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सभी कार्य के पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है लेकिन परमात्मा की कृपा अकारण होती है: पं. कृष्ण

Vidisha News - पंडाल में मौजूद श्रोताओं पर श्रीमद् भागवत कथा में भागवत रस की वर्षा होती रही इमलिया गांच में चल रही सात...

Feb 15, 2020, 09:50 AM IST
Vidisha News - mp news there is definitely some reason behind all the work but the grace of god is not without reason pt krishna
पंडाल में मौजूद श्रोताओं पर श्रीमद् भागवत कथा में भागवत रस की वर्षा
होती रही


इमलिया गांच में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन पंडित अंकितकृष्ण तेनगुरिया ने भगवान श्रीराम के जन्म की कथा सुनाई।

विदिशा| इमलिया गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन पंडित अंकित कृष्ण तेनगुरिया ने भगवान श्रीराम के जन्म की कथा सुनाई। महाराज श्री ने कहा कि सभी कार्य के पीछे कोई न कोई कारण अवश्य होता है किन्तु परमात्मा की कृपा अकारण होती है। इसके पीछे कोई कारण नहीं होता है। हमें केवल कर्म की शुद्धता पर बल देने की ज़रुरत होती है। उन्होंने कहा कि जितनी कर्म की शुद्धता होगी। भगवान उतनी ही व्यक्ति पर कृपा करेंगे। कर्मों पर जोर डालते हुए उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में कर्म करना वश में है इसलिए व्यक्ति को कर्म करते रहना चाहिए और सब कर्मों को ईश्वर के अधीन छोड़ देना चाहिए। निश्चित ही प्रभु बहुत दयाल हैं वह समय आने पर कृपा जरूर बरसाते हैं।

पंडाल में मौजूद श्रोताओं पर श्रीमद् भागवत कथा में भागवत रस की वर्षा होती रही। महाराज बटुक ने कथा में आगे श्रीकृष्ण जन्म उत्सव की काथा सुनाई। उन्होंने कहा कि मनुष्य को भगवान कृष्ण की लीलाओं को सुनना गाना चाहिए। इससे मनुष्य में सांसारिक रस समाप्त होकर धार्मिक रस का प्रवाह होता है। महाराज श्री ने श्रीकृष्ण जन्म की लीला का मनोहारी वर्णन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि राजा पारीक्षित से शुकदेव कहते हैं कि संसार का कल्याण करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं और धरती पर जब-जब धर्म की हानि होती है तब तब राक्षसों का वध करने के लिए भगवान प्रगट होते हैं । इसी तरह कंस के अत्याचार को मिटाने के लिए भगवान ने मनुष्य रूप धारण कर धरती पर प्रगट हुए। उन्होंने कारागार में बंद देवकी और वासुदेव पर भगवान की महंती कृपा हुई। जैसे ही भगवान के जन्म की कथा सुनाई भगवान के बाल रुप की एक सुंदर झांकी के दर्शन करने को मिले।

इस अवसर पर गोकुल में आनंद भयो जय कन्हैयालाल की, हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की सहित अनेक भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया। भजनों पर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु झूमकर नाचने लगे। इस अवसर पर कथा स्थल को एक उत्सव की भांति सजाया गया था। मंच सहित पूरे पंडाल में गुब्बारे से सजाया गया था। जैसे घर में बेटा होने पर उत्सव मनाया जाता है वैसे ही सभी लोग उत्सुक थे। माताएं-बहनें पीले वस्त्र धारण कर कथा में शामिल हुई। आचार्य सत्येंद्र महाराज और आकाश दुबे ने बताया कि कथा के पांचवे दिन भगवान की बाल लीलाओं से संबंधित कथा होगी। इस अवसर पर भगवान को 56 भोग लगाया जाएगा। गोवर्धन नाथ की पूजा अर्चना की जाएगी।

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