गार्डन, होटल्स, फैक्ट्री आदि अन्य व्यवसायिक संस्थानों में टैक्सेशन किया जाएगा। शासन ने भी नगरीय निकायों को राजस्व वसूली बढ़ाने पर जोर देने को कहा है ताकि वह आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर हो सकें और राज्य सरकार के आश्रित ना रहें।

पुरानी दुकानों को भी टैक्स के दायरेे में लाया जाएगा

अब दुकानों का किराया भी चार गुना तक अधिक बढ़ाने का निर्णय लिया है। उदाहरण के लिए यदि अभी कोई दुकानदार नपा की दुकान का किराया 1 हजार रुपए प्रति माह अदा कर रहा है तो अब उसके चार गुना ज्यादा यानी 4 हजार रुपए तक चुकाना होगा। इसके अलावा नपा की नई दुकानों के अलावा पुरानी दुकानों को भी टैक्स के दायरे में लाया जाएगा।

2015 में पूरा हुआ था जीआईएस सर्वे

साल 2011 में शहर की भौगोलिक स्थिति जानने के लिए जियोग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम (जीआईएस) सर्वे शुरू किया गया था जो मार्च 2015 में पूरा हुआ। नगरीय प्रशासन विभाग ने विदिशा, सिरोंज, शिवपुरी, डबरा और मलाजखंड नगरपालिका की भौगोलिक स्थिति के आधार पर संपत्तिकर, शिक्षा उपकर, नगरीय विकास उपकर, समेकित कर आदि के लिए जीआईएस सर्वे कराने का ठेका नोएडा की रीडिंग्स कंसल्टिंग्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को दिया था। एजेंसी को नगरपालिका के प्रत्येक वार्ड के घरों का सर्वे और डाटा बेस तैयार करना था। अब इस सर्वे को त्रुटिपूर्ण बताकर दोबारा सर्वे की तैयारी चल रही है।

अब बिल के साथ मकानों के फोटो भी आएंगे, जल, संपत्ति कर, नामांतरण, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन मिलेंगे

अधिकारियों की बढ़ेगी संख्या

नगरपालिका में इस समय राजस्व विभाग में 39 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम राजस्व वसूली संबंधी कार्य कर रही है। यह स्टाफ नगर की 1 लाख 66 हजार की आबादी के हिसाब से था लेकिन अब शहर के आबादी 2 लाख 25 हजार तक पहुंच गई है। इसके अलावा नपा में स्टाफ बढ़ाया जाएगा। इसकी तैयारी चल रही है।

सर्वे के आधार पर बिल बनाना होगा शुरू

नपा सर्वे के आधार पर बिल बनाना शुरू कर देगी। राजस्व विभाग का अमला इस काम में जोरशोर से जुटा हुआ है। शहर के लोगों को दिए जाने वाले बिल पर उनके मकान के फोटो भी लगकर आएंगे। ये बिल कुछ महीने बाद मिलना शुरू हो जाएंगे।

क्या है जीआईएस सर्वे: जियोग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम (जीआईएस) एक भू-विज्ञान सूचना प्रणाली है। यह संरचनात्मक डाटा बेस पर आधारित है। यह विश्व में भौगोलिक सूचनाओं के आधार पर जानकारी प्रदान करती है। संरचनात्मक डाटाबेस तैयार करने के लिए वीडियो, भौगोलिक फोटोग्राफ और जानकारी जरूरी है।

जीआईएस सर्वे त्रुटिपूर्ण

नगरपालिका प्रशासन ने करीब 4 साल पहले शहर के सभी मकानों को टैक्स के दायरे में लाने के लिए जीआईएस सर्वे करवाया था। लेकिन इस सर्वे को अब त्रुटिपूर्ण बताया जा रहा है। इस कारण अब इस सर्वे को दोबारा कराने की तैयारी चल रही है।

नगर पालिका को टैक्स के रूप में मिलते हैं डेढ़ करोड़ रुपए सालाना

नपा को अभी संपत्तिकर के रूप में 62 लाख 85 हजार 684 रुपए मिलते हैं। नगरीय विकास उपकर के रूप में 19 लाख 48 हजार 683 रुपए सालाना मिलते हैं। शिक्षा उपकर के रूप में 37 लाख 66 हजार 116 रुपए मिलते हैं। वहीं समेकितकर के रूप में 28 लाख 59 हजार 622 रुपए की आय होती है। इस तरह ये आय कुल मिलकर एक करोड़ 48 लाख 60 हजार रुपए हो जाती है। अब ये आय दो गुना तक बढ़ जाएगी।

मकानों की संख्या बढ़ेगी

शहर में पुराने सर्वे के अनुसार मकानों की संख्या करीब 32 हजार है। अब नए सिरे से जीआईएस सर्वे करवाने के लिए मकानों की संख्या 4 हजार तक बढ़ जाएगी। इस प्रकार शहर में नगरीय इलाके में 36 हजार मकान दर्ज हो जाएंगे। जिससे सहायता मिलेगी।

शासन के आदेश का करेंगे पालन


ई- नपा में होगी तब्दील

शासन के आदेशानुसार विदिशा नगरपालिका को ई- नगरपालिका में तब्दील किया जा रहा है। इसके लिए जल कर, संपत्ति कर, नामांतरण, राजस्व, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, ठेकेदारों को भुगतान, ई-टेंडरिंग सहित सभी प्रमुख कार्य ऑनलाइन हो जाएंगे। इसके लिए ऑनलाइन कंप्यूटराइज्ड व्यवस्था की जाएगी।

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