वुमंस डे / मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 7 महिलाओं को सौंपे, 13 की उम्र में दोनों हाथ खोने वाली मालविका बोलीं- हार मानना कोई विकल्प नहीं

Women's Day: 7 women achievers to handle PM's social media accounts
सामाजिक कार्यकर्ता मालविका अय्यर। सामाजिक कार्यकर्ता मालविका अय्यर।
मोदी ने हाल ही में महिला दिवस के मौके पर अपना सोशल मीडिया अकाउंट एक दिन के लिए महिलाओं को सौंपने की बात कही थी। -फाइल मोदी ने हाल ही में महिला दिवस के मौके पर अपना सोशल मीडिया अकाउंट एक दिन के लिए महिलाओं को सौंपने की बात कही थी। -फाइल
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Women's Day: 7 women achievers to handle PM's social media accounts
सामाजिक कार्यकर्ता मालविका अय्यर।सामाजिक कार्यकर्ता मालविका अय्यर।
मोदी ने हाल ही में महिला दिवस के मौके पर अपना सोशल मीडिया अकाउंट एक दिन के लिए महिलाओं को सौंपने की बात कही थी। -फाइलमोदी ने हाल ही में महिला दिवस के मौके पर अपना सोशल मीडिया अकाउंट एक दिन के लिए महिलाओं को सौंपने की बात कही थी। -फाइल

  • प्रधानमंत्री ने कहा- भारत में महिलाओं ने हर क्षेत्र में बेहतर काम किया, उनका संघर्ष लाखों लोगों के लिए प्रेरणा
  • तीन मार्च को मोदी ने घोषणा की थी कि वे 8 मार्च को अपना सोशल मीडिया अकाउंट्स महिलाओं के सुपुर्द करेंगे

दैनिक भास्कर

Mar 08, 2020, 05:56 PM IST

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर 7 महिलाओं को अपना सोशल मीडिया अकाउंट्स सौंपा दिया। इनमें सामाजिक कार्यकर्ता मालविका अय्यर भी शामिल हैं। उन्होंने 13 साल की उम्र में बम धमाके में अपना दोनों हाथ खो दिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री के ट्विटर से ट्वीट किया- हार मानना कोई विकल्प नहीं है। वह दिव्यांगों के हक के लिए लड़ती हैं। उन्होंने सोशल वर्क में पीएचडी भी की है।

स्नेहा मोहनदास भारत को हंगर फ्री राष्ट्र बनाने में जुटी हैं 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल अकाउंट को सबसे पहले संभालने वाली चेन्नई निवासी स्नेहा मोहनदास ने अपनी फूड फॉर थॉट मुहिम के बारे में बताया। वह फूड बैंक चलाती हैं। उन्होंने ट्विवटर पर अपना एक वीडियो भी शेयर किया। स्नेहा ने 2015 में फूडबैंक इंडिया की शुरुआत की थी। उनका सपना है कि भारत हंगर फ्री राष्ट्र बने। उनकी मुहिम से सैकड़ों लोग जुड़े हुए हैं। वह लोगों से रोज कुछ अतिरिक्त पकाने के लिए कहती हैं। इसके बाद अपने वॉलंटियर भेजकर वह भोजन जरूरतमंदों में बांटती हैं। 

आरिफा जान कश्मीर की क्राफ्ट को नई जान दे रहीं हैं
कश्मीर के श्रीनगर निवासी आरिफा ने जम्मू-कश्मीर के क्राफ्ट को एक नई पहचान दिलाई है। क्राफ्ट मैनेजमेंट करने बाद उन्होंने देखा कि इस क्षेत्र में कामगारों को सही कीमत नहीं मिलती। इसलिए यहां के क्राफ्ट की पहचान खत्म हो रही है। उन्होंने 28 महिलाओं का एक समूह बनाया कश्मीर के परंपरागत पश्मीना साल, दरी और अन्य क्राफ्ट बनाना शुरू कर दिया। वह  लगभग सात साल से यह कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने नए युवक-युवतियों को यह कला भी सिखाई। 

हैदराबाद की कल्पना रमेश जल संरक्षण की मुहिम चला रहीं
हैदराबाद की कल्पना रमेश ने पीएम मोदी के टि्वटर अकाउंट पर लिखा- ‘‘योद्धा बनिए, लेकिन दूसरी तरह के। क्या आपने कभी पानी की कमी के बारे में सोचा है। हममें से हर कोई पानी बचाकर अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर सकता है।’’ कल्पना ने बताया कि उन्होंने आर्किटेक्टर में ग्रेजुएशन किया है। जब वह शादी के बाद हैदराबाद आईं तो पाया कि गर्मियों में पानी के लिए लोगों को टैंकरों के भरोसे रहना होता था। आर्किटेक्चर बैकग्राउंड होने की वजह से उन्होंने ऐसे घर बनाए जहां पानी की एक भी बूंद बर्बाद न हो। इसके साथ की कम्युनिटी के लोगों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर जागरूक किया। नतीजतन उनकी कम्युनिटी को 2016 के बाद से गर्मियों में पानी के टैंकर की जरूरत नहीं पड़ी।

महाराष्ट्र की विजया थापर बंजारा हस्तकला को जीवंत कर रहीं 
महाराष्ट्र की विजया पवार ग्रामीण इलाकों में बंजारा हस्तकला को जीवंत करने में जुटीं हैं। विजया ने बताया कि बचपन से वह इस कला के साथ जुड़ी थीं, लेकिन शादी के बाद पति का भी इस ओर रुझान था। उन्होंने यह कला अपने पति से ही सीखी। 2004 में उन्होंने एक एनजीओ का रजिस्ट्रेशन कराया और महिलाओं को प्रशिक्षण देना शुरु किया। भारत सरकार वस्त्र उद्योग मंत्रालय की आंबेडकर हस्त शिल्प परियोजना के तहत 682 महिलाओं को पांच साल तक ट्रेनिंग दी। वे गांव-गांव जाकर महिलाओं को सक्षम बना रही हैं। अब महिलाओं ने खुद का व्यापार शुरू कर दिया है। 

कलावती देवी ने जगाई स्वच्छता की अलख, भीख मांगकर बनवाए शौचालय और पानी की टंकी
उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली कलावती देवी का कहना है कि अगर लक्ष्य को पाना है तो पीछे मुड़कर नहीं देखते। कलावती ने स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक किया है। उन्होंने बताया कि जिस बस्ती में वह रहती थीं, वहां लोग कीड़े-मकोड़ों की तरह रहते थे। कहीं भी शौचालय नहीं था और स्वच्छ पानी भी नहीं मिलता था। उन्होंने लोगों को घर-घर जाकर शौचालय के प्रति जागरूक किया और एक साल भीख मांगकर रुपये इकट्‌ठे किए। इसके बाद 55 शौचालय बनवाए और 11000 लीटर की दो टंकियां लगवाईं और पाइपलाइन से घर-घर तक पानी पहुंचाया। 

बिहार की वीणा देवी मशरूम की खेती से महिलाओं को बना रहीं आर्थिक रूप से मजबूत
बिहार की रहने वाली वीणा देवी घर में ही मशरूम की खेती कर खुद भी संबल बन रही हैं और अन्य महिलाओं को भी आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं। वीणा देवी ने बताया कि उनकी तकनीक से केवल पलंग जितनी जगह में भी मशरूम उगाया जा सकता है। इसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री भी सम्मानित कर चुके हैं। 

 

महिला दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री ने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता वसुंधराराजे सिंधिया को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने राजस्थान की प्रगति के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया और खुद को केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रतिष्ठित किया। मैं उनके लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।

इससे पहले मोदी ने ट्वीट किया- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं। हम नारी शक्ति की भावनाओं और योग्यता को सलाम करते हैं। जैसा कि मैंने कुछ दिन पहले कहा था, मैं साइन ऑफ कर रहा हूं। उपलब्धियां हासिल कर चुकीं सात महिलाएं मेरे सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए अपनी जीवन यात्रा के बारे में बताएंगी, और आपसे बात करेंगी।
 

एक अन्य ट्वीट में कहा- ‘‘भारत में महिलाओं ने हर क्षेत्र में बेहतर काम किया है। उनका संघर्ष और महत्वाकांक्षाएं लाखों लोगों को प्रेरित करती हैं। हम ऐसी महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाते रहें और उनसे सीखें।’’

मोदी ने #SheInspiresUs पर महिलाओं के किस्से साझा करने की बात कही थी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 मार्च यानी महिला दिवस के दिन अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स उन महिलाओं को सौंपने का फैसला किया था, जो दूसरों के लिए प्रेरणा है। इस फैसले के बाद ही मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वे #SheInspiresUs पर ऐसी महिलाओं के किस्से साझा करें, जो दूसरों के लिए प्रेरणा हैं।

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