Alert : एस्केलेटर में फंस गया बच्चे का हाथ, दर्द से चीख उठा मासूम, तुरंत ले जाना पड़ा अस्पताल... एक्सपर्ट ने बताया एस्केलेटर पर चढ़ते-उतरते समय कौन सी बातें जरूर करें फॉलो / Alert : एस्केलेटर में फंस गया बच्चे का हाथ, दर्द से चीख उठा मासूम, तुरंत ले जाना पड़ा अस्पताल... एक्सपर्ट ने बताया एस्केलेटर पर चढ़ते-उतरते समय कौन सी बातें जरूर करें फॉलो

dainikbhaskar.com

Oct 13, 2018, 01:55 PM IST

ब्रश, रेलिंग और जोड़ से जुड़ी ये बातें इग्नोर करने पर सुविधा के लिए बना एस्केलेटर ले सकता है जान भी

Escalator Safety Tips

न्यूज डेस्क। उत्तरप्रदेश के आगरा में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर लगे एस्केलेटर में एक बच्चे का हाथ फंस गया। बच्चे के चीखने पर रेलवे कर्मचारी ने तुरंत एस्केलेटर को बंद कर दिया। इसके बाद बच्चे के हाथ को बाहर निकाला गया। अच्छी बात यह रही कि बच्चे का हाथ बच गया है उसे अभी रेलवे के ही हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया है। लिफ्ट, एस्केलेटर में कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं। कुछ सावधानियों का ध्यान न रखा जाए तो यह जान तक ले सकती हैं। हमने ओमेगा एलिवेटर (इंदौर) के इंजीनियर स्वप्निल जोशी ने बात कर जाना कि आखिर एस्केलेटर का यूज करते समय कौन-सी बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए। जिससे हादसे से बचा जा सके।

एक्सपर्ट ने बताया...एस्केलेटर का यूज करते समय क्या ध्यान रखना चाहिए....
- इंजीनियर जोशी ने बताया कि एस्केलेटर में दोनों तरफ सहारे के लिए जो रेलिंग लगी होती है, उसके नीचे ब्रश लगे होते हैं। इनमें थोड़ा-थोड़ा गेप होता है। इसलिए यहां दुपट्टा, साड़ी, कपड़ा या बड़ा गेप है तो हाथ भी फंस सकता है। इसलिए कभी भी एस्केलेटर का यूज करते समय हाथ रेलिंग के नीचे की तरफ लेकर नहीं जाना चाहिए। हाथ को रेलिंग के ऊपर ही रखें।

- अपने कपड़ों, चुनरी, दुपट्टा, साड़ी का ध्यान रखें। एस्केलेटर के गेप में यह फंस सकते हैं।
- एस्केलेटर टू-वे हॉरिजेंटल और थ्री-वे हॉरिजेंटल में भी आते हैं। टू-वे में दो सीढ़ियां एक साथ शुरू होती हैं। बाद में यह सेपरेट स्टेपर में बदल जाती हैं। ऐसे में जरूरी है कि जब आप एस्केलेटर पर चढ़ रहें हों, तब जहां से सीढ़ियां आपस में जुड़ी हों वहां पैर न रखें। ऐसा करने पर सीढ़ियां जब स्टेपर में बदलेंगी तो आप का बैलेंस बिगड़ सकता और आप गिर सकते हैं। अपने पैरों को हमेशा एक ही सीढ़ी के बीचों-बीच रखें।

- 10 साल से कम उम्र के बच्चों को कभी भी अकेला एस्केलेटर पर न चढ़ने दें। बच्चों को गोद में लेकर ही चढ़ाएं और उतारे।
- जनरली एक एस्केलेटर 2.5 प्रति सेकंड में 1 मीटर चलता है। अलग-अलग जगह इसकी स्पीड अलग-अलग होती है। हालांकि ये स्पीड इतनी नहीं होती कि खतरनाक हो। फिर भी कभी एस्केलेटर चलते-चलते रुक जाए तो आपका बैलेंस बिगड़ सकता है। इसलिए रेलिंग का सहारा लेकर ही एस्केलेटर में आना-जाना करें।

- कभी भी बहुत ज्यादा भीड़ हो तो एस्केलेटर का यूज न करें। भीड़ ज्यादा होने पर किसी का भी बैलेंस बिगड़ा तो उसके साथ आप भी हादसे का शिकार हो सकते हैं।

- बच्चों के साथ ही किसी भी बुजुर्ग व्यक्ति को भी एस्केलेटर पर अकेले न जाने दें।
- जिस एस्केलेटर को लेकर मेंटेनेन्स की वॉर्निंग लगी हो, उस पर बंद होने के बाद भी न जाएं। इसमें भी आपके साथ हादसा हो सकता है।

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