नीरव की फर्म से महंगे गहने खरीदने वाले 50 करोड़पतियों के टैक्स रिटर्न की जांच करेगा आयकर विभाग

पीएनबी घोटाले में एफआईआर दर्ज होने से पहले नीरव मोदी जनवरी में विदेश भाग गया था

DainikBhaskar.com| Last Modified - Jul 14, 2018, 03:45 PM IST

Fifty high net worth individuals face ITRs re-assess for buying Jewellery from Nirav Modi
नीरव की फर्म से महंगे गहने खरीदने वाले 50 करोड़पतियों के टैक्स रिटर्न की जांच करेगा आयकर विभाग
  • आयकर विभाग 50 हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (एचआईएन) के रिटर्न की दोबारा जांच करेगा
  • आयकर विभाग ने इन करोड़पतियों से ज्वेलरी खरीदने में इस्तेमाल पैसे का सोर्स बताने को कहा था 

 

नई दिल्ली. 13 हजार करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले में आरोपी नीरव मोदी की फर्म से ज्वेलरी खरीदने वाले करोड़पतियों पर आयकर विभाग शिकंजा कसने की तैयारी में है। एक आयकर अधिकारी ने बताया कि विभाग 50 से ज्यादा अमीरों के ऐसे टैक्स रिटर्न की दोबारा जांच करेगा, जो उन्होंने असेसमेंट ईयर 2014-15 में दाखिल किए थे।

घोटाले की जांच के दौरान आयकर विभाग को कई दस्तावेज मिले थे। इनसे पता चला कि कई करोड़पतियों ने नीरव से डायमंड ज्वेलरी खरीदी। इसके बाद उन्हें नोटिस भेजकर इनके आय के सोर्स की जानकारी मांगी गई। इनमें से ज्यादातर लोगों ने आयकर विभाग को बताया कि नीरव मोदी को उन्होंने किसी भी तरह का भुगतान नहीं किया। इसके बाद विभाग ने इनके आईटीआर की नए सिरे से जांच करने का फैसला किया। इनमें फिलहाल 50 लोगों के रिटर्न संदिग्ध मिले। आगे इनकी संख्या बढ़ सकती है।

 

लाखों की टैक्स चोरी का खुलासा हो सकता है: आयकर अधिकारी ने कहा, ''टैक्स रिटर्न की जांच में कई लाख नकद भुगतान का खुलासा हो सकता है। ऐसे में करोड़पतियों के खिलाफ टैक्स चोरी के मामले में कार्रवाई की जाएगी। कुछ और ऐसे मामलों की जांच की जा रही है।'' नीरव की फर्म से ज्वेलरी खरीदने वाले रेवाड़ी के एक हॉस्पिटल ग्रुप के ठिकानों पर पिछले दिनों छापेमारी की गई थी। यह ग्रुप स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव के परिवार से जुड़ा है।

 

पीएनबी की मुंबई ब्रांच से उजागर हुआ था घोटाला: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य एजेंसियां पीएनबी घोटाले में हीरा कारोबारी नीरव मोदी, उसके मामा मेहुल चौकसी के खिलाफ जांच कर रही हैं। जनवरी में एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों देश छोड़कर भाग गए थे। दोनों ने बैंक अफसरों के साथ मिलकर 2011 में लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स (एलओयू) के जरिए घोटाले की शुरुआत की थी। इस मामले में कई बैंक अफसरों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

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