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जो व्यवहार हम दूसरों से नहीं चाहते, वह हम दूसरों के साथ न करें: आचार्य उदार सागर

Vidisha News - प्यासी है धरती नीर चाहिए, तुलसी के राम, कबीर चाहिए, बारूद पर बैठी इस दुनिया को बस महावीर चाहिए। उपरोक्त उदगार आचार्य...

Dec 04, 2019, 11:05 AM IST
प्यासी है धरती नीर चाहिए, तुलसी के राम, कबीर चाहिए, बारूद पर बैठी इस दुनिया को बस महावीर चाहिए। उपरोक्त उदगार आचार्य उदार सागर महाराज ने स्टेशन माधवगंज चौक पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का सिद्धान्त जियो और जीने दो जिसका उद्देश्य है कि जो व्यवहार हम दूसरों से नहीं चाहते वह हम दूसरे के साथ न करें। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का सिद्धांत अकेले जैनों के लिए नहीं जन जन के लिये है। भगवान महावीर ने सभी के कल्याण के लिये अहिंसा और सत्य का संदेश पूरे विश्व के लिये दिया है। यह संदेश मात्र दीवारों पर लिखने के लिये नहीं दिल पर उतारने के लिये दिया गया है। धर्म वही है जिसमें अहिंसा और करुणा का वास है।

उन्होंने कहा कि यह मयूर पिच्छिका प्राणीमात्र की रक्षा के लिये हमारे हाथों में दी गई है कि इस पिच्छिका से तुम छोटे से छोटे जीव की रक्षा करना। उन्होंने कहा कि इस पिच्छिका का परिवर्तन किया जाता है जिससे वह कोमल पिच्छिका साल भर में खराब हो जाती है। उन्होंने कहा कि यह पिच्छिका जो संयम ग्रहण करेगा उसी को मिलती है। यह मनुष्य जीवन अकेले भोग विलास के लिये नहीं मिला है। जीवन के इन पलों को सार्थक करने के लिये ये सांसें हमको मिली हैं इसलिये हमें अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिये संकल्प के साथ आगे बढ़ें।

पिच्छिका परिवर्तन में पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालु: आचार्य उदार सागर महाराज, मुनि उपशांत सागर महाराज, उपासना मति माताजी,छुल्लिका उत्तीर्ण मति माताजी का पिच्छी परिवर्तन समारोह माधवगंज चौक पर धूमधाम के साथ मनाया गया। इस मौके पर आचार्य उदार सागर महाराज का अवतरण दिवस भी मनाया गया। समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि इस अवसर पर इन्दौर, भोपाल, अशोकनगर, बांसवाड़ा राजस्थान, सागर,बड़ागांव, टीकमगढ़, दमोह, वासा आठनेर, चिचौली आदि तमाम स्थानों से आए सभी श्रद्धालुओं को उन्होंने अपना आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर श्री सकल दिगंबर जैन समाज एवं उनके पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

इस अवसर पर आचार्यश्री का 59 वां जन्म दिवस भी भक्तों ने मनाया। आचार्य उदारसागर महाराज की पुरानी पिच्छिका लेने का सौभाग्य सुमेर चंद्र जैन एवं सुधा जैन परिवार को मिला। वहीं अरविंद जैन और पुष्पा जैन को मुनि उपशांत सागर की पिच्छिका मिली। क्षुल्लिका माताजी की पिच्छिका नरेश जैन और संध्या जैन के परिवार को मिली।

यह संदेश मात्र दीवारों पर लिखने के लिए नहीं, दिल पर उतारने के लिए दिया है

आचार्य मुनि श्री महाराज के प्रवचन सुनते जैन समाज के श्रद्धालु।

णमोकार महामंत्र से हो जाता है उद्धार

इस अवसर पर मुनि उपशांत सागर ने कहा कि णमोकार महामंत्र यदि हमने अच्छे मन से याद कर लिया जाये तो हमारा उद्धार हो जाएगा। उन्होंने कहा यह णमोकार महामंत्र कर्मों की निर्जरा कराने वाला जन्म से लेकर मरण तक हमारी आत्मा का उद्धार करने वाला एवं स्वर्ग और मोक्ष सुख को दिलाने वाला है। यह संयमोत्सव हैं। आप सभी के लिए है। यदि आपने सही मन से ग्रहण किया है तो निश्चित मानना कि आपके जीवन में भी नई पिच्छिका मिलने मिलने का सौभाग्य मिल जाया करता है। उन्होंने कहा कि मेरे जीवन में भी यह अवसर मिला था। मैं जब ब्रम्हचर्य अवस्था में था तो मुझे मुनि गुप्ति सागर महाराज की पिच्छी मिली थी और बहुत जल्द यह अवसर मुझे मिला और मुझे क्षुल्लक दीक्षा के आचार्य विद्यासागरजी महाराज से मिल गई थी।

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