विधेयक / सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती



10 Percent Quota For Economically weak Challenged In Supreme Court
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10 Percent Quota For Economically weak Challenged In Supreme Court

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2019, 03:28 PM IST

नई दिल्ली. सवर्णों को नौकरियों और शिक्षा में आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण देने से जुड़े विधेयक को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। यूथ फॉर इक्वैलिटी नाम के एनजीओ ने कोर्ट में याचिका दायर की है। एक दिन पहले ही सरकार ने राज्यसभा में इससे जुड़ा 124वां संविधान संशोधन विधेयक पास कराया था।

 

विधेयक अभी मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाना है। मंजूरी मिलने के बाद ही विधि मंत्रालय इसे अधिसूचित करेगा, लेकिन अभी विधेयक के कानून बनने में रोड़ा अटक सकता है।

 

कानून बनने के बाद कुल आरक्षण 49.5% से बढ़कर 59.5% हो जाएगा

 

वर्ग मौजूदा आरक्षण नया आरक्षण
ओबीसी 27% 27%
एससी 15% 15%
एसटी 7.5% 7.5%
सवर्ण -- 10%
कुल 49.5% 59.5%

 

 

6 मौके ऐसे भी आए, जब कोर्ट ने संशोधन को असंवैधानिक ठहराया 
1950 के बाद यह संविधान का 124वां संशोधन बिल है। छह मौके ऐसे भी आए, जब सुप्रीम कोर्ट को लगा कि संविधान में किया गया संशोधन असंवैधानिक हैं। इसलिए बिल निरस्त कर दिए गए। ताजा उदाहरण जजों की नियुक्ति के लिए आयोग के गठन का है। सरकार ने अप्रैल 2015 में इसके लिए संविधान में संशोधन किया था। अक्टूबर 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कॉलेजियम प्रणाली बहाल कर दी थी।

 

165 सांसदों ने की थी विधेयक के पक्ष में वोटिंग

राज्यसभा में बुधवार को करीब 8 घंटे चर्चा हुई और 30 से ज्यादा नेताओं ने अपनी बात रखी। लगभग हर एनडीए विरोधी दल ने बिल का विरोध करते हुए सरकार से तीखे सवाल किए, लेकिन चर्चा के बाद इसके पक्ष में वोटिंग की। 165 सांसदाें ने बिल के पक्ष में और 7 सदस्यों ने इसके खिलाफ वोटिंग की।

 

सरकार ने कहा- राज्य आय सीमा घटा-बढ़ा सकते हैं

चर्चा के दौरान कांग्रेस सदस्य कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर 8 लाख रुपए कमाने वाला गरीब है तो सरकार को 8 लाख तक की कमाई पर इनकम टैक्स भी माफ कर देना चाहिए। इस पर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राज्य चाहें तो 8 लाख रुपए की सीमा को घटा-बढ़ा सकते हैं। यह आरक्षण राज्य सरकारों की नौकरियों और कॉलेजों पर भी लागू होगा। 

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