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बीपी और शुगर के मरीजों को 30 दिन की दवा देने का नियम, लेकिन मिल रही 3 दिन की ही

एक वर्ष पहले
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शहर के लोगों के लिए बड़े जोरशोर से पुराने जिला अस्पताल भवन में 1 जनवरी से सिटी हास्पिटल का शुभारंभ किया गया था। सिटी हास्पिटल के शुभारंभ के 3 महीने बाद भी शहर के लोगों को यहां पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सिटी हास्पिटल में डाक्टरों और दवाइयों का टोटा चल रहा है।

यहां बीपी और शुगर के मरीजों को 30 दिन तक की दवाएं मुहैया कराने का नियम है लेकिन यहां आने वाले मरीजों को सिर्फ 3 दिन की दवाइयां ही काउंटर से उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस कारण यहां आने वाले मरीजों को बार-बार अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभी तक सिटी हास्पिटल के नाम पर डाक्टर, कंपाउंडर और अन्य स्टाफ का इंतजाम नहीं किया गया है। पीपलखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र के स्टाफ से ही विदिशा के सिटी हास्पिटल की व्यवस्थाएं संचालित की जा रही हैं।

बेवजह लगाने पड़ते हैं चक्कर: सिटी हास्पिटल में में इलाज कराने पहुंचे 70 साल के मरीज संतोष शर्मा ने बताया कि वे बीपी से पीड़ित मरीज हैं। उन्हें पहले बीपी के लिए 30 दिन की दवाएं एक साथ मिल जाती थीं लेकिन अब सिर्फ 3 दिन की दवाएं दी जा रही हैं। इससे बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस पर ड्यूटी डाक्टर मेघा जैन ने कहा कि अभी यहां दवाओं का ज्यादा स्टाक नहीं है। इस कारण 3 दिन की दवाएं दी जा रही हैं। स्टाक बढ़ते ही ज्यादा दिन की दवाएं दी जा सकेंगी।

इलाज की सुविधा भी नहीं

सिटी हास्पिटल में रोजाना 70 से 100 मरीज पहुंचते हैं। सीजन में यहां इससे ज्यादा मरीज ओपीडी में आते हैं। इसके बाद भी यहां हृदय रोग, उदर रोग, हार्ट अटैक सहित गंभीर रोगों के इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है। सिटी हास्पिटल के शुभारंभ मौके पर विधायक शशांक भार्गव ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से यहां हृदय रोग, उदर रोग जैसी बीमारियों के इलाज के लिए इंतजाम करने को कहा था लेकिन 3 महीने बाद भी यहां इलाज की मुकम्मल व्यवस्था नहीं की गई है।

नए अस्पताल तक जाने के लिए आवागमन की सुविधा नहीं

सिटी हास्पिटल से नया जिला अस्पताल भवन करीब 2 किमी दूर बनाया गया है। वर्तमान जो गंभीर मरीज सिटी हास्पिटल में आते हैं तो उन्हें नए जिला अस्पताल में जाने को कहा जाता है। ऐसे में मरीजों के साथ दिक्कत यह होती है कि उन्हें नए जिला अस्पताल तक पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं मिलता है। यहां पर सरकारी एंबुलेंस का इंतजाम भी नहीं किया गया है। इस कारण 200 रुपए आने-जाने में ऑटो किराए में खर्च करने पड़ते हैं।

पीपलखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र का स्टाफ चला रहा है सिटी हास्पिटल की व्यवस्था

अर्बन पीएचसी का टाइम बदला

बीएमओ डा.एके उपाध्याय ने बताया कि सिटी हास्पिटल भवन में ही अर्बन पीएचसी का संचालन किया जा रहा है। इसमें भी एक डाक्टर अपनी सेवाएं मरीजों को देता है। पहले इसका टाइम सुबह 9 से शाम 4 बजे तक किया जाता था
लेकिन अब इसका टाइम बदलकर सुबह 8 से 11 बजे तक और शाम को 4 से रात 8 बजे तक कर दिया गया है। इसके अलावा सिटी हास्पिटल का टाइम सुबह 9 से शाम 4 बजे तक यथावत ही रखा गया है।

सिर्फ एक डाॅक्टर के भरोसे चल रहा सिटी हास्पिटल

सिटी हास्पिटल में अभी सिर्फ एक आयुष विंग डाॅक्टर का इंतजाम किया गया है। इसके अलावा पीपलखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डाॅ.एके उपाध्याय ही अपने स्टाफ के साथ व्यवस्थाएं सुधारने में लगे हैं। आगामी अप्रैल महीने से सिटी हास्पिटल का नया स्टाफ स्वीकृत होने की संभावना है। इसके बाद ही व्यवस्थाओं में सुधार हो सकता है।

संजीवनी हास्पिटल के रूप में विकसित होगा सिटी हास्पिटल

सीएमएचओ डा.केएस अहिरवार ने बताया कि बीपी के मरीजों को 3 दिन की दवाएं देना गलत है। ऐसे मरीजों को 30 दिन की दवाइयां ही मुहैया कराई जाएंगी। डा.अहिरवार ने बताया कि विदिशा के सिटी हास्पिटल को जल्द ही संजीवन हास्पिटल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस संबंध में उनकी स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा.पंकज शुक्ला से चर्चा हो चुकी है। संजीवनी हास्पिटल का दर्जा मिलते ही यहां स्टाफ बढ़ जाएगा। डाक्टरों की संख्या भी बढ़ जाएगी।

पुराने जिला अस्पताल में ओपीडी चालू करने के बाद मरीजों को नहीं मिल रही दवा ।
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