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पीएनबी घोटाले पर चौकसी ने कहा- चुनाव की वजह से मुझे निशाना बनाया, दबाव में है सरकार

देश लौटने के सवाल पर चौकसी ने कहा- जैसे बुरे दिन आए हैं, वैसे ही अच्छे दिन भी आएंगे

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 09:19 PM IST
mehul choksi interview says govt took action against me in pressure

नई दिल्ली/एंटीगुआ. पीएनबी 14 हजार करोड़ की जालसाजी में आरोपी मेहुल चौकसी ने रविवार को कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव की वजह से केंद्र सरकार दबाव में है। चौकसी ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा- घोटाले के लिए बैंकों की ढिलाई जिम्मेदार थी। उन्होंने अपनी कमी छिपाने के लिए मेरा नाम इस मामले में घसीटा। देश लौटने के सवाल पर चौकसी ने कहा- जैसे बुरे दिन आए हैं, वैसे ही अच्छे दिन भी आएंगे।

चौकसी ने कहा- चुनाव आ रहा है इसलिए मुझे निशाना बनाया जा रहा है। सरकार पर दबाव है कि बैंक डिफॉल्टरों में से किसी एक को देश में लाया जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो चुनाव इधर से उधर हो सकता है। मैं अपने प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करता हूं। सरकार पर मेरा विश्वास है। हो सकता है कि ऐसा लाखों-करोड़ों लोगों की भलाई के लिए किया जा रहा हो।

बैंकों ने गड़बड़ियां छिपाने के लिए निशाना बनाया : चौकसी ने कहा- बैंकों के सिस्टम में काफी गड़बड़ियां थीं। रिकॉर्डिंग सिस्टम में भी खराबी थी। अगर सही तरह से सबकुछ होता तो घोटाले के लिए जिम्मेदार लोगों की संख्या काफी ज्यादा हो सकती थी। इनमें बैंक के अधिकारी भी शामिल होते। लेकिन, केवल हम लोगों को निशाना बनाया गया। बैंकों ने अपनी गड़बड़ियां छिपाने के लिए मुझे निशाना बनाया।

एक दिन में मेरा कारोबार ठप हुआ : चौकसी मे कहा, "जब मुझ पर ये आरोप लगाया गया तो मैं चौंक गया था, तब में अमेरिका में था। तीसरे ही दिन बिना जांच के उन्होंने छापे भी शुरू कर दिए थे। मेरा सारा कारोबार एक ही दिन में ठप पड़ गया। मेरे सभी खाते बंद हो गए। पीएनबी मेरा सबसे बड़ा फाइनेंसर था।"

रिटायर होने के बाद भी शिकायत में मेरा नाम : चौकसी ने कहा, "मैं 1998 में एक कंपनी में साझेदार था और 2000 में रिटायर हो गया। जब बैंक के अफसर से पूछा कि मेरा नाम क्यों लिया गया? अफसर ने मुझसे कहा कि हमारी केवाईसी में आपको 1998 में कंपनी का साझेदार बताया जा रहा है इसलिए शिकायत में हमने आपका नाम दिया है। 2000 के बाद में कंपनी से बाहर चला गया और मेरे सारे व्यापारिक संबंध उस कंपनी से खत्म हो गए थे। मैंने 7-8 फरवरी को सेबी और सीबीआई को सूचना दी, तब तक कार्रवाई शुरू हो गई थी। जो भी कुछ हुआ है, वह गैरकानूनी है और मानवाधिकारों के खिलाफ है। मेरी कंपनी बंद करने के बाद उन्होंने बाद में दूसरी एफआईआर फाइल कर दी।

50 साल तक जांच क्यों नहीं हुई : चौकसी ने कहा, "मेरी कंपनी 1964 में बनी, 50 साल पुरानी कंपनी है। इतने साल तक कोई जांच क्यों नहीं हुई। मैंने जो कुछ भी सीखा है, बैंक की ढिलाई की वजह से ये सबकुछ हुआ। बैंकों में एक साल के भीतर 25-30 ऑडिट होते हैं और इतने साल तक मैं बैंक के साथ काम कर रहा हूं, तो कोई रिपोर्ट नहीं आती।"

देश में ऐसा कभी नहीं हुआ : 6 हजार लोग मेरी कंपनी में काम करते थे। रेड पड़ने के बाद सबकुछ मेरी कंपनी में बंद हो गया। बिना जांच के जो कार्रवाई की गई, ऐसा देश में पहले कभी नहीं हुआ। मेरी सरकार से अपील है कि मेरी कंपनी के कर्मचारियों की ग्रैच्युटी उन्हें दें। करीब 600-700 दिव्यांग काम करते हैं, सरकार को उनके भविष्य का ध्यान रखना चाहिए

ईडी ने जो आरोप लगाए वे गलत और बेबुनियाद : इससे पहले न्यूज एजेंसी से बात करते हुए चौकसी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जो भी आरोप लगाए हैं, वे गलत और बेबुनियाद हैं। उन्होंने मेरी संपत्ति गैरकानूनी तरीके से अटैच की है। एंटीगुआ की नागरिकता लेने के सवाल पर चौकसी ने कहा- भारत सरकार ने मेरा पासपोर्ट रद्द कर दिया, जबकि मैं पासपोर्ट की बहाली चाहता था। मुझे पासपोर्ट ऑफिस से एक मेल मिला। इसमें कहा गया था कि भारत के सामने मौजूद सुरक्षा खतरों के चलते मेरा पासपोर्ट निलंबित कर दिया गया है।

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