वीवीपैट: मशीन को खराबी से बचाने के लिए नए पेपर रोल का इस्तेमाल, सेंसर भी कवर होगा- चुनाव आयोग

मई में 4 लोकसभा और 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में मशीनों का इस्तेमाल किया गया, इनमें काफी शिकायतें मिली थीं

DainikBhaskar.com| Last Modified - Aug 12, 2018, 09:46 PM IST

Small hood on sensor, new paper roll EC makes changes to prevent VVPAT failures
वीवीपैट: मशीन को खराबी से बचाने के लिए नए पेपर रोल का इस्तेमाल, सेंसर भी कवर होगा- चुनाव आयोग

 

 

- वीवीपैट में इलेक्ट्रो मैकेनिकल पार्ट्स होते हैं, जिन पर नमी असर डालती है

 

नई दिल्ली.  पिछले चुनावों में वीवीपैट मशीनों में आई दिक्कतों को दूर करने के लिए चुनाव आयोग ने इसमें कुछ बदलाव किए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने बताया कि पेपर ट्रायल मशीन में लगे सेंसर के ऊपर ढक्कन लगाए जाएंगे। साथ ही नमी न सोखने वाले पेपर रोल का इस्तेमाल किया जाएगा।

मई में कैराना और गोंदिया समेत 4 लोकसभा और 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में कई जगहों पर वीवीपैट में खराबी की शिकायतें आई थीं। आयोग ने मशीनों में आ रही परेशानियों का पता लगाने के लिए समिति बनाई थी।

 

सेंसर पर सीधे लाइट पड़ने से आई खराबी: रावत ने बताया, "समिति ने जांच में पाया कि इन मशीनों में ज्यादातर दिक्कतें सेंसर पर सीधे लाइट पड़ने से आईं। इसमें इस्तेमाल होने वाली पेपर रोल भी नमी सोखने वाली थी, इस वजह से नतीजों की प्रिंटिंग के वक्त रील सही तरह से घूम नहीं पा रही थी। ईवीएम मशीन इलेक्ट्रॉनिक होती है। इस वजह से इसमें गर्मी और नमी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन, वीवीपैट में इलेक्ट्रो-मैकेनिकल पार्ट्स भी लगे होते हैं इसलिए इन पर गर्मी और नमी का असर पड़ता है।" 

वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपैट) मशीन में वोट डालने के बाद मतदाता स्लिप पर उस पार्टी का निशान देख सकता है, जिसे उसने वोट दिया। मशीन में बनी छोटी स्क्रीन पर यह 7 सेकंड तक दिखती है, इसके बाद यह उसके अंदर लगी पेटी में गिर जाती है। इसे वोटर अपने साथ नहीं ले जा सकता।

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