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गूगल गुपचुप देख रहा है आपका भविष्य

Dainik Bhaskar

Aug 25, 2018, 11:52 PM IST

सिर्फ लोकेशन ही नहीं, आपके डेटा से कल का अनुमान लगाने में भी है सक्षम

Google is secretly watching your future
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भास्कर न्यूज नेटवर्क. उन दिनों यूरोप के एक देश में सामूहिक दुष्कर्म की वारदातें बढ़ गई थीं। सरकार चिंतित थी। सरकार ने ऐसे लोगों की जानकारी गूगल से मांगी, जो लगातार सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित कंटेंट सर्च कर रहे थे। असल में सरकार इस तरह ऐसे लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही थी। ऐसा भविष्य में होने वाले अपराधों को रोकने के लिए था। सरकार को ऐसे संभावित अपराधियों के बारे में गूगल से कई अहम जानकारियां मिलीं। उस वक्त सरकार के साथ इस काम में जुटे इन्फर्मेशन एंड साइबर सिक्योरिटी कंसल्टेंट अभिषेक धाभाई कहते हैं कि ये तो एक बानगी है। ज्यादा चौंकाने वाला ये है कि यदि गूगल आपकी इंटरनेट से संबंधित गतिविधियों को ट्रैक करे तो वो भविष्य भी बता सकता है। वो भी चंद मिनटों में।
हाल ही में सामने आया कि लोकेशन ऑफ होने के बावजूद गूगल यूजर्स को ट्रैक करता है। लेकिन यह तो मात्र लोकेशन की बात है। गूगल हमारे हर कदम और हर काम को ट्रैक करता है। जैसे यदि कोई यूजर हर शनिवार मुंबई का टिकट कराता है, वहां पर किसी जापानी रेस्त्रां में खाना खाता है, तो गूगल को भविष्य के लिए उसका ट्रेंड पता है। हम जो ई-मेल करते हैं, नई नौकरियों के लिए आवेदन भेजते हैं, ऑनलाइन सामान मंगवाते हैं आदि।


आपके बारे में गूगल को पता है ये बातें
1. नाम 2. जन्मदिन 3. जेंडर 4. मोबाइल नंबर 5. आपके गूगल सर्च 6. जिन वेबसाइट्स पर आप गए 7. आप अभी कहां खड़े हैं 8. पिछले कुछ सालों में आप कहा गए/ रहे हैं। 9. कौन सा गेम, गाना, फिल्में आदि पसंद हैं 10. कहां काम करते हैं 11. कहां रहते हैं। 12. मेल 13. वॉइस रिकॉर्डिंग 14. किन मुद्दों में रुचि है 15. फोटो 16. फोनबुक/ कॉन्टैक्ट्स 17. कौन-कौन से एप इस्तेमाल करते हैं 18. पसंद-नापसंद 19. क्या ज्यादा खरीदते हैं 20. इन दिनों आप कहां व्यस्त हैं।


ऐसे चेक कर सकते हैं आप अपना डेटा
आज तक गूगल ने आपका क्या क्या डेटा लिया है और किसे शेयर किया है वह आप इस लिंक पर जाकर चेक और डाउनलोड कर सकते है: https://takeout.google.com/settings/takeout


ऐसे गूगल करता है 24X7 हमारी निगरानी


1. गूगल के एप्स सर्वर पर भेजते हैं लोकेशन
गूगल की मशीन लेवल प्रोग्रामिंग ऐसी है, जो कंपनी के किसी भी एप के इस्तेमाल करने पर यूजर की लोकेशन को ट्रैक करती है और सर्वर पर भेजती रहती है। गूगल मैप्स, वॉइस, जीमेल, क्रोम आदि सभी एप्स लाेकेशन को ट्रैक करते हैं। इन्हें गूगल सर्वर से साझा करते हैं, इसे हिस्ट्री कहते हैं। इसीलिए आपने लोकेशन बंद भी कर दी तब भी गूगल को पता है कि आप कहां हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार एंड्राॅयड फोन लाेकेशन से संबंधित 40 इनपुट प्रतिघंटा और आईफोन करीब 4 इनपुट प्रतिघंटा भेजते हैं।


2. कुकीज पता करती हैं हम क्या सर्च कर रहे हैं
गूगल को पता है आप इंटरनेट पर क्या खोज रहे हैं। गूगल की कुकीज़ हैं, जो मैक आईडी और आईपी एड्रेस के कॉम्बिनेशन से यह पता कर लेती हैं कि यूजर कौन है। बार-बार एक ही कॉम्बीनेशन आने से यह पता चल जाता है कि आमतौर पर यह व्यक्ति क्या सर्च करता है। इसी तरह यदि आपने जीमेल आईडी से लॉगिन किया हुआ है तो आपकी आईडी से सर्च की गई सभी चीजें गूगल को पता चलती रहती हैं। गूगल आइडेंटीफायर कुकीज़ को भी आपके कंप्यूटर में इंस्टॉल कर देता है।


3. फोटो के साथ डिटेल भी जाती है
हम गूगल के फोटोज़ एप में या क्लाउड में फैमिली फोटो अपलोड कर देते हैं। ये सिक्योर हैं, किसी से शेयर नहीं होती, लेकिन ये गूगल के पास सेव हो जाती है। न सिर्फ फोटो बल्कि फोटो की पूरी डिटेल भी गूगल के पास चली जाती है। जैसे- आपने फोटो को कितना एडिट किया है, किसे टैग किया है, किस शहर में खींचा है, कितने बजे लिया है, फोटो की लाेकेशन क्या है, डिवाइस का सीरियल नंबर क्या है आदि।


4. दूसरे एप भी मांगते हैं इजाजत
हम आए दिन स्मार्टफोन बदलते हैं इसलिए अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट को गूगल से सिंक करके रखते हैं। ताकि नंबर हमेशा ई-मेल पर रहें। इस तरह ये सभी नंबर गूगल के पास पहुंच जाते हैं। इसी तरह जब हम गूगल प्ले स्टोर से कोई एप डाउनलोड करते हैं तब वाे फोटो, कॉन्टैक्ट लिस्ट, माइक्रोफोन, वीडियो आदि का एक्सेस मांगता है, भले ही उस एप के काम करने में इसकी जरूरत न हो। इस तरह फोन का पूरा डेटा एप बनाने वाली कंपनी के पास भी चला जाता है।


5. जानता है आप ट्रेन में हैं या पैदल
यदि आपने अपने फोन से सिम निकाल भी दिया है तब भी वाई-फाई या हॉटस्पॉट से फोन कनेक्ट करते ही गूगल आपकी ट्रैकिंग शुरू कर देगा। ऐसे में अगर हम अलग-अलग जगहों पर जाते हैं तो गूगल हमारे मूवमेंट की स्पीड से यह पता लगा सकता है कि हम पैदल चल रहे हैं या कार में या ट्रेन में। यही नहीं आपके वाई-फाई की स्ट्रेंथ, ब्लूटूथ कनेक्शन की जानकारी, फोन की बैटरी कितनी चार्ज है, फोन चार्जिंग पर लगा है या नहीं आदि जानकारियां भी गूगल के पास जाती रहती हैं।


6. हम कहां जाने वाले हैं वो जानता है
आपने अकसर देखा होगा कि आपकी फ्लाइट बुक हुई और आपके फोन के कैलेंडर में यात्रा का रिमाइंडर आने लगता है। दरअसल, गूगल रोबोटिक एल्गोरिथम पर काम करता है। हमारे पास जो मेल आते हैं उसमें भी कोडिंग होती है। अब जब हमारा ट्रैवेल एजेंट हमें टिकट ई-मेल करता है तो गूगल की एल्गोरिथम मेल के शब्दों से यह पता लगा लेती है कि ये यात्रा का टिकट है। इसके लिए वो मेल में पीएनआर शब्द, यात्रा कहां से कहां की है, शहर का नाम , ट्रैवेल कंपनी का नाम जैसे शब्द आते ही मेल को ट्रैक कर लेता है। इसके बाद वो जानकारी फोन के कैलेंडर में चली जाती है, जहां से हमें यात्रा के नोटिफिकेशन आने लगते हैं। इससे भी पता चलता है कि गूगल की पहुंच हमारे ई-मेल के कंटेंट तक है।


7. हमारी पसंद-नापसंद है उसे पता
हम गूगल से जो भी सर्च करते हैं गूगल अपनी एल्गोरिथम की मदद से उन जानकारियों को ट्रेंड बनाकर कंपनियों को विज्ञापन के लिए बेचती है। जैसे- हमने सर्च किया कि इटैलियन रेस्त्रां इन दिल्ली। अब उसके पास यह जानकारी चली गई कि किसने इटैलियन रेस्त्रां को सर्च किया, किस शहर में किया। अब दिल्ली में इटैलियन रेस्त्रां से संबंधित जो भी विज्ञापन होंगे वो उस यूजर को स्क्रीन पर दिखाई देने लगेंगे। ऐसे करोड़ों यूजर की पसंद-नापसंद को गूगल जानता है।


ऐसे करें अपना डेटा डिलीट
यदि हमें लगता है की हमारी जानकरियां गूगल के पास जा चुकी है और हम उन्हें डिलीट करना चाहे तो हम हमारे अकाउंट के my activity पेज पर जाकर गूगल के अलग-अलग प्रॉडक्ट्स में हमारी जो जानकारियां सेव है वो डिलीट कर सकते है और यदि हम चाहें तो यहीं से गूगल अकाउंट भी डिलीट किया जा सकता है।


गूगल गुपचुप देख रहा है आपका भविष्य
इन सब डेटा को कस्टमाइज़ करके गूगल हमारा प्लान बता सकता है। सर्च हिस्ट्री के ट्रेंड से यह पता चल सकता है कि आप किस चीज की तैयारी में हैं।
(यह स्टोरी अभिषेक धाभाई से बातचीत पर आधारित है, वे कई देशों की सरकारों के साथ काम कर चुके हैं।)

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