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नए IT कानून पर नरम पड़ीं कंपनियां:गूगल, फेसबुक, वॉट्सऐप समेत 7 प्लेटफॉर्म्स ने अपने अधिकारियों के नाम साझा किए, ट्विटर ने सिर्फ वकील का नाम भेजा

नई दिल्ली4 महीने पहले
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नए IT कानून के तहत गूगल, फेसबुक, वॉट्सऐप समेत 7 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने अपने अफसरों के नाम केंद्र सरकार को भेजे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इन कंपनियों ने अपने चीफ कॉम्प्लायंस अफसर, नोडल कॉन्टेक्ट पर्सन और रेजिडेंट ग्रीवांस ऑफिसर की नियुक्ति की जानकारी सरकार को सौंप दी है। हालांकि, ट्विटर ने अभी तक सिर्फ अपने वकील का नाम ही साझा किया है।

अब तक गूगल, फेसबुक, वॉट्सऐप, कू, शेयरचैट, टेलीग्राम और लिंक्डइन ने सरकार की नई पॉलिसी के तहत पूरी जानकारी भेजी है। वहीं ट्विटर ने सरकार की फटकार के बाद देर रात अपनी फर्म में काम करने वाले वकील की जानकारी साझा की है जो भारत में उनके नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन और शिकायत अधिकारी के तौर पर काम करेगा। लेकिन उन्होंने अपने चीफ कॉम्प्लायंस अफसर को लेकर अब तक कोई जानकारी सरकार को नहीं भेजी है।

गाइडलाइन को लेकर सरकार ने दिखाई सख्ती
सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए इसी साल 25 फरवरी को गाइडलाइन जारी की थी और इन्हें लागू करने के लिए 3 महीने का समय दिया था। डेडलाइन मंगलवार यानी 25 मई को खत्म हो गई। हालांकि इसके बाद भी ट्विटर और फेसबुक जैसी कंपनियां सरकार से दो-दो हाथ करने के मूड में दिख रही थीं। लेकिन केंद्र सरकार के सख्त रवैये को देखते हुए इन कंपनियों ने शनिवार को मांगी गई जानकारी साझा की है।

सरकार ने ट्विटर को लगाई फटकार
इससे पहले ट्विटर द्वारा आईटी एक्ट के नए नियमों का पालन न किए जाने पर सरकार ने कंपनी को फटकार लगाई थी। ट्विटर की ओर से जारी बयान में अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देकर चिंता जाहिर करने पर सरकार ने कंपनी से कहा था कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना भारत सरकार की जिम्मेदारी है न कि ट्विटर जैसी किसी निजी लाभकारी विदेशी संस्था की।

सरकार ने सोशल मीडिया के लिए क्या गाइडलाइन जारी की?

  • सभी सोशल मीडिया भारत में अपने 3 अधिकारियों, चीफ कॉम्प्लायंस अफसर, नोडल कॉन्टेक्ट पर्सन और रेजिडेंट ग्रीवांस अफसर नियुक्त करें। ये भारत में ही रहते हों। इनके कॉन्टेक्ट नंबर ऐप और वेबसाइट पर पब्लिश किए जाएं।
  • ये प्लेटफॉर्म ये भी बताएं कि शिकायत दर्ज करवाने की व्यवस्था क्या है। अधिकारी शिकायत पर 24 घंटे के भीतर ध्यान दें और 15 दिन के भीतर शिकायत करने वाले को बताएं कि उसकी शिकायत पर एक्शन क्या लिया गया और नहीं लिया गया तो क्यों नहीं लिया गया।
  • ऑटोमेटेड टूल्स और तकनीक के जरिए ऐसा सिस्टम बनाएं, जिसके जरिए रेप, बाल यौन शोषण के कंटेंट की पहचान करें। इसके अलावा इन पर ऐसी इंफॉर्मेशन की भी पहचान करें, जिसे पहले प्लेटफॉर्म से हटाया गया हो। इन टूल्स के काम करने का रिव्यू करने और इस पर नजर रखने के लिए भी पर्याप्त स्टाफ हो।
  • प्लेटफॉर्म एक मंथली रिपोर्ट पब्लिश करें। इसमें महीने में आई शिकायतों, उन पर लिए गए एक्शन की जानकारी हो। जो लिंक और कंटेंट हटाया गया हो, उसकी जानकारी दी गई हो।
  • अगर प्लेटफॉर्म किसी आपत्तिजनक जानकारी को हटाता है तो उसे पहले इस कंटेंट को बनाने वाले, अपलोड करने वाले या शेयर करने वाले को इसकी जानकारी देनी होगी। इसका कारण भी बताना होगा। यूजर को प्लेटफॉर्म के एक्शन के खिलाफ अपील करने का भी मौका दिया जाए। इन विवादों को निपटाने के मैकेनिज्म पर ग्रीवांस ऑफिसर लगातार नजर रखें।

नए कानून पर किसने क्या कहा?

कानून मंत्री: आम वॉट्सऐप यूजर्स को डरने की जरूरत नहीं
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि नए नियम से आम वॉट्सऐप यूजर्स को डरने की जरूरत नहीं है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि नियमों में बताए गए कुछ अपराधों को अंजाम देने वाले संदेश की शुरुआत किसने की।

उन्होंने कहा कि ऑफेंसिव मैसेज के पहले ओरिजनेटर के बारे में जानकारी देना पहले से ही प्रचलन है। ये मैसेज भारत की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, बलात्कार, बाल यौन शोषण से संबंधित अपराधों से संबंधित हैं।

ट्विटर: भारत में अपने कर्मचारियों को लेकर चिंता
ट्विटर ने गुरुवार को कहा कि भारत में बने नियमों में से जिसे हम लागू कर सकते हैं, उसे लागू करने की कोशिश करेंगे। लेकिन, हम अभिव्यक्ति की आजादी और पुलिस की धमकाऊ प्रवृत्ति को लेकर चिंतित हैं। हम नियमों को लागू करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ये पूरी तरह पारदर्शिता के उसूलों के साथ होगा। हम भारत के लोगों के लिए प्रतिबद्ध हैं।

हमारी सर्विस भारत में कम्युनिकेशन के लिए प्रभावी जरिया साबित हुई है। महामारी के समय ये संबल का जरिया भी बनी है। हम भारत में अपने कर्मचारियों के साथ हुई घटनाओं को लेकर भी परेशान हैं। हम पूरे मामले में भारत सरकार के साथ अपनी बातचीत को जारी रखेंगे। हमारा मानना है कि इस मामले में दोनों ओर से सहयोगात्मक रवैया अपनाना जरूरी है।

गूगल: किसी भी देश के नियमों का सम्मान करते हैं
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि हम सरकार ने IT नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अभी शुरूआती दौर है और हमारी लोकल टीमें इसमें काफी व्यस्त हैं। किसी भी देश के स्थानीय नियमों का हम सम्मान करते हैं और हमारा नजरिया इस दिशा में रचनात्मक रहता है। हमारी ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट स्पष्ट हैं। जब हम किसी सरकार की अपील पर अमल करते हैं तो इसे इस रिपोर्ट में हाईलाइट करते हैं।

वॉट्सऐप: कोर्ट में कहा- निजता का उल्लंघन
वॉट्सऐप ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि सरकार के इस फैसले से लोगों की प्राइवेसी खत्म हो जाएगी। वॉट्सऐप के प्रवक्ता ने बताया कि मैसेजिंग ऐप से चैट को इस तरह से ट्रेस करना लोगों की निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा। हमारे लिए यह वॉट्सऐप पर भेजे गए सारे मैसेज पर नजर रखने जैसा होगा, जिससे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का कोई औचित्य नहीं बचेगा।

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