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तेलंगाना में तेदेपा ने पहली बार कांग्रेस से हाथ मिलाया, लेफ्ट भी साथ; राष्ट्रपति शासन की मांग

तेदेपा 2014 से एनडीए के साथ थी, आंध्र को विशेष पैकेज की मांग पर गठबंधन से अलग हुई

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 11:50 AM IST
Telangana Assembly Election Congress alliance with TDP and CPI

- 36 साल पहले एनटीआर ने कांग्रेस विरोधी नारे पर तेदेपा बनाई थी

- 119 सीटों वाले तेलंगाना में टीआरएस के सबसे ज्यादा 63 विधायक

हैदराबाद. तेलुगू देशम पार्टी ने 1982 में अपने गठन के बाद पहली बार कांग्रेस से हाथ मिलाया है। दोनों ने तेलंगाना में विधानसभा चुनाव साथ लड़ने का फैसला किया है। लेफ्ट भी उनके साथ है। तीनों पार्टियों के नेताओं ने मंगलवार को पहले दौर की बैठक के बाद राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन से मुलाकात की और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख और कार्यवाहक मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने पिछले दिनों विधानसभा भंग कर दी थी। ऐसा कहा जा रहा है कि राज्य में दिसंबर तक चुनाव हो सकते हैं।

कांग्रेस, तेदेपा और लेफ्ट के नेताओं का कहना है कि चंद्रशेखर राव राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकते। राष्ट्रपति शासन के बाद ही राज्य में चुनाव कराए जाएं। कांग्रेस नेता उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा- "हम टीआरएस और भाजपा को हराने करने के लिए सभी विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, अभी सीटों के बंटवारे पर बात होना बाकी है।" कांग्रेस के तेलंगाना प्रभारी आरसी खुंटिया ने कहा- "तेदेपा से हमारी कभी कड़वाहट नहीं रही।" तेदेपा आंध्र को विशेष पैकेज की मांग पर एनडीए से अलग हो गई थी। नायडू पिछले दिनों कई मौकों पर कांग्रेस के साथ नजर आए।

केसीआर ने विधानसभा भंग की : आंध्र प्रदेश से अलग होने के बाद तेलंगाना में पहला विधानसभा चुनाव मई 2014 में हुआ था। ऐसे में विधानसभा का कार्यकाल मई 2019 में पूरा होता है। लेकिन मुख्यमंत्री राव चाहते हैं कि साल के अंत में होने वाले 4 राज्यों के चुनाव के साथ ही तेलंगाना में भी चुनाव कराए जाएं। राव ने जल्द चुनाव कराने के लिए 6 सितंबर को विधानसभा भंग कर दी थी। विपक्षी दलों ने टीआरएस के इस फैसले को लोकतंत्र के खिलाफ बताया था। कहा था कि टीआरएस का फैसला जनता की भावनाओं के खिलाफ है।

35 साल में पहली बार तेदेपा कांग्रेस के साथ : तेलुगू देशम पार्टी के 35 साल के इतिहास में यह पहला मौका है, जब उसने किसी राज्य में कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया है। टीआरएस ने विधानसभा भंग करने के कुछ देर बाद 105 उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी थी। उधर, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इलेक्शन कमीशन से जल्द चुनाव नहीं कराने की मांग की है। ओवैसी ने कहा कि राज्य की जनता अभी सरकार चाहती है।

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