स्वभाव, संस्कृति, त्योहारों की विविधता ही हमारे भारत की पहचान है: प्रधान

Vidisha News - युवाओं को भारतीय संस्कृति और इतिहास से जोड़ने और देश सेवा के लिए प्रेरित करने के मकसद से एसएटीआई में विदिशा यूथ...

Bhaskar News Network

Oct 21, 2019, 09:26 AM IST
Vidisha News - mp news the diversity of nature culture festivals is the hallmark of our india pradhan
युवाओं को भारतीय संस्कृति और इतिहास से जोड़ने और देश सेवा के लिए प्रेरित करने के मकसद से एसएटीआई में विदिशा यूथ कॉन्क्लेव का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में विदिशा और रायसेन की 12 तहसीलों के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। 3 सत्रों के इस कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे सरस्वती वंदना के साथ हुई। कार्यक्रम के शुरुआत मैं आयोजक शुभम वर्मा ने विदिशा के इतिहास से युवाओं को रूबरू कराया। उन्होंने विदिशा के सभी प्राचीन मंदिरों और संस्कृति के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि दुनिया के सबसे समृद्ध शहरों में विदिशा शुमार था। ईसा पूर्व में भी विदिशा दुनिया के नक्शे में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता था।

पहले सत्र को रोहित प्रधान ने संबोधित किया। वे एनआईटी जयपुर के इन्क्यूबेशन सेंटर के मेंटर के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में लोगों को शांति चाहिए तो वे भारत आते हैं। स्वभाव, संस्कृति, त्योहारों की विविधता ही हमारे भारत की पहचान है। यही हमारी भारतीयता है। रोहित प्रधान ने रामायण के माध्यम से युवाओं को समझया। उन्होंने कहा कि तर्क प्रधान ही नहीं, भाव प्रधान देश है भारत। उन्होंने दूसरे सत्र को बड़नगर से आए राजपालसिंह राठौर ने संबोधित किया। वे आईबीएम आयरलैंड से 50 लाख सालाना की नौकरी छोड़कर भारत लौटे हैं। साथ ही उन्होंने और राष्ट्र सेवा के लिए काम करने की ठानी है। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत युवाओं को मोटिवेट करके की। उन्होंने बातचीत में टाइम व्यर्थ करने की बजाय आइडियाज पर विचार व्यक्त करने की बात कही। वहीं उन्होंने जैविक खेती राष्ट्र सेवा से संबंधित सवालों के जवाब भी दिए। उनका कहना था कि हमें वो मानस तैयार करने पर केंद्रित होना है जो हमें उस श्रेणी में ला खड़ा करे कि हम विश्व संचालन कार्य के क्षमतावान बने। दूसरे सत्र की अध्यक्षता रूपेश जी लाड ने की। तीसरा सेशन उमाशंकर पचौरी ने लिया। उन्होंने कहा जब आप कर्म में मैं जोड़ देते हैं तो कर्म का प्रभाव खत्म हो जाता है। उन्होंने मातृ शक्ति और परिवार के महत्व को बताया और युवाओं को समाज परिवार व देश के लिए परोपकार करने की बात कही।जीवन के हर क्षण भारत माता के लिए समर्पित करना ही हमारे जीवन का उद्देश्य है। जन सामान्य विचारों को जोड़ने के लिए बने यंग थिंकर्स कॉन्क्लेव की तुलना उन्होंने रामसेतु से की। तीसरे सत्र की अध्यक्षता प्रियंक कानूनगो ने की। आखिर में वंदे मातरम के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। शुभम वर्मा ने सभी का आभार माना। इसके साथ ही युवाओं ने भी देश सेवा का प्रण लिया।

3 सत्रों के कार्यक्रम में विदिशा के इतिहास से युवाओं को कराया रूबरू

भारतीय संस्कृति और इतिहास से जोड़ने और देश सेवा के लिए प्रेरित करने के मकसद से एसएटीआई में विदिशा यूथ कॉन्क्लेव का आयोजन हुआ। इसमें विदिशा और रायसेन की 12 तहसीलों के 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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