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सांची बौद्ध विवि ने किराए में 3.72 करोड़ खर्च किए जिस पहाड़ी पर भवन बनना, वहां अधूरी बाउंड्रीवॉल

एक वर्ष पहले
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दिसंबर 2012 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने सांची में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध विवि खोलने की घोषणा की थी। इसके लिए बाकायदा भोपाल रोड पर सांची और सलामतपुर के बीच में ऊंची पहाड़ी पर 120 एकड़ जमीन का आवंटन भी किया गया था। जिसका श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महेंद्र राजपक्षे ने उसका विविधत शिलान्यास भी किया था, लेकिन 7 साल बाद भी सांची बौद्ध यूनिवर्सिटी का भवन आकार नहीं ले सका है। 3 साल पहले पहाड़ी को घेरने के लिए बाउंड्रीवाॅल बनाने का कार्य जरूर शुरू किया गया था, लेकिन वह भी अधूरा पड़ा है।

ऐसी हालत में सांची बौद्ध विवि वर्ष 2015 से रायसेन रोड स्थित ग्राम बारला में प्रदेश के पूर्व मंत्री डा.गौरीशंकर शेजवार के निजी स्वामित्व वाले भवन में किराए से संचालित हो रहा है। इस भवन को विवि प्रबंधन ने कलेक्टर रेट पर 6 लाख रुपए माह किराए से लिया है। इस प्रकार देखा जाए तो पिछले 62 माह में किराए के भवन में 6 लाख रुपए महीने के हिसाब से फरवरी 2020 तक 3 करोड़ 72 लाख रुपए की राशि खर्च हो चुकी है। इतनी राशि में तो विश्वविद्यालय का स्वयं का भवन बनकर तैयार हो जाता।

ये मिसाल... 2 साल में बना 12 कमरों का शा. कॉलेज का भवन


कई साल पुराने केवी नर्सिंग ट्रेनिंग सेंटर में लगने वाला विदिशा का शास. महाविद्यालय लगता था, लेकिन 2016 में 4 करोड़ की मंजूरी मिलने के बाद प्रबंधन ने खुद का भवन 2 करोड़ 88 लाख से 2000 स्क्वायर फीट में तैयार किया जहां 2018 से कक्षाएं भी लगना शुरू हो गई है। इसमें कुल 12 कमरे हैं। जिसमें प्रयाेगशाला के 4, स्टाफ रूम 1, एकाउंट रुम 1, एनसीसी कक्ष 1, स्टोर रूम 1 के अलावा 4 टायलेट है।

ये है सांची बौद्ध विश्वविद्यालय का स्टाफ

359 पद स्वीकृत, कार्यरत सिर्फ 55

विवि के लिए कुल 359 पद स्वीकृत हैं। इनमें से वर्तमान में 15 शैक्षणिक और 40 अशैक्षणिक कर्मचारी कार्यरत हैं। विवि का जब स्वयं का अपना भवन बनकर तैयार होगा और यूजीसी द्वारा एफिलेटेड सभी कोर्स संचालित होंगे तो उस समय सभी स्वीकृत 359 कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी।

3 कोर्स में 109 स्टूडेंट

सांची विवि में फिलहाल एमए, एमफिल और पीएचडी सहित 3 कोर्स में 109 छात्र पढ़ रहे हैं। यहां एमए में बुद्धिज्म, भारतीय दर्शन, इंडियन पेंटिंग, योगा, हिंदी और अंग्रेजी की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। एमफिल और पीएचडी में एमए वाले सभी कोर्स पढ़ाने के साथ ही आयुर्वेद का कोर्स अलग से कराया जा रहा है।

बोधिवृक्ष

अधूरी पड़ी बाउंड्रीवॉल

एक रुपए किराए का अभी नहीं हुआ एग्रीमेंट

2015 से सांची विवि 6 लाख रुपए मासिक किराए के भवन में चल रहा है। दिसंबर 2018 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही पूर्व मंत्री डा.गौरीशकर शेजवार ने सांची विवि के लिए सिर्फ 1 रुपए मासिक किराए का प्रपोजल विवि प्रबंधन को दिया था। विवि के सहायक निदेशक जनसंपर्क विजय दुबे के अनुसार अभी तक एक रुपए किराए वाला प्रपोजल मंजूर नहीं हुआ है और ना ही कोई नया एग्रीमेंट हुआ है। इस हिसाब से अभी भी 6 लाख ही प्रतिमाह किराया है।

एक्ट भी समझिए... विवि सिर्फ सांची के आसपास रायसेन जिले में ही हो सकता है संचालित, बुद्धिज्म के कोर्स की डिमांड, लेकिन कोर्स शुरू नहीं

इधर...विदिशा में 2 साल में ही 2.88 करोड़ खर्च कर खुद के भवन में चलने लगा कॉलेज

सांची सलामतपुर रोड सांची बौद्ध विवि भवन बनाने के नाम पर सिर्फ बाउंड्रीवाॅल ही बनी, वो भी अधूरी है।

14 हजार की छात्रवृत्ति

विवि के जनसंपर्क अधिकारी फिरोज अहमद बताते हैं कि यहां पीएचडी करने वाले स्टूडेंट को 14 हजार और एमएफिल करने वालों को 8 हजार स्कालरशिप दी जा रही है। विवि एक्ट के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध विवि सिर्फ सांची के आसपास रायसेन जिले में ही संचालित हो सकता है।

55 कर्मचारियों के वेतन-भत्तों पर 36 लाख खर्च

सांची के अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध विवि में फिलहाल 13 असिस्टेंट प्रोफेसर, 1 एसोसिएट प्रोफेसर, 1 रिटायर्ड प्राचार्य को डीन के पद पर पदस्थ किया गया है। मैनेजमेंट के 2 अन्य कर्मचारियों सहित कुल 17 कर्मचारी प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के कर्मचारी तैनात हैं। इसके अलावा विवि में 40 कर्मचारी अशैक्षणिक वर्ग के हैं। इन 55 कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में ही महीने में करीब 36 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं।

भवन के मेंटेनेंस में 15.50 लाख रु. खर्च

सांची के ग्राम बारला स्थित नेचर क्योर सेंटर में सांची का अंतर्राष्ट्रीय विवि वर्ष 2015 से लगातार संचालित हो रहा है। इस भवन में बिजली, पानी, सुरक्षा सहित अन्य मेंटेनेंस में 25 हजार रुपए महीने के हिसाब से 62 महीने में 15 लाख 50 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। यदि विवि का अपना भवन बन जाए तो हर महीने होने वाले मेंटेनेंस के खर्च को भी बचाया जा सकता है।

बोधिवृक्ष की सुरक्षा मंे 1.8 करोड़...

खर्च इतने में विशाल जंगल तैयार हो जाता

दिसंबर 2012 में श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महेंद्र राजपक्षे ने श्रीलंका से लाए बोधि वृक्ष को अपने हाथों से रोपा था। जो अब 7 साल का 20 फीट लंबा पेड़ बन चुका है। जिसकी सुरक्षा में यहां एक चार की गार्ड चौबीसों घंटे तैनात की गई है। । इसमें हर माह 1.25 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। दिसंबर 2012 से फरवरी 2020 तक पिछले 87 माह में बोधिवृक्ष की सुरक्षा में ही 1 करोड़ 8 लाख 75 हजार खर्च हो चुके हैं। इतनी राशि में से प्रति पौधा 1 हजार रु. खर्च होने पर भी 7 सालों में 10 हजार 875 पेड़ों का जंगल तैयार हो जाता। बोधवृक्ष पर इस समय भौंरा रोग लग गया है। उसके पौधे पीले पड़ गए हैं जो नीचे गिरने लगे हैं।

पहाड़ी को 5 साल से सांची बौद्ध विवि के भवन का इंतजार

किराए के भवन में अभी ये सुविधाएं

किराए के भवन में अभी 5 क्लास रूम, 16 आवास, 1 आडिटोरियम, 1 वीसी रूम, 20 कमरों का गेस्ट हाउस, मेस, गर्ल्स और बायज हास्टल है।

कम हो रहे हैं शोधार्थी: अभी एमए, एफफिल और पीएचडी में सिर्फ 109 स्टूडेंट हैं। बुद्धिज्म कोर्स की डिमांड ज्यादा है लेकिन कोर्स संचालित नहीं हो रहे हैं।
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