लोकसभा में बीते 18 साल में पहली बार सबसे ज्यादा काम हुआ; इस मानसून सत्र में सरकार 20 बिल लाई, 12 पास हुए

16वीं लोकसभा में अब तक सबसे ज्यादा विधेयक कानून मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लाए गए

DainikBhaskar.com| Last Modified - Aug 11, 2018, 11:15 AM IST

Monsoon session: Most productive for Lok Sabha since 2000
लोकसभा में बीते 18 साल में पहली बार सबसे ज्यादा काम हुआ; इस मानसून सत्र में सरकार 20 बिल लाई, 12 पास हुए

 

  • मानसून सत्र 18 जुलाई से 10 अगस्त तक चला
  • सत्र में 26% बिल संसदीय समिति को भेजे गए
  • सत्र में 17 बैठकें हुईं, जो 112 घंटे चलीं

नई दिल्ली.  संसद के इस मानसून सत्र में लोकसभा में 2000 के बाद सबसे ज्यादा कामकाज हुआ। सरकार ने 18 जुलाई से 10 अगस्त तक चले इस सत्र में 20 विधेयक पेश किए। इनमें 12 विधेयक पारित हुए। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक, लोकसभा में काम के तय घंटों के मुकाबले 110% और राज्यसभा में 66% काम हुआ, जबकि 2000 में लोकसभा की प्रोडक्टिविटी 91% थी।

रिसर्च के मुताबिक, लोकसभा में 50% और राज्यसभा में 48% समय विधाई कामकाज में खर्च हुआ। यह 16वीं लोकसभा में दोनों सदनों में अब तक का सबसे ज्यादा काम है। वहीं, 2004 के बाद से दूसरा सबसे ज्यादा है। 26% विधेयक संसदीय समिति को भेजे गए। इसकी तुलना में 15वीं लोकसभा में 71% और 14वीं लोकसभा में 60% विधेयक भेजे गए थे। 
16 वीं लोकसभा में प्रश्नकाल की प्रोडक्टिविटी सबसे ज्यादा रही: इस मानसून सत्र में प्रश्नकाल में लोकसभा में 84% और राज्यसभा में 68% प्रोडक्टिविटी रही। 16वीं लोकसभा में यह सबसे ज्यादा है। 16वीं लोकसभा में अब तक सबसे ज्यादा विधेयक कानून मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लाए गए हैं। वहीं, 2015 में वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय द्वारा पेश किए गए थे। 
सत्र में 17 बैठकें हुईं: लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने बताया कि इस मानसून सत्र के दौरान 17 बैठकें हुईं, जो 112 घंटे चलीं। सत्र में सरकार के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव भी लेकर आया। इस पर 11 घंटे 46 मिनट तक चर्चा हुई। सत्र में एससी/एसटी अत्याचार निवारण संशोधन विधेयक 2018, आपराधिक विधि (संशोधन) विधेयक 2018, भगोड़ा आर्थिक अपराधी निवारण विधेयक 2018, मानव तस्करी (निवारण, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक, 2018 और राष्ट्रीय खेलकूद विश्वविद्यालय विधेयक 2018 समेत कई विधेयक पारित हुए।

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