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800 रु. टूट कर सोयाबीन 3415 रु. क्विंटल पहुंचा, व्यापारियों ने स्टॉक से बना रखी है दूरी

एक वर्ष पहले
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कोरोना वायरस और शेयर बाजार में गिरावट का असर अनाज मंडी में भी दिखाई दे रहा है। बीते एक सप्ताह में सभी प्रकार की जिंसों में गिरावट हो रही है। सोयाबीन के भाव तो सप्ताह भर में 800 रुपए तक गिर गए हैं। ऐसे में व्यापारियों ने स्टाक से दूरी बना ली है और वे खरीदी गई उपज को खरीद कर तुरंत ही बेच रहे हैं।

देश भर के बाजार इन दिनों कोरोना वायरस से प्रभावित हो रहे हैं। कोरोना के असर के चलते देश भर का शेयर बाजार लगातार लुढ़क रहा है। इसका असर सिरोंज कृषि उपज मंडी में बिकने आ रही उपज पर भी दिखाई दे रहा है। मंडी में बीते एक सप्ताह में सभी प्रकार की उपज के भावों में मंदी आ रही है। सबसे ज्यादा असर सोयाबीन पर दिखाई दे रहा है। बीते एक सप्ताह में ही सोयाबीन के भाव 800 रुपए टूट गए हैं। सप्ताह भर पहले सिरोंज मंडी में सोयाबीन ऊंचे में 4200 रुपए क्विंटल तक बिक रहा था। जो घटते-घटते अब 3400 रुपए पर आ गया है। गुरुवार को मंडी में सोयाबीन 3415 रुपए क्विंटल बिका। यही स्थित अन्य प्रकार की जिंसों में भी बनी हुई है। इसी तरह की स्थिति तेवड़ा, चना और बटरी के भाव में भी बनी हुई है। सप्ताह भर पहले जो तेवड़ा 3500 से 3600 रुपए क्विंटल तक बिक रहा था। इसके भाव लगातार टूटते हुए गुरुवार को सिरोंज मंडी में 3200 रुपए क्विंटल पर पहुंच गए हैं। यही हाल चना और बटरी के हैं। इन दोनों उपज के भाव भी 200 से 300 रुपए तक टूटे हैं। भाव में मंदी का असर गेहूं पर भी दिखाई दे रहा है। व्यापारी संजीव साहू ने बताया कि मिल क्वालिटी का गेहूं सिरोंज मंडी में समर्थन मूल्य से 200 रुपए कम 1800 रुपए क्विं. तक बिक रहा है।

इस महीने बढ़ेगी नई उपज की आवक: क्षेत्र में इन दिनों रबी की उपज की कटाई का सिलसिला चल रहा है। 15 मार्च के बाद मंडी में रबी की उपज की आवक का जोर भी बढ़ने लगेगा। जिस तरह से अभी सभी प्रकार की जिंसों के दाम कम हो रहे हैं। उससे ऐसा लग रहा है कि आगामी समय में भाव और अधिक अधिक टूटेंगे। मंडी में कमीशन एजेंट राजेश रघुवंशी ने बताया कि बाजार के हालात को देखते हुए व्यापारी मंडी में उपज खरीदने के बाद तुरंत ही उसका सौदा बड़ी में मंडी में कर रहे हैं। इन हालातों में व्यापारी स्टाक से बच रहे हैं। वहीं जिनके पास स्टाक रखा हुआ है वे भाव बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।

मिल क्वालिटी का गेहूं समर्थन मूल्य से 200 रु. कम 1800 रु. क्विं. तक बिक रहा


विदेशाें में होता है सोया खली का निर्यात

सोयाबीन के भाव में लगातार आ रही मंदी की मुख्य वजह विदेशों में सोयाबीन खली का निर्यात प्रभावित होना है। सोयाबीन खली वह उत्पाद होता है जो प्रसंस्करण इकाइयों में सोयाबीन का तेल निकालने के बाद बचा रहता है। यह उत्पाद प्रोटीन का बड़ा स्त्रोत माना जाता है। इससे सोया आटा, सोया बड़ी, बिस्किट, पशु आहार आदि तैयार किया जाता है। तेल मिल इस उत्पाद को विदेशों में निर्यात करते हैं। कोरोना वायरस की वजह से देश का निर्यात प्रभावित हो रहा है। इस वजह से सोया उत्पाद का निर्यात भी प्रभावित हुआ है। इसका असर सीधा कृषि उपज मंडी में बिकने आ रहे सोयाबीन के भाव पर भी पड़ रहा है।
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