मयूर के पंख इतने कोमल होते हैं कि उससे चींटी को भी हटाया जाए तो भी उसे चोट नहीं लगती

Vidisha News - गंजबासौदा| तारण तरण जैन दिगंबर जैन पाठशाला में मुनि निर्णय सागर और पद्म सागर महाराज का पिच्छी परिवर्तन समारोह...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 08:00 AM IST
Ganjbasoda News - mp news peacock feathers are so soft that even if the ant is removed from it it does not hurt
गंजबासौदा| तारण तरण जैन दिगंबर जैन पाठशाला में मुनि निर्णय सागर और पद्म सागर महाराज का पिच्छी परिवर्तन समारोह धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के बीच मनाया गया। इससे पहले दोपहर 1 बजे नवीन पिच्छी लेकर शोभायात्रा महावीर बिहार से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई तारण तरण जैन पाठशाला में पहुंची।

दोपहर 2 बजे मुनि संघ की अगवानी के साथ कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। कार्यक्रम के दौरान नगर में संचालित जैन पाठशालाओं के नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। इस मौके पर मुनी निर्णय सागर महाराज ने कहा की मयूर पंख से निर्मित पिच्छी अहिंसा का उपकरण होता है। इसे संयम का प्रतीक भी कहा जाता है। उन्होंने साधु द्वारा ग्रहण की गई पिच्छी का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि कार्तिक मास में मयूर अपने पंख स्वयं त्याग देता है, जिसके उपरांत नए पंखों को धारण करता है। उन पंखों को एकत्रित कर पिच्छिका निर्माण किया जाता है। मयूर के पंख इतने कोमल होते हैं कि अगर उसे चींटी को भी हटाया जाए तो भी उसे चोट नहीं लगती। कार्यक्रम का संचालन कटंगी से आए बाल ब्रह्मचारी संजीव जैन ने किया। पुरानी पिच्छी ब्रा. संजय भैया, मनोज कुमार, मोहिनी जैन, पीयूष जैन को प्राप्त हुआ। इसी प्रकार पदम सागर महाराज की पुरानी पिच्छी राजेन्द्र कुमार, सुनीता जैन को मिली। कार्यक्रम के दौरान पूरा पंडाल परिसर जन मानस से भरा था।

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