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  • 27th anniversary of demolition of disputed structure: Sangh preparing to expand the scope of Hindutva on the pretext of literature of Nobel laureate Naipaul

पहल / विवादित ढांचा गिराने की 27वीं बरसी: नोबेल विजेता नायपॉल के साहित्य के बहाने हिंदुत्व का दायरा बढ़ाने की तैयारी में संघ

नायपॉल ने कहा था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण भारतीय संस्कृति पर हमला था, जिसे ढहाकर सही किया गया। -फाइल फोटो नायपॉल ने कहा था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण भारतीय संस्कृति पर हमला था, जिसे ढहाकर सही किया गया। -फाइल फोटो
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नायपॉल ने कहा था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण भारतीय संस्कृति पर हमला था, जिसे ढहाकर सही किया गया। -फाइल फोटोनायपॉल ने कहा था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण भारतीय संस्कृति पर हमला था, जिसे ढहाकर सही किया गया। -फाइल फोटो

  • 6 दिसंबर को इंस्टीट्यूट फॉर नरचरिंग इंडियन इंटलेक्ट के बैनर तले नोबेल विजेता वीएस नायपॉल के साहित्य पर परिचर्चा रखी गई
  • अब आरएसएस ने नायपॉल को अपने विचारों के पोषक और प्रचारक के रूप में स्थापित-प्रचारित करने की तैयारी की
  • वीएस नायपॉल ने कहा था- जिस तरह स्पेन ने अपने राष्ट्रीय स्मारकों का पुनर्निर्माण कराया है, वैसा ही भारत में भी होना चाहिए

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2019, 02:51 PM IST

नई दिल्ली (संतोष कुमार). राम मंदिर आंदोलन की लड़ाई जीतने के बाद अब संघ की नजर अपने दायरे से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय होने की है। 6 दिसंबर को विवादित ढांचा ढहाए जाने की 27वीं बरसी है। इस मौके पर संघ से जुड़े युवाओं के संगठन इंस्टीट्यूट फॉर नरचरिंग इंडियन इंटलेक्ट (आईएनआईआई) के बैनर तले दिल्ली में नोबेल विजेता वीएस नायपॉल के साहित्य पर परिचर्चा रखी गई है। अब तक संघ के महापुरुषों की श्रेणी में दयानंद सरस्वती, विवेकानंद, विनायक सावरकर, हेडगेवार, गोलवलकर ही रहे हैं।

लेकिन इस बार संघ ने नायपॉल को अपने विचारों के पोषक और प्रचारक के रूप में स्थापित-प्रचारित करने की पूरी तैयारी कर ली है। कार्यक्रम का नाम ‘हिंदू धर्म के महान सपूत- नोबेल विजेता नायपॉल की याद में’ रखा गया है। इसमें संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार, राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी, गंगा महासभा और अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री जीतेंद्रानंद सरस्वती और लंदन में नॉयपाल पर शोध करने वाले डॉ. राजीव मिश्र शिरकत करेंगे। 

नायपॉल ने विवादित ढांचा ढहाने का समर्थन किया था
नायपॉल ने कहा था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण भारतीय संस्कृति पर हमला था, जिसे ढहाकर सही किया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि जिस तरह स्पेन ने अपने राष्ट्रीय स्मारकों का पुनर्निर्माण कराया है, वैसा ही भारत में भी होना चाहिए। उन्होंने इस्लाम को ईसाईयत से ज्यादा खतरनाक बताया था।

‘हिंदू विचारधारा के आदर्शों में नायपॉल भी शामिल’
आईएनआईआई से जुड़े अभिजीत कुमार सिंह का कहना है, ‘‘संघ के स्वयंसेवक के नाते हम इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं। इसकी परिकल्पना गंगा महासभा में इसी साल फरवरी में की गई थी। वामपंथियों ने लगातार युवाओं को गुमराह किया है। हिंदू विचारधारा से जुड़े आदर्शों में नायपॉल भी शामिल हैं।’’

मंदिर आंदोलन से जुड़े एक वरिष्ठ नेता का कहना है, ‘‘कार्यक्रम भले ही नायपॉल के साहित्य पर चर्चा के नाम पर आयोजित किया जा रहा हो, पर परदे के पीछे का सच यही है कि संघ की मंशा नायपॉल के विचारों के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की है। जब बाबरी मसले पर भाजपा और संघ के कई नेता असहज महसूस करते थे, तब नायपॉल ने इसे सही ठहराया था। अब संघ चाहता है कि जिस तरह से मुट्‌ठीभर वामपंथी बुद्धिजीवी एक बहस खड़ी कर देते हैं, उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाए।

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