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मासूम को बचाने की आंखों देखी / चारों तरफ से फायरिंग हो रही थी, आतंकी मस्जिद की ऊपरी मंजिलों से गोली चला रहे थे; बच्चे को बचाना सबसे बड़ा चैलेंज था

सोपोर में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में बचाया गया मासूम अब अपने घरवालों के बीच पहुंच गया है। - सभी फोटो: आबिद बट
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  • सोपोर आतंकी हमले में 1 जवान शहीद हुआ, 1 नागरिक की भी मौत हो गई
  • 302 कोबरा बटालियन का हिस्सा रह चुके कमांडो पवन चौबे ने बचाई मासूम की जान

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 09:03 PM IST

श्रीनगर. कश्मीर के सोपोर में हुए आतंकी हमले में तीन साल का मासूम बच्चा बाल-बाल बच गया। अब वह महफूज है और मां-पिता की गोद में है। हालांकि, हमले में उसके दादा की मौत हो गई। गोलीबारी के दौरान वह बच्चा दादा की लाश के पास रोता हुआ बैठा था। सुरक्षा बल के जवान उसे बचाकर निकाल लाए। मासूम उम्र है, इसलिए मौत, मातम और दर्द जैसे अहसास अभी उस पर तारी नहीं हैं। वह अपनी दुनिया में पहुंचकर मुस्कुरा रहा है। पर जब हर तरफ गोलियां चल रही थीं तो इस बच्चे को बचाना बेहद चुनौती भरा था।

गाड़ियां लगा दीं, ताकि आतंकियों का व्यू रोका जा सके- सुरक्षा बल

सुरक्षा बल के जवान इम्तियाज हुसैन ने बताया- सुरक्षाबलों के हमारे तीन जवान खून में लथपथ थे। हमें उन्हें उठाना था। तभी एक सिविलियन को भी हमें उठाना था। वह भी जख्मी था। हमारे लिए सबसे विचलित करने वाला नजारा तब था, जब हमने देखा कि ढाई-तीन साल का बच्चा वहां पर रोते हुए इर्द-गिर्द घूम रहा है।

उस वक्त सामने की तरफ से फायरिंग हो रही थी। आतंकी मस्जिद की ऊपर वाली मंजिलों से फायरिंग कर रहे थे। हमारे सामने सबसे पहले चुनौती थी कि आतंकियों का व्यू ब्लॉक किया जाए ताकि बच्चे को वहां से उठाया जा सके। इसके बाद हमने सारी गाड़ियां वहां लगा दीं।

यह हमारे लिए सबसे चैलेंजिंग था। बच्चा अपने दादा के साथ कार से जा रहा था। सामने की तरफ से जब फायरिंग हुई तो हमारे तीन जवान घायल हुए और गाड़ी में जा रहे बच्चे के दादा को गोली लगी। उस वक्त कई लोग अपनी गाड़ियां छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए।

सीआरपीएफ के कोबरा कमांडो ने किया रेस्क्यू

मासूम की जान बचाने वाले सीआरपीएफ के जवान का नाम पवन कुमार चौबे है। वह एक कोबरा कमांडो हैं। चौबे ने 2010 में सीआरपीएफ ज्वाइन की थी और 2016 से ही वे कश्मीर में कई ऑपरेशन का हिस्सा रह चुके हैं। 

सीआरपीएफ के अधिकारी ने बताया- वाराणसी का रहने वाला पवन जम्मू-कश्मीर में आने से पहले 203 कोबरा बटालियन का हिस्सा था। यह बटालियन खासतौर पर नक्सलवाद को खत्म करने के लिए बनाई गई है। पवन ने वहां काफी अच्छा काम किया। पवन ने जब मासूम बच्चे को गोलियों में घिरा देखा तो वह उसके करीब गया, कवर लिया। पवन ने बच्चे को अपनी तरफ बुलाने की कोशिश की और फिर उसे वहां से उठाकर ले गया।

परिवार के साथ तीन साल का मासूम।
सुरक्षा बलों ने जिस बच्चे को बचाया, वह अब अपने परिवार वालों के साथ है।
बच्चे के घर सुरक्षित पहुंचने पर इस तरह से महिला ने उसे दुलार किया।
बच्चा तो बच गया, लेकिन उसके दादा की मौत के गम से सभी की आंखें नम हो गईं।
अपने को आतंकी हमले में खोने के बाद ये बच्ची और महिला बिलखकर रोने लगीं। 
आतंकी हमले में मारे गए नागरिक के जनाजे में शामिल लोग।
हमले में मारे गए नागरिक को आखिरी विदाई देते लोग।
बच्चे के साथ परिजन।

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