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रामलीला... पहले स्व. शंकरदयाल शर्मा बनते थे दशरथ, अब उनके बेटे मुकेश बन रहे, 1987 में एक दिन पहले ही लगाना पड़ा था दरबार

Vidisha News - दशरथ के दरबार में श्री राम को राजा बनाने घोषणा होते ही गूंज उठी तालियों की ध्वनि पिता के निधन के बाद राम बारात ...

Jan 25, 2020, 09:30 AM IST
Vidisha News - mp news ramleela first self shankardayal sharma used to be dasharatha now his son mukesh was being formed the court had to be set up a day before in 1987
दशरथ के दरबार में श्री राम को राजा बनाने घोषणा होते ही गूंज उठी तालियों की ध्वनि

पिता के निधन के बाद राम बारात अगले दिन निकाली गई: मुकेश

एडवोकेट मुकेश शर्मा ने बताया कि 1963 से 2005 तक उनके पिता स्व शंकरदयाल शर्मा ने दशरथ की भूमिका निभाई थी। इसी बीच जब एक बार 1987 में मेरी बारात की तारीख दशरथ दरबार के दिन की तय हुई। ऐसे में रामलीला में घोषित तारीख के एक दिन पहले ही दशरथ दरबार की लीला का मंचन माधौगंज चौराहे पर किया गया था। इसके अलावा 2010 में उनके निधन पर राम बारात कैंसिल हो गई थी। जो दूसरे दिन निकाली गई थी।

नारद के किरदार में ढले चतुर्वेदी

हर युग और कथा की शुरूआत में देवऋषि नारद की भूमिका अहम होती है। इसी तरह विदिशा की रामलीला में नारद की मौजूदगी रोजाना जरूरी है, यह भूमिका किला अंदर के बालाजी मंदिर निवासी पं रवि चतुर्वेदी द्वारा निभाई जाती है। ये भूमिका वो 25 साल से निभा रहे हैं। रामलीला के सिर्फ वही ऐसे पात्र हैं जो शुरूआत से अंतिम दिन तक एक ही किरदार में नजर आते हैं। स्टेडियम में बैठे दर्शकों के बीच जब वे नारद की भूमिका में पहुंचते हैं तो लोग उनसे आशीर्वाद लेने टूट पड़ते हैं। उन्होंने खुद को नारद के किरदार में इतना ढाल लिया है कि रामलीला के बाहर भी उन्हें दर्शक स्नेह से नारदजी कहने लगे हैं। शनिवार को राजतिलक की तैयारियों के बीच मंथरा और कैकयी संवाद होगा।

विदिशा| रामलीला के 11 वें दिन शुक्रवार को दशरथ दरबार की लीला का मंचन किया गया। श्री राम विवाह के बाद विवाह उत्सव में एवं अयोध्या में दशरथ सभा की लीला संपन्न हुई।

इस अवसर पर महाराज दशरथ ने अपने संदेश में कहा कि प्यारे अवधपुरवासी प्रजाजनों जो राजा प्रजा से कर लेकर धर्म की शिक्षा नहीं देते वह प्रजा के किए हुए पाप के भागी होते हैं। ऐसे में अपने राज्य और यश का नाश कर बैठते हैं। अवधपुरी का नाम धर्म राज्य के नाम से जगत में विख्यात है। मंचन के दौरान जब श्री राम को राजा बनाने की वे घोषणा करते हैं तो सभी तालियां बजाकर इस निर्णय का समर्थन करते हैं। तब राजा दशरथ सभी का धन्यवाद ज्ञापित करते हैं।

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