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मंदिर परिसर का मुख्य द्वार दिनभर रहा बंद 6 रेलिंग पर लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतार

एक वर्ष पहले
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मां जानकी के दरबार करीला में रंगपंचमी आयोजित होने वाले मेले में पहला झंडा सिरोंज के ललितपुर के ग्रामीणों द्वारा चढ़ाया जाता है। ललितपुर के ग्रामीण सुबह साढ़े छह बजे ही ध्वज लेकर पैदल ही करीला की ओर रवाना हो गए। कीर्तन करते हुए दो किमी का सफर तय करने के उपरांत ग्रामीणों ने मां जानकी को ध्वज अर्पित किया और इसके बाद स्वयं ही इस ध्वज को मंदिर के शिखर भी लगाया। इसके उपरांत ग्रामीणों ने परिसर में बधाई के रूप में राई नृत्य भी करवाया। रंगपंचमी के दिन सिर्फ यही एक राई मंदिर परिसर में जानकी मैया के समक्ष होती हैै। इसके अलावा अन्य सभी बधाई नृत्य पहाड़ी पर स्थित मैदान में ही होते हैं।

प्रसाद को समीप स्थित मैदान में ही रखवाया गया: मंदिर परिसर का मुख्य द्वार दिनभर बंद ही रहा। इसके अलावा मंदिर के दोनों और स्थित द्वार में से एक में से श्रद्धालु प्रवेश कर रहे मां जानकी और अन्य मंदिरों के दर्शन करने के उपरांत दूसरे में से वापस निकल रहे थे। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तथा उन्हें कतारबद्ध रखने के लिए परिसर में ही रेलिंग के छह मार्ग बनाए गए थे। दिनभर इन सभी रेलिंग में श्रद्धालुओं की कतार लगी रही। यहां पर श्रद्धालु सिर्फ दर्शन ही कर पा रहे थे। प्रसाद को समीप स्थित मैदान में ही रखवाया जा रहा थे।

जाम न लगे इसलिए बनाए थे अलग-अलग मार्ग: करील पहुंच मार्ग पर जाम की स्थिति न बने इसके लिए प्रशासन द्वारा अलग-अलग बायपास मार्ग बनाए गए थे। सिरोंज से पथरिया होते हुए दीपनाखेड़ा मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं को जगथर और सनोटी मार्ग से करीला पहुंचाया जा रहा था। इसी तरह मेहलुआ चौराहे के वाहन चालकों को भी बंगला चौराहे के बजाया ग्रामीण क्षेत्र से निकले बायपास से फरीदपुर पहुंचाते हुए करीला पहाड़ी पर भेजा जा रहा था। बंगला चौराहे से आने वाले वाहनों को बामौरीशाला के बाहरी हिस्से में बनाए गए बायपास से होकर निकाला जा रहा था। ये सभी बायपास खेतों से निकाले गए हैं। इस कारण वाहन चालकों को धूल के गुबार का सामना भी करना पड़ा। बायपास इन सभी मार्गो पर दोपहर 2 बजे के बाद जाम के हालात बन गए।

प्रशासन द्वारा बनाई गई इस व्यवस्था का असर यह हुआ कि दीपनाखेड़ा और बंगला चौराहा सड़क को जोडने वाली बामौरीशाला की सड़क पर पूरी तरह सन्नाटा पड़ा रहा। इस संबंध में दीपनाखेड़ा थाना प्रभारी संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि इस मार्ग का उपयोग मेले से लौट कर आने वाले वाहन चालक कर सकेंगे। पहाड़ी पर स्थित घाटी से उतर कर आने वाले वाहन चालक बामौरीशाला जोड़ से अन्य मार्गों पर पहुंच सकेंगे।

दो किमी क्षेत्र में फैला था जानकी मंदिर का मेला

मंदिर परिसर के आसपास के इलाके से शुरू हुआ मेला परिसर पहाड़ी के आसपास दो किमी क्षेत्र में फैला हुआ था। मेले में सबसे अधिक दुकानें लोहे की कड़ाई की थी। इन दुकानों पर हर आकार की कड़ाई थी। इसके साथ ही मेला परिसर में गृहस्थी, सौंदर्य प्रसाधन और खेल-खिलौनों की दुकानें ज्यादा थी। इन दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी दिखाई दी।

बायपास मार्ग पर लगा जाम लेकिन बामौरीशाला में पसरा सन्नाटा, खेतों पर बने बायपास से निकले


लोकगीतों की धुन पर सारी रात थिरकी नृत्यांगनाएं

मंदिर परिसर के आसपास चल रहे बधाई नृत्यों में नृत्यांगनाएं ढोलक और नगाड़े की थाप पर थिरक रहीं थी। वहीं जो पहाड़ी पर विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पांडालों में नृत्य के लिए डीजे का प्रबंध किया गया था। यहां पर नृत्यांगनाएं डीजे से निकल रहे लोकगीतों की धुन पर सामूहिक रूप से थिरकती दिखाई दे रही थी। मंदिर दर्शन करने के उपरांत लोग बधाई नृत्यों को देखने पहुंच रहे थे।

परिसर के बाहर लगे टीनशेड में दिनभर भक्ताें की कतार लगी रही।

बायपास राेड पर दिनभर वाहनाें की रेलमपेल बनी रही।
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