आप दोपहर 1 बजे बैंक जाएं या 2.30 बजे, कोई भी बैंक लंच टाइम बोलकर आपको इंतजार करने का नहीं बोल सकता, जानिए क्या है इससे जुड़ा नियम

इस मामले में तो आपको बैंक से मुआवजा पाने का है अधिकार, बस नियम होना चाहिए पता

dainikbhaskar.com

Mar 17, 2019, 11:14 AM IST
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यूटिलिटी डेस्क। एक RTI एक्टिविस्ट ने बैंकों से जुड़ी क्वेरी को लेकर आरबीआई से कुछ सवालों के जवाब मांगे थे। इन प्रश्नों की आरबीआई ने जो जानकारी दी है, वे हर बैंक कस्टमर के लिए फायदेमंद है। यह सवाल उत्तराखंड हल्दवानी के बिजनेसमैन प्रमोद गोल्डी ने आरबीआई से किए थे। हम बता रहे हैं आरबीआई ने इन
सवालों के क्या जवाब दिए।

लंच टाइम का बोलकर काम बंद कर देते हैं

- सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बिना लंच ब्रेक के सेवाएं देना बैंकों से अपेक्षित है। बैंक अधिकारी एक-एक करके लंच कर सकते हैं। इस दौरान नॉर्मल ट्रांजेक्शन चलते रहना चाहिए।

- अधिकतर पब्लिक सेक्टर के बैंकों में लंच टाइम का बोर्ड लगा दिया जाता है। लंच के नाम पर ग्राहक घंटों इंतजार करते हैं। जबकि नियमों के मुताबिक ऐसा नहीं किया जा सकता।

- लंच ब्रेक मे बैंक गेट बंद नहीं कर सकते और कस्टमर्स को बाहर इंतजार करने का नहीं कह सकते।
- काउंटर पर कस्टमर्स को अटेंड करने के लिए हमेशा कोई न कोई होना चाहिए।
- 1111 या 2222 जैसे किसी डिनोमिनेशन में डिपॉजिट लेने से कोई बैंक मना नहीं कर सकता। डिपॉजिट लेने से जुड़ी इस तरह की कोई गाइडलाइन नहीं है।

और कस्टमर को बैंक में क्या अधिकार मिलते हैं

- चेक कलेक्शन में देरी होती है तो कस्टमर को बैंक से मुआवजा पाने का अधिकार है।

- कस्टमर के अकाउंट से हुए अनऑथराइज्ड ट्रांजेक्शन के लिए बैंक ग्राहक को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते।

- सिर्फ परमानेंट एड्रेस न होने चलते कोई भी बैंक आपका अकाउंट ओपन करने से मना नहीं कर सकता।

- कस्टमर्स की निजी जानकारी को गुप्त रखना बैंक की जिम्मेदारी है। बैंक इसे किसी अन्य से शेयर नहीं कर सकता।

- जाति, धर्म, लिंग वगैरह के आधार पर बैंक किसी के साथ भेदभाव नहीं कर सकता।

- कोई भी व्यक्ति NEFT के जरिए 50 हजार रुपए तक की रकम ट्रांसफर कर सकता है।

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