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तीसरी संतान वाले शिक्षक असमंजस में; डीईओ को जवाब भेजें तो भी कार्रवाई, नहीं भेजेंगे तो भी एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी

एक वर्ष पहले
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जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा तीसरी संतान को लेकर जारी किए गए एक आदेश ने जिले के 700 से अधिक शिक्षकों की नींद उड़ा दी है। डीईओ ने अपने आदेश में शिक्षकों से तीसरी संतान को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब नहीं देने पर शिक्षकों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की बात भी इस आदेश में कही गई है।

राज्य सरकार द्वारा कुछ समय पूर्व शिक्षकों को आदेश जारी कर उनकी संतानों संबंधी जानकारी ली गई थी। विधानसभा प्रश्न के जवाब को लेकर मांगी गई इस जानकारी को प्रदेश के सभी जिलों के शिक्षकों द्वारा संकुल केन्द्रों के माध्यम से भेजा गया था। दिसंबर 2019 में हुई जवाब-तलब की इस प्रक्रिया के बाद अब मार्च के महीने में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र के बाद जिले के 700 से अधिक शिक्षक हैरान-परेशान हैं। ये पत्र उन्होंने उन शिक्षकों को भेजे हैं। जिनकी तीन या तीन से अधिक संतान हैं। पत्र में उन्होंने मप्र सिविल मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 नियम 22 के उप नियम 4 एवं मप्र सिविल सेवा (सेवा के सामान्य शर्तें) नियम 1961 का हवाला देते हुए तीसरी संतान होना कदाचरण की श्रेणी में माना है। इस नियम का पालन नहीं करने पर संबधित शिक्षक को भारत सरकार एवं राज्य सरकार की परिवार कल्याण नीति का पालन नहीं करने का दोषी मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई का भागी माना है। उन्होंने 15 दिन के अंदर जवाब नहीं देने पर उन्होंने एकतरफा कार्रवाई करने की बात भी अपने पत्र में कही है।

इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी एसपी त्रिपाठी का कहना है कि तीसरी संतान को लेकर जिले के 700 से अधिक शिक्षकों को पत्र भेज कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। समय सीमा में उनका जवाब आने के बाद आगामी कार्रवाई तय की जाएगी।

महिला शिक्षक दुविधा में

विदिशा जिले के 700 से अधिक शिक्षकों में सिरोंज में 162 और लटेरी के 148 शिक्षकों को ये पत्र भेजे गए हैं। ये शिक्षक यह नहीं समझ पा रहे हैं कि अपनी तीसरी संतान को लेकर वे डीईओ को क्या जवाब दें। नियम के दायरे में आए एक शिक्षक ने बताया कि समझ नहीं आ रहा कि स्पष्टीकरण का जवाब क्या दें। यदि जवाब देते हैं तो भी अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में आएंगे और नहीं देते हैं तो भी विभागीय स्तर पर उन पर एक तरफा कार्रवाई होना तय है। महिला शिक्षक ज्यादा दुविधा में हैं ।

नौकरी के अनुबंध में रहता है नियम

मप्र में वर्ष 2001 के बाद हुई शिक्षकों की सभी भर्तियों में शिक्षकों द्वारा भरे गए अनुबंध में तीसरी संतान को लेकर बनाए गए नियमों का हवाला होता है। जिसमें उल्लेख होता है कि मप्र शासन सामान्य प्रशासन विभाग भोपाल के परिपत्र और नियमों की जानकारी देते हुए बताया जाता है कि 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान होने पर व्यक्ति शासकीय नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा।
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