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पिछले 6 साल में पशुधन में आई कमी:20वें पशुधन सर्वे में देसी नस्ल की गाय 73.5% रह गईं, विदेशी नस्ल की गायों की संख्या बढ़ी

4 दिन पहले
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देश में देसी नस्ल की गायों की संख्या पिछले 6 साल में 5.5% घटी है। 2013 में हुए 19वें पशुधन सर्वे में देश में 79% देसी नस्लें थीं। 2019 के 20वें पशुधन सर्वे में देसी नस्ल की गाय 73.5% रह गईं। पशुधन में गाय ही घटी हैं। 19वें सर्वे में गायें 37.3% थीं, जो 20वें सर्वे में 36% पर आ गया।

पशुपालन मंत्रालय ने गुरुवार को 20वें लाइवस्टॉक (पशुधन) सर्वे की नस्लवार रिपोर्ट जारी की। इसमें 41 देसी और 4 विदेशी नस्लों के गोधन का सर्वे किया गया, जबकि 19वें सर्वे में 37 देसी और 4 विदेशी नस्लों का सर्वे हुआ था।

19वें सर्वे में हरियाणा नस्ल की गाय संख्या के लिहाज से पहले नंबर पर थीं। कुल गायों में उनकी संख्या 4.15% थी, जो 20वें सर्वे में घटकर केवल 1.9% रह गई। हरियाणा नस्ल की 41.5% गाय उत्तर प्रदेश, 20.6% हरियाणा और 8.5% राजस्थान में हैं।

प्रमुख राज्यों के गायों का हाल
गिर नस्ल की गायें 4.8% की भागीदारी के साथ नंबर-1 पर हैं। पिछले सर्वे में गिर गायें 3.4% थीं। सबसे अधिक 34.7% गिर गाय पश्चिम बंगाल में हैं। 25.6% गुजरात और 15.2% राजस्थान में हैं। साहीवाल गायों की संख्या करीब 22% बढ़ी है। ये नस्ल सबसे अधिक 44.2% पश्चिम बंगाल में है, जबकि उत्तर प्रदेश में 28.7%, छत्तीसगढ़ और बिहार में 6-6% से कुछ ज्यादा और पंजाब में केवल 1.5% है।

असम की लखीमी नस्ल की गाय दूसरे पायदान पर है, जबकि पिछले सर्वे के 37 नस्लों में वह शामिल ही नहीं थी। नए सर्वे में कुल गोधन में लखीमी गाय की भागीदारी 4.8% है। बिहार और झारखंड में पाई जाने वाली बच्चौर नस्ल की गायों की संख्या करीब तीन गुना बढ़ी है। इनमें से 77% झारखंड और 23% बिहार में हैं।

गुजरात, राजस्थान की कांकरेज नस्ल की गायों की संख्या 2% से घटकर 1.6% रह गई है। राजस्थान की राठी नस्ल की गायों की संख्या 4 लाख की कमी आई है। हालांकि गायों की संख्या में हिस्सेदारी 0.8% बरकरार है।