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  • 16 day old girl, had a tumor of 4 kg, in her head, with only 1% expected to survive; New life found, after 5 hours of su

सूरत / 16 दिन की बच्ची के सिर में 4 किलो का ट्यूमर था, 5 घंटे की सर्जरी के बाद नई जिंदगी मिली

बच्ची की सर्जरी के पहले और बाद की तस्वीर। बच्ची की सर्जरी के पहले और बाद की तस्वीर।
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बच्ची की सर्जरी के पहले और बाद की तस्वीर।बच्ची की सर्जरी के पहले और बाद की तस्वीर।

  • अयोध्या की बच्ची की सर्जरी सूरत के सरकारी अस्पताल में हुई, 1 लाख केस में से किसी एक में ऐसा होता है
  • ऑक्सीपिटन मेनिंगोमायसील ट्यूमर था, इस ट्यूमर से दिमाग और ब्रेन स्टेम जुड़े थे
  • सर्जरी में बच्ची के बचने की सिर्फ एक फीसदी ही उम्मीद थी

दैनिक भास्कर

Oct 19, 2019, 04:15 PM IST

सूरत. सूरत में सिविल अस्पताल के डॉक्टर्स ने 16 दिन की नवजात बच्ची की जटिल सर्जरी कर उसे नई जिंदगी दी। बच्ची का जन्म उत्तर प्रदेश में अयोध्या के अस्पताल में हुआ, लेकिन उसे लखनऊ तक में भी इलाज नहीं मिल सका। इस कारण उसे सूरत के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। न्यूरोसर्जन डॉ. जिगर शाह ने बताया कि बच्ची को जन्म से ही ट्यूमर था, जो रोजाना बढ़ रहा था।

16 दिन में ट्यूमर का वजन बढ़कर चार किलो का हो गया था। ट्यूमर के साथ बच्ची का दिमाग भी बाहर आ रहा था। लेकिन डॉक्टर्स की टीम ने पांच घंटे की जटिल सर्जरी कर ट्यूमर को निकाल दिया और नवजात को नई जिंदगी दी।

 

अभी बच्ची एनआईसीयू में

अभी बच्ची एनआईसीयू में है और स्वस्थ है। डॉक्टरों ने कहा- सर्जरी में बच्ची के बचने की सिर्फ एक फीसदी ही उम्मीद थी। उसे बचाने में हम सफल रहे। बच्ची के पिता राहुल मिश्रा ने बताया कि निजी अस्पताल में इस सर्जरी के पांच लाख रुपए मांग रहे थे। लेकिन यह सर्जरी मामूली खर्च में ही हो गई।

 

दिमाग का हिस्सा ट्यूमर के साथ बाहर आ रहा था
डॉ. जिगर शाह ने बताया कि ऑक्सीपिटन मेनिंगोमायसील ट्यूमर जन्म से ही होता है। करीब एक लाख केस में ऐसा एक मामला सामने आता है। ट्यूमर से ब्रेन स्टेम जुड़ गए थे। इसके अलावा दिमाग के जरूरी पार्ट्स भी इससे जुड़ते जा रहे थे। इससे दिमाग का हिस्सा ट्यूमर के साथ बाहर आता जा रहा था।

 

देर होती तो दिमाग ट्यूमर में चला जाता

डॉक्टरों ने कहा, यदि कुछ दिन बाद ऑपरेशन होता तो दिमाग पूरी तरह से ट्यूमर में चला जाता। सर्जरी के दौरान सिर के एक-एक लेयर खोलकर फालतू टिशू काटकर बाहर निकाले। इससे ब्रेन स्टेम का हिस्सा सुरक्षित बच गया और मासूम को नई जिंदगी मिल गई।

 

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