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सुप्रीम कोर्ट के 5 जज जिन्होंने आज विवादित स्थल पर फैसला सुनाया

9 महीने पहले
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  • केंद्र सरकार ने फैसले से पहले पांचों जजों की सुरक्षा बढ़ाई, चीफ जस्टिस को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई
  • चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इस मामले की सुनवाई के दौरान ही कह दिया था कि वे अपने रिटायरमेंट से पहले फैसला सुनाएंगे

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ आज अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल रहे। सरकार ने इस अहम फैसले से पहले सीजेआई गोगोई को जेड प्लस सुरक्षा दी। जबकि, 4 अन्य जजों की सुरक्षा बढ़ाई गई। जजों के घर पर भी अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के बाहर भारी मात्रा में सुरक्षाबल तैनात किया गया। 

1) 5 जजों ने 40 दिन तक अयोध्या मामले पर सुनवाई की

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई अक्टूबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। वे असम के रहने वाले हैं और इस पद तक पहुंचने वाले पूर्वोत्तर राज्य के पहले व्यक्ति हैं। कानून की पढ़ाई करने के बाद 1978 में उन्होंने बार में नामांकन कराया। उन्होंने गुवाहाटी हाईकोर्ट में प्रैक्टिस की और 28 फरवरी 2001 को स्थायी जज नियुक्त हुए। यहां से उनका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। गोगोई यहां 2011 में चीफ जस्टिस बने। अप्रैल 2012 में उनकी नियुक्ति बतौर जज सुप्रीम कोर्ट में हुई। 

सीजेआई गोगोई ने अपने 18 साल लंबे करियर में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) समेत कई अहम फैसले सुनाए। जस्टिस गोगोई ने अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान ही कह दिया था कि वे अपने रिटायरमेंट से पहले ही अयोध्या मामले पर फैसला सुनाना चाहते हैं। 

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने जस्टिस शरद अरविंद बोबडे को सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई पद के लिए नामित किया था। महाराष्ट्र में जन्मे जस्टिस बोबडे ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में कानून की प्रैक्टिस की। उन्होंने साल 2000 में बॉम्बे हाईकोर्ट में बतौर एडिशनल जज अपनी सेवाएं शुरू कीं। इसके दो साल बाद उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ट्रांसफर किया गया। फिर 2012 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था। अप्रैल 2013 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति दी गई। जस्टिस बोबडे सीजेआई गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी समिति में शामिल थे। 

भारत के सबसे लंबे समय तक चीफ जस्टिस रहे जज वाईवी चंद्रचूड़ के बेटे जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड मई 2016 में सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए। इससे पहले वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रह चुके थे। मार्च 2000 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट के जज बने थे। उन्होंने लंबे समय तक महाराष्ट्र ज्यूडिशियल एकेडमी में निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाली। जस्टिस चंद्रचूड़ ने अयोध्या मामले पर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों की भावनाओं के कानूनी पक्ष की जांच की है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने जिन अहम मामलों पर फैसला सुनाया है, उनमें व्याभिचार और निजता का अधिकार जैसे केसेज शामिल हैं। 

जस्टिस अशोक भूषण ने साल 1979 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील के तौर पर प्रैक्टिस शुरू की। 22 सालों तक वकालत करने के बाद अप्रैल 2001 में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया। जुलाई 2014 में उन्हें केरल हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया, जहां उन्होंने काफी समय कार्यवाहक चीफ जस्टिस की जिम्मेदारी निभाई। मार्च 2015 में उन्हें केरल हाईकोर्ट का स्थायी जज बना दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति 13 मई 2016 को हुई। 

जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने फरवरी 1983 में कर्नाटक हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। 20 साल तक वकील रहने के बाद फरवरी 2003 में उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट में एडिशनल जज बनाया गया। 2004 में उन्हें स्थायी जज नियुक्त किया गया। फरवरी 2017 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया। अगस्त 2017 में उन्होंने तब के चीफ जस्टिस जेएस खेहर के साथ तीन तलाक मामले पर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट किसी धर्म के निजी कानूनों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस साल बिल पास करा तीन तलाक को बैन करा दिया। 

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