रवि पुष्य का विशेष सहयोग आज, लक्ष्मी का रहता है वास, खरीदारी के लिए रहेगा शुभ

Vidisha News - ज्योतिष में रवि पुष्य एवं गुरु पुष्य को अत्यंत शुभ माना जाता है भास्कर संवाददाता | विदिशा 17 मार्च रविवार के दिन...

Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 05:15 AM IST
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ज्योतिष में रवि पुष्य एवं गुरु पुष्य को अत्यंत शुभ माना जाता है

भास्कर संवाददाता | विदिशा

17 मार्च रविवार के दिन यदि पुष्य नक्षत्र पड़े तो इसे रवि पुष्य कहते हैं। ज्योतिष में रवि पुष्य एवं गुरु पुष्य को अत्यंत शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ कारक नक्षत्र कहा जाता है। पुष्य का अर्थ होता है कि पोषण करने वाला और ऊर्जा शक्ति प्रदान करने वाला नक्षत्र। ऐसी मान्यता है कि इस शुभ दिन पर संपत्ति और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था जब भी गुरुवार अथवा रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र आता है तो इस योग को गुरु पुष्य और रवि पुष्य नक्षत्र के रूप में जाना जाता है योग। अक्षय तृतीया धनतेरस और दीपावली जैसी धार्मिक तिथियों की भाती जी माना जाता है।

कहा जाता है कि इस दिन लक्ष्मी घर में वास करती हैं और जो सामान खरीदा जाता है वह अधिक समय तक घर में स्थाई रहता है। पुष्य नक्षत्र में किए जाने वाले सभी कार्य शुभ माने जाते हैं। ज्योतिष में 12 राशियों में समाविष्ट होने वाले 27 नक्षत्रों में आठवें नक्षत्र पुष्य को सबसे शुभ नक्षत्र कहते हैं। इसी नक्षत्र में गुरु उच्च राशि का होता है। देवों के आशीर्वाद से पुरस्कृत इस नक्षत्र के देवता बृहस्पति और दशा स्वामी शनि है। कर्क राशि के अंतर्गत समाविष्ट होने से इस नक्षत्र के राशि पति चंद्र हैं। इस प्रकार से गुरुवार चंद्र के शुभ संयोग इस नक्षत्र में होने से किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पुष्य नक्षत्र श्रेष्ठ माना जाता है। धर्माधिकारी पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि 17 मार्च रविवार को पुष्य नक्षत्र दिन भर रहेगा। पुष्य नक्षत्र में खरीददारी करना अति शुभ माना गया है। पुष्य नक्षत्र में किए गए कामों को हमेशा सफलता सिद्धि प्राप्त होती है इसलिए विवाह को छोड़कर सभी कार्य व्यापार खरीदारी करना शुभ माना जाता है। पुष्य नक्षत्र में विशेषकर भूमि, वाहन, मकान खरीदना, सूर्य देव की उपासना करना, विद्या आरंभ करना, धार्मिक कार्य करना, यंत्र, मंत्र, पूजा, अनुष्ठान आदि के लिए शुभ माना गया है। बताया जाता है कि पुष्य नक्षत्र को ब्रह्मा जी का श्राप मिला था इसलिए यह नक्षत्र शादी विवाह के लिए वर्जित माना गया है।

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