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दिल्ली की जानलेवा इमारत का गुनहगार कौन:बिल्डिंग में 300 लोग काम करते थे, लेकिन आग बुझाने के उपकरण नदारद; फायर NOC भी नहीं थी

नई दिल्ली8 दिन पहले

दिल्ली के मुंडका मेट्रो स्टेशन के समीप शुक्रवार सांय पांच बजे के लगभग एक कॉमर्शियल इमारत में आग लगने से 27 लोगों की जान चली गई। इस इमारत में CCTV बनाने का काम चल रहा था, जिन्हें पैक करने की जिम्मेदारी महिला कर्मचारियों की थी। सवाल यह है कि इतनी बड़ी लापरवाही का जिम्मेदार कौन था? इसकी पड़ताल से पहले एक नजर घटना पर...

शुक्रवार को अचानक हुए शॉर्ट सर्किट से लगी आग में पूरी इमारत को चंद मिनटों में अपनी गिरफ्त में ले लिया और लोगों में अफरातफरी मच गई। शोर सुनकर स्थानीय लोगों ने मदद का हाथ बढ़ाया और अंदर फंसे लगभग सौ लोगों को सुरक्षित निकाला। जब लोग आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे, उसी समय आग भड़क गई और करीब 7 घंटे की लंबी मशक्कत के बाद 100 दमकल कर्मचारी और 27 से फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने इस पर काबू पाया।

नियमों को ताक पर रखकर चल रही थी फैक्ट्री
देश की राजधानी दिल्ली में नियमों को ताक पर रखकर ये फैक्ट्री चल रही थी। इस इमारत में ना कोई अग्नि सुरक्षा यंत्र लगाए गए थे और न ही फायर विभाग से कोई NOC ली गई थी। इमारत में अंदर और बाहर जाने के लिए एक छोटी सीढ़ी बनाई गई थी, जिसके कारण इतने लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

स्थानीय लोगों की मानें तो 5 मंजिला इमारत के मालिक ने हर फ्लोर अलग-अलग लोगों को किराया पर दिया हुआ था। इमारत में 250-300 लोग रोज काम करने पहुंचते थे, लेकिन इतनी तादाद में काम करने वाले लोगों को मालिकों की तरफ से पहचान पत्र तक नहीं दिया गया था। वहीं, ESI, PF जैसा कोई रूल भी फॉलो नहीं किया था।

क्या कहते है फ़ायर विभाग के नोडल अधिकारी
आग बुझाने पहुंचे फायर विभाग के नोडल अफसर सतपाल भारद्वाज का कहना है कि उन्हें 5 बजे के लगभग आग की सूचना मिली थी। आग इतनी भयानक थी कि उन्हें छह घंटे से ज्यादा वक्त उस पर काबू पाने में लग गया। इसी वजह से हादसे में 27 लोगों की जान चली गई और लगभग 14-15 लोग घायल हुए। इमारत में कहीं भी अग्निशमन यंत्र नहीं लगाये गए थे और न ही फायर विभाग से इमारत के लिए NOC ली गई थी। आग पर काबू पाने के लिए फायर विभाग के सौ कर्मचारी और दो दर्जन गाड़ियों को मौके पर काम करना पड़ा।

रात बीतने के बाद भी अपनों की तलाश में परिजन
इस घटना के बाद पहुँची फायर ब्रिगेड ने घायलों को सबसे पहले संजय गांधी हॉस्पिटल पहुंचाया और शवों को हॉस्पिटल की मॉर्चुरी में रखवाया। खबर मिलते ही फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों के परिजन का जमावड़ा लग गया। हर कोई अपनी मां-बहन या पत्नी को तलाश रहा था, लेकिन किसी को कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा था।

इमारत मालिक के खिलाफ पुलिस ने की कार्यवाही
पुलिस ने इमारत के मालिक के खिलाफ कई धाराओं में मुक़दमा दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है जानकारों की मानें तो इस हादसे में इमारत के मालिक के परिजन की भी जान जाने की सूचना है।

DCP समीर शर्मा ने बताया कि अभी इस मामले की जांच जारी है।

इमारत में लगी आग कितनी भयानक थी
घटना स्थल पर मौजूद चश्मदीदों की मानें तो आग की लपटें इतनी भयानक थीं कि कोई भी पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। चंद मिनटों में आग ने पूरी इमारत को अपनी गिरफ्त में ले लिया और देखते ही देखते इमारत के बाहर लगी लोहे की रेलिंग भी आग की लपटों में पिघल कर मुड गई।

तीन साल में दिल्ली में आग से कुल कितने हादसे हुए
दिल्ली में पिछले तीन साल में हुई आगजनी की घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 184 है। इनमें दो दमकल कर्मचारी भी शामिल हैं।