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नपा का आखिरी बजट 24 को; सीवेज लाइन, हलाली से पानी खरीदी, डिस्ट्रीब्यूशन लाइन को मिलेगी मंजूरी

एक वर्ष पहले
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22 को रविवार, 25 को गुड़ी पड़वा इसलिए 24 तारीख तय

नगरपालिका की बजट बैठक अब 24 मार्च को होगी। इस बैठक से 50 करोड़ रुपए से अधिक के कई प्रस्तावों को हरी झंडी मिलेगी। इससे पहले 1 अक्टूबर 2019 को नपा का सम्मेलन हुआ था। इस सम्मेलन में करीब 50 करोड़ रुपए की लागत के 88 प्रस्ताव रखे गए थे लेकिन कलेक्टर ने 23 अक्टूबर को बैठक के प्रस्ताव निलंबित कर दिए थे। इस वजह से पिछले 4 महीने से नपा में कोई काम नहीं हो पा रहे हैं।

कलेक्टर के निर्णय के विरोध में नपाध्यक्ष मुकेश टंडन और पार्षद धरना से लेकर नपा में तालाबंदी तक कर चुके हैं। अब बैठक की नई तारीख तय होने से शहर के तमाम रुके हुए विकास कार्यों को फिर से पूरा किया जा सकेगा। यह नपा के कार्यकाल की आखिरी बजट बैठक होगी क्योंकि अगस्त में नपा का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। बजट बैठक के संबंध में नपाध्यक्ष मुकेश टंडन और सीएमओ सुधीर सिंह ने बताया कि सभी सदस्यों को 10 दिन पहले सूचना देनी होती है। इस हिसाब से 10 दिन बाद 22 मार्च को रविवार और 25 मार्च को गुड़ी पड़वा का अवकाश है। इस कारण बीच में 24 मार्च को ही बजट बैठक बुलाई जाएगी। इसमें हलाली डेम से पानी खरीदी, सड़कों का डामरीकरण, सीसीकरण, सीवेज लाइन, डिस्ट्रीब्यूशन लाइन के बचे निर्माण कार्यों को मंजूरी दिलाई जाएगी।

ये है पूरा मामला: 1 अक्टूबर की बैठक मंे विधायक ने लगाई थी आपत्ति

20 मिनट में पढ़े गए थे 88 प्रस्ताव: नपा ने विगत 1 अक्टूबर की बैठक में 20 मिनट में 88 प्रस्ताव पास किए थे लेकिन बाद में विधायक शशांक भार्गव की आपत्ति के बाद कलेक्टर ने 23 अक्टूबर को पीआईसी की बैठक को सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद अभी तक प्रशासन ने बैठक के संबंध में कोई निर्णय नहीं किया है। नपाध्यक्ष मुकेश टंडन अपने पार्षदों सहित 10 फरवरी को माधवगंज चौराहे पर नपा की बैठक सस्पेंड किए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर चुके हैं।

ये प्रस्ताव हुए थे पास: हरिपुरा वात्सल्य स्कूल के पास पीलिया नाले पर 1.50 करोड़ में पुल का निर्माण। मुक्तिधाम में 25 लाख 90 हजार में शेड निर्माण, 30 लाख 15 हजार में मुक्तिधाम की बाउंड्रीवाल, गार्डन और गेट के लिए 1.50 करोड़ और 49 लाख में यहां स्मार्ट बिल्डिंग का निर्माण।

माधवगंज स्थित मालवीय उद्यान की दुकानों को पिछले हिस्से हरसिंह एंड कंपनी के सामने शिफ्ट करने और माधवगंज तिराहे का सौंदर्यीकरण। हलाली से पानी लाने के लिए कार्ययोजना के लिए 50 लाख। पुरानी पाइप लाइन को बदलने के लिए 3 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति। सुआखेड़ी में गोशाला के लिए 3 करोड़ की स्वीकृति। शहर में सफाई के लिए 400 सफाईकर्मी 25 दिन के लिए रखने की स्वीकृति। स्वास्थ्य शाखा के वाहन चालक और हेल्पर का न्यूनतम वेतन 5 करने की स्वीकृति। मैथिलीशरण गुप्त पार्क के विकास और प्रतिमा के लिए करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति। गुलाब वाटिका से दुर्गानगर चौराहे तक फुटपाथ और सौंदर्यीकरण के लिए 1.50 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।

विधायक ने लगाई थी ये आपत्ति: इस मामले में विधायक शशांक भार्गव ने कलेक्टर को पत्र भेजकर आपत्ति लगाई थी कि नपाध्यक्ष ने 1 अक्टूबर के सम्मेलन में महज 20 मिनट में ताबड़तोड़ 88 प्रस्ताव पास करवा लिए। एक भी प्रस्ताव पर नियमानुसार पार्षदों के बीच चर्चा नहीं कराई गई। इतना ही नहीं पार्षदों को इस सम्मेलन की सूचना निर्धारित समय पर नहीं दी गई। पिछली बैठक के कार्य बिंदुओं को पार्षदों अवलोकन के लिए नहीं रखा गया। उनकी नियमानुसार पुष्टि भी नहीं कराई गई। इस कारण बैठक निरस्त की जानी चाहिए।

23 अक्टूबर को बैठक निलंबित करने के बाद पिछले 4 माह से नहीं हुआ कोई काम

ये काम भी होंगे: चौराहों का सौंदर्यीकरण होगा, महापुरुषों की प्रतिमाएं लगेंगी

पिछले 4 महीने से नगरपालिका परिषद की बैठक नहीं होने से करीब 50 करोड़ रुपए के 88 निर्माण कार्यों के प्रस्ताव अटके पड़े हैं। इनमें 2.50 करोड़ रुपए की लागत से बेतवा तट स्थित मुक्तिधाम का कायाकल्प, 3 करोड़ की लागत से शहर के प्रमुख चौराहों का सौंदर्यीकरण और महापुरुषों की प्रतिमाओं की स्थापना, 1.50 करोड़ की लागत से बाल विहार में होने वाले निर्माण कार्यों पर रोक लग गई है। इसके अलावा सीसी और डामर रोड, सीसी नाली निर्माण कार्य सहित शहर के विकास से जुड़े अनेक प्रस्ताव शामिल हैं।

बैठक बुलाने का नियम: नपा परिषद की बैठक बुलाने के लिए पार्षदों और अन्य संबंधित सभी सदस्यों को 10 दिन पहले सूचना देने का नियम है। यदि 10 दिन पहले सूचना नहीं दी जाती है तो बैठक को नियम विरुद्ध माना जाता है।

4 साल में 12 सम्मेलन, 1089 प्रस्ताव पास

नपा के अनुसार परिषद का पहला सम्मेलन सितंबर 2015 में हुआ था। तब से लेकर अब तक 12 सम्मेलन हो चुके हैं। इन सम्मेलन में 1089 से ज्यादा प्रस्ताव पास किए गए। साथ ही पीआईसी की 36 बैठक हुईं और इनमें 830 प्रस्ताव पास हुए। पार्षदों का कहना है कि 4 साल में 1919 प्रस्ताव पास हुए। जब नपाध्यक्ष मुकेश टंडन से इस बारे में सवाल किया तो उनका कहना था कि काम कराने की प्रक्रिया बहुत कठिन है। कई बार टेंडर जारी होते हैं और ठेकेदार नहीं आते। इस वजह से काम नहीं हो पाता।
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