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समलैंगिकता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद खुशियां मनाने वाली LGBT कम्यूनिटी क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने अाईपीसी की धारा 377 के एक हिस्से को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है।

Danik Bhaskar | Sep 06, 2018, 02:41 PM IST
जिनके मन में अपनी पहचान और शार जिनके मन में अपनी पहचान और शार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि अगर ‘दो बालिग सहमति से कमरे के अंदर शारीरिक संबंध बनाते हैं तो यह अपराध नहीं है। इसके बाद से देशभर के LGBT (समलैंगिकों) में उत्साह है और वो खुशी मना रहे हैं।इस फैसले से खुश LGBT कौन हैं? क्या आप इस कम्यूनिटी के बारे में जानते हैं? आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर LGBT होता क्या है? और इसमें कौन से लोग इसमें शामिल हैं?

समलैंगिकता क्या है?
इसका अर्थ होता है किसी भी व्यक्ति का समान लिंग के व्यक्ति के प्रति यौन आकर्षण। साधारण भाषा में किसी पुरुष का पुरुष के प्रति या महिला का महिला के प्रति आकर्षण। ऐसे लोगों को अंग्रेजी में ‘गे’ या ‘लेस्बियन’ कहा जाता है।

अब कुछ लोग ऐसे लोग भी हैं जो समान लिंग और विपरीत लिंग, दोनों के प्रति आकर्षित होते हैं। इन सभी के बीच क्या फर्क है इसको ऐसे समझ सकते हैं।

LGBT में L का मतबल
L - लेस्बियन। यानी एक महिला या लड़की का समान लिंग के प्रति आकर्षण। इसमें दोनों पार्टनर महिला ही होती हैं। कई बार किसी एक पार्टनर का लुक, पर्सनालिटी पुरुष जैसी हो सकती है या नहीं भी हो सकती है।

G का मतबल
G - ‘गे’। जब एक आदमी को एक और आदमी से ही प्यार हो तो उन्हें ‘गे’ कहते हैं। ‘गे’ शब्द का इस्तेमाल कई बार पूरे समलैंगिक समुदाय के लिए किया जाता है, जिसमें ‘लेस्बियन’, ‘गे’, ‘बाइसेक्सुअल’ सभी आ जाते हैं।

B का मतबल

B - ‘बाईसेक्सुअल’। जब किसी मर्द या औरत को मर्द और औरत दोनों से ही प्यार हो और यौन संबंध भी बनाते हों तो उन्हें ‘बाईसेक्सुअल’ कहते हैं। मर्द और औरत दोनों ही ‘बाईसेक्सुअल’ हो सकते हैं। दरअसल एक इंसान की शारीरिक चाहत तय करती है कि वो L है G है या फिर B है।

T का मतबल
T- मतलब। ‘ट्रांसजेंडर’। वह इंसान जिनका शरीर पैदा होते समय कुछ और था और वह बड़ा होकर खुद को एकदम उलट महसूस करने लगे। जैसे कि पैदा होने के वक्त बच्चे के निजी अंग पुरुषों के थे और उसका नाम लड़के वाला था मगर कुछ समय बाद उसने खुद को पाया कि वो तो लड़की जैसा महसूस करता है। इस पर कुछ लोग लिंग परिवर्तन भी कराते हैं। लड़के लड़कियों वाले हार्मोंस डलवा लेते हैं जिससे स्तन उभर आते हैं। ये लोग ‘ट्रांसजेंडर’ हैं। इसी तरह औरत भी मर्द जैसा महसूस करती है तो वो मर्दों की तरह लगने के लिए चिकित्सा का सहारा लेती है। वह भी‘ट्रांसजेंडर’ है।


Q का क्या मतलब है ?
Q का मतलब है ‘क्वीयर’। ऐसे इंसान जो न अपनी पहचान तय कर पाए हैं न ही शारीरिक चाहत। मतलब ये लोग खुद को न आदमी, औरत या ‘ट्रांसजेंडर’ मानते हैं और न ही ‘लेस्बियन’, ‘गे’ या ‘बाईसेक्सुअल’, उन्हें ‘क्वीयर’ कहते हैं। ‘क्वीयर’ के ‘Q’ को ‘क्वेश्चनिंग’ भी समझा जाता है यानी वो जिनके मन में अपनी पहचान और शारीरिक चाहत पर अभी भी बहुत सवाल हैं।