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  • 40 Years Ago, The Moving Train Was Buried In The Bagmati River In Bihar, The Bodies Of Hundreds Of People Have Not Been Found Till Date.

आज का इतिहास:40 साल पहले बिहार में बागमती नदी में समा गई थी चलती ट्रेन, सैकड़ों लोगों की आज तक लाश भी नहीं मिली

12 दिन पहले
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6 जून 1981 को बिहार के मानसी स्टेशन से एक ट्रेन सहरसा जा रही थी। ट्रेन में 1 हजार से ज्यादा लोग सवार थे। रास्ते में बारिश होने लगी तो यात्रियों ने खिड़की-दरवाजे बंद कर लिए और ट्रेन के अंदर ही सफर खत्म होने का इंतजार करने लगे। ट्रेन बागमती नदी के पुल से गुजर रही थी तभी अचानक से एक झटका लगा। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता ट्रेन के 7 डिब्बे पुल से नदी में जा गिरे।

बरसात की वजह से लबालब भरी बागमती ने सातों डिब्बों को अपने अंदर समा लिया। मरने वालों की सही संख्या आज तक पता नहीं है। कुछ लोग दबकर मर गए तो कुछ लोग डूबकर। जिन्हें तैरना आता था वे ट्रेन से बाहर ही नहीं आ पाए और जो बाहर आ पाए वो नदी के बहाव में बह गए। यानी मौत से बचने का कोई रास्ता ही नहीं था।

6 जून 1981 को बागमती नदी के पुल से गुजर रही ट्रेन के 7 डिब्बे नदी में जा गिरे।
6 जून 1981 को बागमती नदी के पुल से गुजर रही ट्रेन के 7 डिब्बे नदी में जा गिरे।

ट्रेन नदी में क्यों गिरी इसके पीछे 2 वजहें बताई जाती हैं। पहली ये कि ट्रेन के सामने गाय या भैंस आ गई थी, जिसे बचाने के लिए ड्राइवर ने ब्रेक लगाए। स्पीड में एकदम लगाए गए ब्रेक की वजह से डिब्बों का संतुलन बिगड़ा और डिब्बे नदी में गिर गए। दूसरी वजह ये कि ट्रेन के खिड़की-दरवाजे सब बंद थे, इसलिए तेज आंधी- तूफान का पूरा दबाव ट्रेन पर पड़ा और ट्रेन नदी में गिर गई।

हादसे में कितने लोग मरे इसका भी कोई सटीक आंकड़ा नहीं है। रेलवे ने बताया कि 500 लोगों की मौत हुई है। बाद में मरने वालों की संख्या 1 से 3 हजार बताई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि ये ट्रेन पैसेंजर थी, इसलिए ट्रेन में यात्री भी ज्यादा सवार थे। यानी मरने वालों का आंकड़ा भी ज्यादा ही होगा।

हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। गोताखोरों की मदद से 286 लाशें ही नदी में से बाहर आ पाईं। सैकड़ों लोगों की लाश का आज तक कोई पता नहीं चला।

आज ही बनी थी पहली डेनिम जींस

टी-शर्ट, शर्ट, कुर्ता और लगभग सभी तरह के कपड़ों के साथ पहने जाने वाली जींस का इतिहास भी आज ही के दिन से जुड़ा है। 1850 में लीवाई स्ट्रॉस ने आज ही के दिन पहली जींस बनाई थी। स्ट्रॉस 1847 में जर्मनी से न्यूयॉर्क आए थे। न्यूयॉर्क में स्ट्रॉस के बड़े भाइयों का कपड़े का कारोबार था। स्ट्रॉस उन्हीं के कारोबार में हाथ बंटाने लगे।

1853 में स्ट्रॉस गोल्ड माइनिंग के क्षेत्र में काम करने के लिए सैन फ्रांसिस्को चले गए। वहां जाकर स्ट्रॉस कपड़े बेचने का कारोबार करने लगे और अपनी दुकान को नाम दिया - लीवाई स्ट्रॉस एंड कंपनी।

इसी बीच उनके पास जैकब डेविस नाम का एक टेलर आया जिसने स्ट्रॉस से मजबूत डेनिम कपड़ा खरीदा। दरअसल इस टेलर के पास सोने की खदान में काम करने वाला एक युवक कपड़े सिलवाने आया था। उसने टेलर से ऐसी पैंट सिलने को कहा जो खदान में काम करने में भी न फटे और जिसमें सामान रखने के लिए ज्यादा जेबें हों। जैकब ने स्ट्रॉस से कपड़ा खरीदा और पैंट सिलनी शुरू की। पैंट में आसानी से फटने वाली जगह जैसे जेबों में मजबूती के लिए तांबे की कील लगाई गई।

जींस की मजबूती दर्शाने के लिए लीवाई स्ट्रॉस कंपनी द्वारा जारी किया गया एक विज्ञापन।
जींस की मजबूती दर्शाने के लिए लीवाई स्ट्रॉस कंपनी द्वारा जारी किया गया एक विज्ञापन।

जैकब का ये आइडिया चल निकला। पैंट की मजबूती की वजह से खदानों में काम करने वाले लोग इसे पसंद करने लगे। अब स्ट्रॉस और जैकब दोनों पार्टनर बन गए। दोनों ने मिलकर पैंट बनाने की फैक्ट्री खोली। इस तरह जींस का जन्म हुआ।

1984: पहली बार टेट्रिस गेम को रिलीज किया गया

सोवियत संघ में एक कम्प्यूटर इंजीनियर थे, नाम था - एलेक्सी पेजित्नोव। एलेक्सी सोवियत एकेडमी ऑफ साइंसेस में काम करते थे। इस एकेडमी ने इलेक्ट्रोनिका-60 नाम से एक कंप्यूटर बनाया था, जिसकी टेस्टिंग की जिम्मेदारी एलेक्सी को मिली। एलेक्सी ने टेस्टिंग के दौरान ही एक गेम बनाया, जिसे आज पूरी दुनिया टेट्रिस नाम से जानती है।

1984 में पहली बार बनाया गया टेट्रिस गेम कुछ इस तरह दिखता था।
1984 में पहली बार बनाया गया टेट्रिस गेम कुछ इस तरह दिखता था।

एलेक्सी को गेम बनाने का आइडिया एक पजल गेम पेंटोमिनोस से आया था। इसमें 5 स्क्वायर से बनी अलग-अलग आकृतियों को एक लकड़ी के डिब्बे में जमाया जाता था। एलेक्सी ने इसी पजल गेम को कंप्यूटर पर बनाने का सोचा। उन्होंने 5 की जगह 4 स्क्वैयर शेप की आकृतियां ली जो ऊपर से नीचे आती थीं और खेलने वाला उनको अपने हिसाब से दाएं-बाएं कर एक के ऊपर एक जमा सकता था। उनका ये गेम चल निकला। अगले 2 साल में ही ये गेम सोवियत संघ से निकलकर नॉर्थ अमेरिका और यूरोप तक पहुंच गया। आज भी दुनियाभर में इस गेम को करोड़ों लोग खेलते हैं।

6 जून 2017 को मंदसौर में हुए गोलीकांड में मारे गए किसानों के परिजनों से मिलने पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी।
6 जून 2017 को मंदसौर में हुए गोलीकांड में मारे गए किसानों के परिजनों से मिलने पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी।

2017: मंदसौर गोलीकांड को 4 साल

6 जून 2017। मध्य प्रदेश के किसान इस दिन को काले दिन के तौर पर याद करते हैं। अफीम की खेती के लिए मशहूर मंदसौर में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे किसानों पर फायरिंग कर दी थी, जिसमें 6 किसानों की मौत हो गई। पूरे देश में ये घटना मंदसौर गोलीकांड के नाम से जानी जाती है।

उस समय पूरे मध्यप्रदेश में किसान जगह-जगह अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर थे। किसानों के एजेंडे में कर्जमाफी, समर्थन मूल्य पर खरीदी जैसी 20 सूत्री मांगें शामिल थीं। सड़कों पर दूध बहाया जा रहा था, फल-सब्जियां फेंकी जा रही थीं। इसी दौरान मंदसौर के पिपलिया मंडी चौपाटी पर किसान और पुलिस आमने-सामने आ गए। पुलिस ने फायरिंग की जिसमें 5 किसानों की मौके पर ही मौत हो गई। एक किसान ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

माना जाता है कि किसानों पर हुई इस कार्रवाई से पूरे राज्य के किसान शिवराज सरकार के खिलाफ हो गए थे, जिसका नतीजा ये हुआ कि अगले ही साल विधानसभा चुनावों में भाजपा हार गई।

6 जून के दिन को और किन-किन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की वजह से याद किया जाता है...

2004: अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का निधन हुआ।

2004: राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने तमिल भाषा को क्लासिक भाषा का दर्जा दिया।

2002: इजराइली सेना ने फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात के मुख्यालय पर हमला किया।

1999: लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी ने टेनिस का ग्रैंड स्लैम जीता।

1882: न्यूयॉर्क के हेनली सिली ने इलेक्ट्रिक प्रेस के लिए पेटेंट हासिल किया।

1674: रायगढ़ के किले में शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ।

1596: सिखों के छठे गुरु हरगोविंद जी का जन्म हुआ।