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दबाव कम करने बायपास सड़कों का निर्माण कराना है, फंड न होने से रुका पड़ा: सीएमओ

एक वर्ष पहले
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शहर में जाम की समस्या से निपटने और यातायात का दबाव कम करने नपा ने दो साल पहले तीन बायपास सड़कों की योजना तैयार की थी। लेकिन बायपास सड़कों की योजना कागजों तक ही सीमित रह गईं। दो साल बाद भी इस योजना को मूर्त रूप नहीं दे पाई। नपा ने तीन बायपास बनाने की योजना बनाई थी। इससे पुराने शहर पारसरी पुल और जयस्तंभ पर ट्रैफिक का दबाव कम किया जा सके। शाॅर्टकट बायपास सड़कों के निर्माण से पारासरी पुल का यातायात दबाव कम होगा। पुराने शहर से नए बस स्टैंड की दूरी कम होगी। बरेठ रोड व सावरकर चौक का ट्रैफिक डायवर्ट होने से जयस्तंभ चौक पर यातायात को राहत मिलेगी। वर्तमान में पूरा शहर चार मुख्य मार्ग के इर्दगिर्द बसा है। लेकिन ऐसे बायपास मार्ग नहीं हैं। जो शादी समारोह, प्रदर्शन या संकट काल में यातायात की समस्याओं को आसान करें। पहली बार इन मार्गों का महत्व निवृतमान परिषद ने समझा था।

पूर्व पार्षद रवि तिवारी ने बताया नगर की जनसंख्या 2011 की गणना के अनुसार 78 हजार के आसपास थी। नौ सालों में आबादी बढ़कर एक लाख का आकड़ा छू चुकी है। शहर का विकास जिस तेजी से हो रहा है सड़कों का विकास उतनी तेजी से नहीं हो पा रहा है। जबकि विकास के साथ दूसरी सड़कों का विकास जरूरी है। इन सालों में वाहनों की संख्या में चार गुना हो चुकी है।

शहर में जाम की समस्या से निपटने के लिए दो साल पहले तैयार की गई थी योजना


यह थीं तीन नई बायपास सड़कें

पहली सड़क का प्रस्ताव महाराणा प्रताप चौराहा से बूढ़ापुरा, इसी सड़क को जवाहर रोड़ से जोड़ने की योजना थी। इससे यह हनुमान चौक और जवाहर रोड को सीधे नए बस स्टैंड से जोड़ा जा सके। दूसरा बायपास सिटी कोतवाली से नवांकुर गली तक, तीसरा बायपास विद्याश्री से पलोड़ पेट्रोल पंप तक प्रस्तावित किया गया था। वर्तमान में तीन किलो मीटर का लंबा चक्कर लगाकर नए बस स्टैंड तक आना पड़ता है।

तीन करोड़ की स्वीकृति

बरेठ रोड़ भावसार पुलिया से महाराणा प्रताप, बूढ़ा पुरा तक सड़क निर्माण को परिषद की हरी झंडी मिल चुकी है। पारासरी पर पुलिया निर्माण के लिए मुख्यमंत्री अधोसंरचना फेस 2 में प्रावधान भी किया जा चुका है। लेकिन फंड नहीं मिलने से मामला अधर में अटका है। यह बायपास सड़क सबसे बड़ी है। जबकि दो सड़कें छोटी हैं। उनमें सिटी कोतवाली से नवांकुर स्कूल व विद्याश्री से पचमा बायपास तक सड़क की योजना थीं। इनका दो साल बाद भी एस्टीमेट नहीं बन पाया। इसी प्रकार भविष्य में सुभाष चौक से फ्रीगंज स्कूल होते हुए वार्ड क्रमांक छह तक बायपास बनाने की योजना थी। इससे वार्ड क्रमांक 6 और खेत बस्ती सीधे जुड़ जाएगी।

फंड का इंतजाम होने पर निर्माण कराया जाएगा

सुधीर उपाध्याय, सीएमओ नपा गंजबासौदा।

बस स्टैंड बूढ़ा पुरा मार्ग की पहले भी बनी थी योजना

बस स्टैंड बूढ़ा पुरा सड़क निर्माण का प्रस्ताव 2013 में नपा द्वारा बनाया था। लेकिन निर्माण के लिए फंड की जुगाड़ न होने से इसे पेंडिंग कर दिया था। दर असल डब्लूडीएम सड़क नपा द्वारा बनाने की तैयारी की थी। पारासरी पर पुलिया के लिए 40 लाख रुपया सांसद निधि से मांगा था। लेकिन राजनैतिक गतिरोध के कारण राशि नहीं मिल पाई। अब यह सड़क फंड न होने से अटकी है।

पैसों के अभाव में रूका सड़कों का काम।
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