जिनवाणी माता का ज्ञान मिलने पर संसार से मुक्त होते हैं साधक

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Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 09:40 AM IST
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विदिशा| द्वादशांग जिनवाणी माता का ज्ञान जिन्होंने प्राप्त किया वह संसार से मुक्त हुये हैं। उपरोक्त उद्गार आचार्य उदार सागर महाराज ने र|करंडक श्रावकाचार से सम्यक ज्ञान पर उद्बोधन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संसार से मुक्त के लिये द्वादशांग का ज्ञान और उसकी भक्त जरूरी है। महाराजजी ने कहा कि आज के समय में भले ही द्वादशांग का ज्ञान प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन जो श्रुत हमारे सामने हैं जो उसका अभ्यास करता हैं एवं श्रुत के प्रति श्रद्धा और भक्तिभाव होता है, उनके कर्मों की निर्जरा होती ही है। उन्होंने कहा कि चारों अनुयोग कार्यकारी एवं उपयोगी हैं। द्रव्यानुयोग, प्रथमानुयोग चरणानुयोग, करुणानुयोग। इस प्रकार से चारों अनुयोग महत्वपूर्ण हैं एवं चारों अनुयोगों में से कोई भी अनुपयोगी नहीं हैं। आचार्य श्री समंतभद्र स्वामी ने प्रथमानुयोग का कथन करते हुये कहते है कि परमार्थ भूत समीचीन श्रुतज्ञान बोधि समाधि को दिलाने में सहायक हैं। प्रथमानुयोग से हमें उन कथाओं की जानकारी मिलती हैं ।

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