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पाकिस्तान की नहर के कारण 13 गांव के खेत बन गए हैं दलदल, किसानों की भूखों मरने की हालत

करोड़ों की जमीन कौड़ियों के भाव में बिक रहीं; पीने का पानी दूषित होने से बच्चे बीमारी की चपेट में

Danik Bhaskar | Sep 09, 2018, 12:04 AM IST

अनूपगढ़ (राजस्थान). पाकिस्तान की सादकी नहर सीमा से सटे भारतीय किसानों के लिए मुसीबत बनी हुई है। नहर कच्ची है और राजस्थान के अनूपगढ़ जिले से सटते 13 गांव इसकी चपेट में हैं। इससे इन गांवों के खेत धीरे-धीरे दलदल में तब्दील हो रहे हैं। पीने का पानी दूषित हो रहा है और बच्चे बीमारी की चपेट में हैं।

भारत के इन गांवों में करीब पांच साल पहले तक खूब पैदावार होती थी, लेकिन अब यहां एक दाना भी नहीं उपजता। इन गांवों के खेतों की चिकनी मिट्टी होने के कारण भी यह स्थिति बेहद भयावह हो गई है। ऐसी हालत में किसानों की करोड़ों की जमीन कौड़ियों के भाव में बिक रही है। दूसरी तरफ किसानों ने कृषि ऋण, ट्रैक्टर व कृषि उपकरणों के लिए जो लोन लिया था, वह उतर नहीं पा रहा है बल्कि हर साल ब्याज जुड़ना शुरू हो गया है। बैंक अब किसानों को उनकी भूमि नीलामी के नोटिस भेज रहे हैं। यहां लोगों की भूखों मरने की नौबत आ गई है। सीमावर्ती गांव 2 व 4 केएएम, 5 केएएम ए व बी, 1 व 2 केबीएम, 10, 11 व 12 एलएसएम, 19, 23 व 24 पीटीडी और व 26 एसजेएम सहित अन्य गांवों की जमीनों का ऐसा ही हाल है। यह समस्या 5 साल पहले शुरू हुई थी, और लगातार बढ़ती जा रही है। अब सेम (दलदल) से फसलें पैदा नहीं हो रही। सहायक निदेशक कृषि (विस्तार) पृथ्वीराज ने बताया कि भारत-पाक सीमा से सटे पाक क्षेत्र में सादगी नहर निकलती है जो कच्ची है। यहां की मिट्टी चिकनी है इसलिए पानी जमीन में नहीं जा पा रहा और ये समस्या पनप गई। यह समस्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।

सालों से खेत में दाना नहीं उपजा : किसान इमीलाल सोनी बताते हैं, 5 वर्ष से खेत में एक दाना भी नहीं उपजा। हर साल फसल बोई तो जाती है पर उपज नहीं हो रही। पूर्व सरपंच और अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के तहसील सचिव भागीरथ शर्मा ने कहा, सरकार को इस और ध्यान देना चाहिए। बीएडीपी की राशि से क्षेत्र में इससे निजात के लिए प्लान बनाया जा सकता है। गांव 4 केएएम निवासी विश्वामित्र बिश्नोई बताते हैं कि उन्होंने 1996 में जमीन खरीदी थी। उस टाइम ₹40,000 प्रति बीघा के हिसाब से जमीन ली थी लेकिन अब ₹10000 प्रति बीघा भी नहीं बिक रही है। नहर के पानी ने हमारी जमीन को कौड़ियों के भाव कर दिया है। 5 केएएम में रहने वाले हरी सिंह मेघवाल ने अपनी जमीन पर बैंक से दो लाख ऋण लिया था लेकिन आज तक चुका नहीं पाए। हरि सिंह बताते हैं की उनका ऋण 3 गुना बढ़ गया है।

इतनी बड़ी है समस्या

- 13 गांवों में पसरी है सेम

- 18 हजार जनसंख्या है प्रभावित
- 06 हजार परिवार हैं पीड़ित
- 1900 हैक्टेयर में पैदावार नहीं